मॉस्को: रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने दुनिया की सियासी बिसात पर एक तगड़ा दांव खेला है. उन्होंने भारत, रूस और चीन (RIC) के पुराने त्रिकोण को फिर से जिंदा करने की जोरदार वकालत की है. गुरुवार को रूस के पर्म शहर में एक बड़े सम्मेलन में लावरोव ने कहा, ‘भारत और चीन ने सीमा पर तनाव कम करने की राह पकड़ ली है, अब वक्त है RIC को फिर से खड़ा करने का.’ उनका इशारा साफ है- रूस चाहता है कि ये तीनों देश मिलकर पश्चिमी ताकतों, खासकर नाटो, के खिलाफ एक मजबूत ध्रुव बनाएं. यह खबर डोनाल्ड ट्रंप को झटका देने के लिए काफी है.
लावरोव ने नाटो पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि नाटो भारत को ‘चीन के खिलाफ साजिश’ में फंसाने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा, ‘हमारी भारतीय दोस्तों से गोपनीय बातचीत में ये साफ हो चुका है कि भारत नाटो की इस चाल को भांप चुका है.’ लेकिन बात यहीं नहीं रुकी. रूस का ये बयान तब आया है, जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन को ‘आग से खेलने वाला’ कहकर सबको चौंका दिया. कुछ ही दिन पहले की बात है जब ट्रंप रूस के साथ दोस्ती की बात करते थे, अब अचानक उसके खिलाफ तलवार खींच रहे हैं.
RIC त्रिकोण की कहानी 2006 से शुरू हुई थी, जब भारत के तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह, चीन के हू जिंताओ और रूस के व्लादिमीर पुतिन ने हाथ मिलाया था. इसे ब्रिक्स की नींव माना जाता है. लेकिन 2020 में गलवान की झड़प के बाद ये त्रिकोण ठप हो गया. वहीं दूसरी ओर, भारत-चीन के बीच तनाव और चीन का पाकिस्तान को हथियारों से लैस करना भारत के लिए बड़ा सिरदर्द बना हुआ है. रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन अब पाकिस्तान को पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट देने की तैयारी में है. ऐसे में भारत का RIC में दोबारा शामिल होना कितना आसान होगा, ये बड़ा सवाल है.
लावरोव भले यह कह रहे हों कि भारत को नाटो अपने जाल में फंसा रहा है. लेकिन भारत को भी सियासी दांवपेच आते हैं. एक तरफ रूस उसका पुराना यार है, दूसरी तरफ भारत 1-3 जून को यूरोपीय संघ (EU) के साथ हिंद महासागर में जोरदार नौसैनिक अभ्यास करने जा रहा है. ये अभ्यास समुद्री डकैती रोकने, युद्ध कौशल और संचार मजबूत करने पर केंद्रित होगा. EU का कहना है कि ये एक ‘खुले और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था’ का प्रतीक है. लेकिन रूस को ये बात चुभ रही है, क्योंकि नाटो और पश्चिमी देशों के साथ भारत की नजदीकी उसे अपने प्लान के लिए खतरा दिखती है.
चीन की हरकतों ने भारत को और सतर्क कर दिया है. लावरोव भले ही RIC की बात करें, लेकिन भारत जानता है कि चीन पाकिस्तान को हथियार देकर उसे परेशान कर रहा है. भारत ने साफ कह दिया है कि चीन को अपनी इस ‘कठपुतली’ को काबू में करना होगा. ऐसे में भारत के सामने बड़ा सवाल है- क्या वो उस देश के साथ खड़ा हो सकता है, जो उसके दुश्मन को पाल रहा है?