पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सुधार जरूरी : नीति आयोग – Live Hindustan

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। नीति आयोग की तरफ से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में होटल परियोजनाओं को शुरू करना काफी कठिन है। किसी भी परियोजना को शुरू होने में 36 से 48 महीने लग जाते हैं। जबकि, कई आसियान देशों में यही काम 12 से 18 महीने में पूरा हो जाता है। इससे परियोजनाओं की लागत बढ़ती है और निवेशकों का उत्साह कम होता है, लेकिन ऐसी रुकावटों को दूर कर और नियमों का आसान बनाकर पर्यटन क्षेत्र में निवेश और रोजगार बढ़ाए जा सकते हैं।
मंगलवार को केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में विकास की संभावनाओं को खोलने विषय पर नीति आयोग की तरफ से रिपोर्ट जारी की। इसमें भारत को वर्ष 2047 तक दुनिया के प्रमुख पर्यटन देशों में शामिल करने के लिए पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी (आतिथ्य) क्षेत्र में बड़े सुधारों की सिफारिश की है। रिपोर्ट में कहा गया कि देश में कारोबार शुरू करने में लगने वाला समय, जटिल नियम और कई तरह की मंजूरियां निवेश में सबसे बड़ी बाधा हैं। ऐसे में होटल, होमस्टे, रेस्तरां, परिवहन और टूर ऑपरेटरों के लिए कई सुधारात्मक सुझाए दिए गए हैं। इनमें होटलों के लिए भवन निर्माण नियम आसान बनाना, एक ही परिसर में अलग-अलग सेवाओं के लिए एकल हेल्थ ट्रेड लाइसेंस और एकल शराब लाइसेंस लागू करने का भी सुझाव दिया गया है। इसके साथ ही, होटलों के लिए पर्यटन मंत्रालय की परियोजना-स्तर की मंजूरी समाप्त करना, स्टार रेटिंग को लाइसेंस या ऋण से अलग करना भी शामिल है। रिपोर्ट में होमस्टे पंजीकरण के लिए स्थानीय निकायों से एनओसी की अनिवार्यता खत्म करने की भी सिफारिश की गई है।
रिपोर्ट की अन्य अहम सिफारिशें :
-ऑनलाइन और ऑटोमैटिक मंजूरी : बिल्डिंग प्लान की जांच के लिए ऑटोमैटिक सॉफ्टवेयर सिस्टम अपनाया जाए।
-एक ही पोर्टल पर सभी एनओसी : लोक निर्माण विभाग, जल संसाधन विभाग और ऊंचाई की मंजूरी जैसे सभी सरकारी विभागों की एनओसी को ऑनलाइन बिल्डिंग परमिट पोर्टल के साथ ही जोड़ दिया जाए।
-टर्नओवर की सीमा बढ़ाना : एफएसएसएआई रजिस्ट्रेशन के लिए टर्नओवर (सालाना कमाई) की सीमा बढ़ाकर 1.5 करोड़ की जाए।
-बार लाइसेंस की अवधि बढ़ाना : बार लाइसेंस की वैधता को बढ़ाकर पांच साल किया जाए।
-पुलिस एनओसी/लाइसेंस की जरूरत नहीं : खाने-पीने की चीजें देने वाले आउटलेट्स को पुलिस से ईटिंग हाउस लाइसेंस लेने की जरूरत को खत्म किया जाए।
-टूरिस्ट परमिट की अवधि बढ़ाना : ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट की न्यूनतम वैधता को 90 दिनों से बढ़ाकर 1 साल किया जाए।
-एंट्री टैक्स से छूट : जिन गाड़ियों के पास पहले से ही ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट है, उनसे राज्य स्तर पर लिए जाने वाले एंट्री टैक्स या फीस को हटाया जाए।
-पूंजी की कोई सीमा नहीं : टूर ऑपरेटर या ट्रैवल एजेंसी के रूप में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए न्यूनतम जमा पूंजी की शर्त को हटाया जाए।
-डिग्री या डिप्लोमा की जरूरत नहीं : रजिस्ट्रेशन के लिए टूरिज्म या ट्रैवल से जुड़ी डिग्री या डिप्लोमा होने की अनिवार्यता को खत्म किया जाए।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के विकास में पर्यटन क्षेत्र की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि निवेश को बढ़ावा देने, पर्यटन अवसंरचना का विस्तार करने, आवास सुविधाओं की क्षमता बढ़ाने और कारोबार की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए केंद्र की सरकार हर जरूरी कदम उठा रही है। आज नीति आयोग की रिपोर्ट में जो सिफारिशें की गई है, उन सभी पर विचार करने के लिए और हर जरूरी कदम उठाने के लिए सरकार तत्पर है। वहीं, नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने कहा कि पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में रोजगार सृजन, उद्यमिता को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय विकास की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि पर्यटन क्षेत्र में निवेश समय, लागत और नीतिगत स्पष्टता के प्रति बेहद संवेदनशील होता है। इसलिए निवेश को तेज करने के लिए कारोबार सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) में सुधार करना बेहद जरूरी है।
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