Meerut News: शिवराज चौहान मेरठ में बोले- 'खेत में उतरे बिना खेती नहीं समझी जा सकती' | News Track in Hindi – Newstrack

शिवराज चौहान मेरठ में बोले- ‘खेत में उतरे बिना खेती नहीं समझी जा सकती’ (Photo- Social Media)

Meerut News: “किसानों की सेवा मेरे लिए ईश्वर की आराधना से कम नहीं,” यह भावपूर्ण उद्घोष करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान रविवार को मेरठ के दबुथवा इंटर कॉलेज में आयोजित किसान पंचायत में किसानों से मुखातिब हुए। मंच पर आते ही उन्होंने सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को नमन किया और उनकी किसान-नीति को आज भी प्रेरणा का स्रोत बताया।
कृषि मंत्री ने साफ कहा कि अब वक्त आ गया है कि वैज्ञानिक सिर्फ लैब में बैठकर अनुसंधान ना करें, बल्कि खेतों में उतरें और किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करें। इसी सोच को जमीन पर उतारने के लिए केंद्र सरकार ने “विकसित कृषि संकल्प अभियान” की शुरुआत की है, जिसकी नींव 29 मई को रखी गई — संयोगवश वही दिन चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि भी थी।
कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, सांसद अरुण गोविल, सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान, कृषि वैज्ञानिकों और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। किसानों के बीच खड़े होकर शिवराज सिंह ने कहा, “मैं यहां किसी पद या अहंकार के साथ नहीं, बल्कि एक सेवक के रूप में आया हूं।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब नीति निर्माण दिल्ली से नहीं, गांवों से होगा। किसानों की उपज, मिट्टी की गुणवत्ता और बीजों की किस्म जैसी अहम बातें तभी समझी जा सकती हैं जब नीति निर्माता खुद गांव जाएं। उन्होंने वैज्ञानिकों से मिट्टी परीक्षण की मुहिम तेज करने, और विभागीय अधिकारियों से नकली दवाओं और उर्वरकों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
इस अभियान के तहत देश के 20 राज्यों के 700 से अधिक जिलों में किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित किया जा रहा है। 731 कृषि विज्ञान केंद्र और ICAR के 113 संस्थान इसे साकार करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
कार्यक्रम में किसानों को जैविक खेती, ड्रिप सिंचाई, बीमा योजनाएं, और उन्नत बीज तकनीक की जानकारी दी गई। सवाल-जवाब के सत्र में किसानों ने वैज्ञानिकों से अपनी व्यावहारिक समस्याएं साझा कीं। शिवराज सिंह ने जाते-जाते बुजुर्ग किसानों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और भरोसा दिलाया कि सरकार केवल योजनाएं गिनाने नहीं, किसानों की सुनने और समझने निकली है।
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