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29 सितम्बर 2008 को महाराष्ट्र में नासिक जिले के मालेगांव में बम ब्लास्ट हुआ था. मस्जिद के पास खड़ी एक मोटरसाइकिल से बंधे विस्फोटक से ये धमाका हुआ था. इस धमाके में 6 लोगों की मौत हुई थी, इसके अलावा 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. ब्लास्ट उस वक्त किया गया जब लोग रमजान के दौरान नमाज पढ़ने जा रहे थे. अक्टूबर 2008 में महाराष्ट्र ATS ने इस केस की जांच शुरू की थी, साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित सहित कई लोग गिरफ्तार किए गए थे. इसके बाद 2009 में जांच NIA को सौंप दी गई. 2017 में सुप्रीम कोर्ट से साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित को जमानत मिल गई थी. NIA ने इस मामले में दी अपनी अंतिम दलील में कहा था कि षड्यंत्रकारियों ने मालेगांव विस्फोट की साजिश मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों में डर फैलाने, आवश्यक सेवाओं को बाधित करने, साम्प्रदायिक तनाव फैलाने और राज्य की आंतरिक सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए रची थी.
Malegaon bomb blast: महाराष्ट्र के मालेगांव में 2008 के बम धमाके के मामले में आज एनआईए की विशेष अदालत फैसला सुना सकती है. मुख्य आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और अन्य 7 आरोपियों पर आतंकवाद, हत्या और धार्मिक उन्माद फैलाने के आरोप हैं. 17 साल लंबे ट्रायल में कई गवाह पलट गए, जिससे केस कमजोर हुआ है.