14 जून, रविवार, शक संवत् : 24 ज्येष्ठ (सौर) 1948, पंजाब पंचांग : 31 ज्येष्ठ मास प्रविष्टे 2083, इस्लाम : 27 जिल्हिजा, 1447, विक्रमी संवत् : द्वितीय (अधिक) ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी तिथि दोपहर 12.20 मिनट तक। उसके बाद अमावस्या। मृगशीर्ष नक्षत्र, धृति योग दोपहर 01.15 मिनट तक पश्चात शूल योग, शकुनि करण। चंद्रमा वृष राशि में (दिन-रात)। सूर्य उत्तरायण। सूर्य उत्तर गोल। ग्रीष्म ऋतु। सायं 04.30 मिनट से सायं 06 बजे तक राहुकालम्। पितृकार्येषु अमावस (आज तैल स्पर्श का निषेध है)।
सूर्योदय 05:47 ए एम
सूर्यास्त 09:55 पी एम
चन्द्रोदय 05:31 ए एम, जून 15
चन्द्रास्त 09:51 पी एम
ब्रह्म मुहूर्त 04:44 ए एम से 05:15 ए एम
प्रातः सन्ध्या 04:59 ए एम से 05:47 ए एम
अभिजित मुहूर्त 01:19 पी एम से 02:23 पी एम
विजय मुहूर्त 04:32 पी एम से 05:37 पी एम
गोधूलि मुहूर्त 09:53 पी एम से 10:09 पी एम
सायाह्न सन्ध्या 09:55 पी एम से 10:43 पी एम
अमृत काल 03:56 पी एम से 05:20 पी एम
निशिता मुहूर्त 01:35 ए एम, जून 15 से 02:07 ए एम, जून 15
राहुकाल 07:54 पी एम से 09:55 पी एम
यमगण्ड 01:51 पी एम से 03:52 पी एम
आडल योग 05:47 ए एम से 06:43 पी एम
दुर्मुहूर्त 07:46 पी एम से 08:51 पी एम
गुलिक काल 05:53 पी एम से 07:54 पी एम
वर्ज्य 11:44 ए एम से 01:08 पी एम
11:36 पी एम से 01:00 ए एम, जून 15
बाण मृत्यु – 08:23 ए एम तक
अग्नि – 08:23 ए एम से पूर्ण रात्रि तक
ज्येष्ठ अधिक मास की सोमवती अमावस्या इस बार 15 जून, सोमवार को पड़ रही है। धर्म-कर्म के कामों के लिए इस दिन को काफी शुभ माना जाता है। कई लोग इस दिन व्रत रखते हैं और स्नान-दान करते हैं।
पंचांग के मुताबिक, अमावस्या तिथि 14 जून को दोपहर 12:20 बजे शुरू होगी। तिथि का समापन 15 जून को सुबह 8:24 बजे होगा। सोमवार को अमावस्या होने की वजह से इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है।
मान्यता है कि इस दिन सुबह स्नान करने, पूजा-पाठ करने और दान देने से पुण्य मिलता है। कई लोग पितरों के लिए तर्पण भी करते हैं। ऐसे में जो लोग सोमवती अमावस्या का व्रत या पूजा करना चाहते हैं, वे 15 जून को सुबह 8:24 बजे तक ये काम कर सकते हैं।
योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।
परिचय और अनुभव
योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।
न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।
करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर
योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
पाठक किस भाषा में बात समझता है और किस तरह की जानकारी उसके लिए उपयोगी होती है—यह समझ उनके प्रोफेशनल सफर की सबसे बड़ी ताकत रही है।
एस्ट्रोलॉजी लेखन और उद्देश्य
योगेश के लिए ज्योतिष केवल भविष्य बताने का जरिया नहीं है। वह इसे आत्मचिंतन और सही फैसलों में मदद करने वाले एक मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं। इसी सोच के साथ वह राशिफल और अन्य ज्योतिषीय विषयों को संतुलित, व्यावहारिक और भरोसेमंद तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों को डराना नहीं, बल्कि जानकारी के जरिए उन्हें सोचने और समझने की दिशा देना है।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
राशिफल (डेली एवं वीकली)
ग्रह-गोचर
दशा-महादशा
अंकज्योतिष
सामुद्रिक शास्त्र
वास्तु शास्त्र
फेंगशुई
रत्न-उपाय
व्रत-त्योहार एवं पूजा-विधि
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