Adityapur News: गम्हरिया। सरायकेला-खरसावां में जमीन विवाद में सोमवार को ग्रामीणों ने एक पक्ष के चार लोगों को बंधक बना दिया। इनमें महिला भी शामिल थे। उग्र ग्रामीण कुछ शर्तों के बाद ही उन्हें छोड़ने को तैयार थे। ग्रामीणों ने थाना प्रभारी की एक नहीं सुनी। इसके बाद एसपी के निर्देश एसडीपीओ और सीओ गांव पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। आखिरकार ग्रामीण माने और बंधकों को छोड़ दिया। मामला कांड्रा के की सुदूर जंगलबहुल हुदू पंचायत के ऊपरबेड़ा गांव की है। जानकारी के मुताबिक, ऊपरबेड़ा में दो पक्षों के बीच जमीन का मौखिक बंटवारा हुआ था। इसको लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है।
इसको लेकर ग्रामसभा में एक पक्ष के नहीं आने से विवाद बढ़ता जा रहा था। सोमवार को इस मामले को लेकर विवाद बढ़ने पर गांव के तुमसा स्कूल में एक पक्ष के चार सदस्य भृगु राम सरदार, जटल सरदार, हबलू सरदार और करुणा सरदारिन को ग्रामीणों ने बंधक बनाया। इसकी जानकारी मिलते ही थाना प्रभारी विनोद कुमार गांव पहुंचे और उग्र ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण नहीं माने। इसकी जानकारी मिलने पर एसपी मनोज स्वर्गीयारी ने सरायकेला के एसडीपीओ अनुभव भारद्वाज को भारी संख्या में पुलिस बल के साथ वहां भेजा। इसी बीच ग़म्हरिया के सीओ प्रवीण कुमार भी वहां पहुंचकर ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि संबंधित सरदार परिवार खुद को जमींदार बताकर जमीन पर कब्जा करने पहुंच जाता है। इसके साथ ही तालाब में स्नान करने से रोकते हुए झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देता है। ग्रामीणों का कहना था कि परिवार का मुख्य व्यक्ति कार्तिक सरदार के सामने आने के बाद ही बंधकों को छोड़ा जाएगा। इधर दूसरी ओर कार्तिक सरदार ने आरोप लगाया कि उसके पूर्वजों ने माझी परिवार को बसने के लिए जमीन दी थी, लेकिन अब उनकी जमीन पर कब्जा किया जा रहा है। उसने मारपीट समेत कई आरोप भी लगाए हैं। दोनों पक्षों के आरोपों के बाद प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारी मामले की जांच कर जमीन विवाद से जुड़े मामले को सुलझाते हुए दोनों पक्षों के बीच उत्पन्न विवाद को समाप्त कराया। इसके बाद बंधकों को छोड़ा गया। दूसरी ओर ग्रामीणों का कहना है कि सभी से जानकारी ली जा रही थी। उन्हें बंधक नहीं बनाया गया था।
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