Bagalamukhi Jayanti: मां बगलामुखी की शक्तियों के आगे टिक नहीं पाता शत्रु, ऐसे हुई थी उत्पत्ति – AajTak

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Baglamukhi Jayanti 2026: हिंदू धर्म और खासतौर से तंत्र शास्त्र में मां बगलामुखी का स्थान अत्यंत विशिष्ट है. इन्हें स्तंभन की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है. मान्यता है कि मां अपने भक्तों के शत्रुओं की बुद्धि और वाणी को जड़ यानी स्थिर कर देती हैं. साल 2026 में आज 24 अप्रैल को मां बगलामुखी की जयंती मनाई जाएगी. यह दिन शत्रुओं पर विजय पाने, कोर्ट-कचहरी के विवादों को सुलझाने और जीवन की बड़ी बाधाओं को दूर करने के लिए अचूक माना जाता है. उनके चित्रों में हमेशा उन्हें शत्रु की जीभ खींचते हुए देखा जाता है, जो माता के खास स्वरूप को बताता है, और इसके अलावा माता के लगभग 16 स्वरूप हैं. 
मां बगलामुखी की दिव्य शक्तियां
तंत्र शास्त्र के अनुसार, मां बगलामुखी 16 प्रकार की महाशक्तियों का केंद्र हैं. इनमें से प्रमुख शक्तियां साधक को हर क्षेत्र में अजेय बनाती हैं. 
स्तंभिनी: यह माता की सबसे प्रमुख शक्ति है, जो शत्रु की गति, उसकी योजना और उसकी प्रगति को पूरी तरह रोक देती है. 
जंभिनी: यह शक्ति शत्रुओं के अहंकार को चूर-चूर कर उन्हें निर्बल और असहाय बना देती है. 
मोहिनी: इस रूप में माता साधक के व्यक्तित्व में ऐसा आकर्षण पैदा करती हैं कि लोग उसकी ओर खिंचे चले आते हैं.
वशंकरी: यह वशीकरण की शक्ति है, जो विपरीत परिस्थितियों और लोगों को साधक के अनुकूल बना देती है.
द्राविणी: इस शक्ति के माध्यम से शत्रुओं और नकारात्मक ऊर्जाओं को साधक के जीवन से दूर भगाया जाता है.
आकर्षणी: यह सफलता, धन और सौभाग्य को साधक की ओर खींचने वाली शक्ति है.
क्षोभणी: यह शत्रुओं के मन में भारी खलबली, डर और मानसिक तनाव पैदा कर देती है.
साधना: यह साधक को आध्यात्मिक सिद्धि और एकाग्रता प्रदान करने वाला रूप है.
भय नाश: जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह शक्ति साधक के मन से हर प्रकार के ज्ञात और अज्ञात भय को जड़ से खत्म कर देती है.
विजय: यह शक्ति कोर्ट-कचहरी, चुनाव या किसी भी प्रकार की प्रतिस्पर्धा में जीत सुनिश्चित करती है.
रोग निवारण: माता का यह स्वरूप असाध्य रोगों से मुक्ति दिलाने और बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करने वाला माना जाता है.
बुद्धि दात्री: यह शत्रुओं की बुद्धि को भ्रष्ट कर देती है, साधक को सही समय पर सही निर्णय लेने की कुशाग्र बुद्धि देती है.
शत्रु नाशिनी: यह शक्ति गुप्त शत्रुओं का पता लगाकर उनका विनाश करने में सहायक होती है.
संकट हरणी: जीवन में आने वाले आकस्मिक संकटों और बड़ी दुर्घटनाओं से रक्षा करने वाली शक्ति.
वाक् सिद्धि: यह साधक की वाणी में ऐसा प्रभाव पैदा करती है कि उसके द्वारा कहे गए शब्द सच होने लगते हैं.
अजेय: यह माता का वह पूर्ण स्वरूप है जो साधक को दुनिया की किसी भी शक्ति से पराजित नहीं होने देता.
बगलामुखी जयंती का शुभ मुहूर्त
आज बगलामुखी जयंती का लाभ चौघड़ियां शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 24 मिनट से लेकर 9 बजकर 2 मिनट तक रहेगा. वहीं अमृत काल का शुभ मुहूर्त आज सुबह 9 बजकर 3 मिनट से लेकर 10 बजकर 42 मिनट तक रहेगा. वहीं शुभ चौघड़ियां मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 18 मिनट से लेकर 1 बजकर 58 मिनट तक रहेगा. प्रदोष काल शाम को 6 बजकर 6 मिनट से लेकर 7 बजकर 38 मिनट तक रहेगा. 
जीभ खींचने के पीछे का गहरा रहस्य
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सतयुग में मदन नाम के एक शक्तिशाली असुर ने घोर तपस्या कर वाक्-सिद्धि प्राप्त कर ली थी. इस शक्ति के कारण वह जो भी बोलता था, वह सच हो जाता था. अहंकार में आकर उसने अपनी वाणी से पूरी सृष्टि में तबाही मचा दी. उसके शब्द विनाशकारी आपदाएं पैदा करने लगे. जब पूरी सृष्टि संकट में पड़ गई, तब भगवान विष्णु की तपस्या से मां बगलामुखी प्रकट हुईं. 
मां ने सबसे पहले उस असुर की जीभ पकड़कर उसे बाहर खींच लिया और उसकी बोलने की शक्ति को स्तंभित  यानी खामोश कर दिया. यह स्वरूप संदेश देता है कि जब बुराई अपनी चरम सीमा पर हो, तो सबसे पहले उसकी अभिव्यक्ति और षड्यंत्र रचने वाली शक्ति को रोकना जरूरी है. 
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