Bhadrapada Amavasya 10 या 11 सितंबर? दूर करें कन्फ्यूजन, जानें कब होगा पितरों का तर्पण और कब करें स्नान-दान – totaltv.in

Total Tv
totaltv.in
News Desk: भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि इस साल 10 सितंबर की सुबह 10:33 बजे से शुरू होकर 11 सितंबर की सुबह 8:56 बजे तक रहेगी। तिथि दो दिन रहने की वजह से लोगों में यह सवाल है कि आखिर अमावस्या किस दिन मानी जाएगी और पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध व पिंडदान कब करना उचित होगा। पंचांग के अनुसार 11 सितंबर को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि मौजूद रहेगी, लेकिन यह सुबह 8:56 बजे समाप्त हो जाएगी। ऐसे में धार्मिक परंपरा के अनुसार 10 सितंबर को दर्श अमावस्या के अवसर पर पितरों से जुड़े कर्म किए जाएंगे, जबकि 11 सितंबर को अमावस्या का स्नान और दान किया जाएगा। यानी तर्पण-श्राद्ध के लिए 10 सितंबर और स्नान-दान के लिए 11 सितंबर की तारीख महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
Read Also-पंजाबी सिंगर और एक्टर एमी विर्क के काफिले पर गोलियों की बौछार, हमले के बाद SUV में आग से मचा हड़कंप
पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने वाले लोग 10 सितंबर को सुबह 11:30 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक ये कर्म कर सकते हैं। इसी दिन पंचबलि और ब्राह्मण भोज जैसे धार्मिक कार्य भी किए जा सकते हैं। मान्यता के अनुसार तर्पण के दौरान पितरों को जल अर्पित करने के बाद पितृ सूक्त का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। वहीं 11 सितंबर को अमावस्या के दिन स्नान-दान किया जाएगा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:32 बजे से 5:18 बजे तक बताया गया है। इस समय स्नान करना शुभ माना जाता है। अगर किसी कारण से ब्रह्म मुहूर्त में स्नान संभव न हो तो सूर्योदय के बाद भी स्नान किया जा सकता है। इसके बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को दान देना शुभ माना जाता है।
Read Also-Money Follows : जिस मीम ने रवि किशन को बनाया इंटरनेट स्टार, अब उसी पर आया गाना! टीजर ने मचाई हलचल
भाद्रपद अमावस्या पर दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। स्नान के बाद जरूरतमंद लोगों को कपड़े, चावल, गेहूं, दाल, हरी सब्जियां, फल, अनाज, गुड़ और बर्तन जैसी वस्तुएं दान की जा सकती हैं। छाता जैसी

उपयोगी वस्तुओं का दान भी किया जा सकता है। अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक सहायता देना भी दान का हिस्सा माना जाता है। इस तरह इस साल अमावस्या की तारीख को लेकर कन्फ्यूजन को इस तरह समझा जा सकता है—10 सितंबर को पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान, जबकि 11 सितंबर को स्नान और दान किया जाएगा। अलग-अलग क्षेत्रों और पंचांगों में परंपरा के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय मान्यता के अनुसार निर्णय लेना उचित रहेगा।
Top Hindi NewsLatest News Updates, Delhi Updates, Haryana News, click on Delhi FacebookDelhi twitter and Also Haryana FacebookHaryana Twitter 
Your email address will not be published. Required fields are marked *






About Us
Advertise With Us
Privacy Policy
Terms And Conditions
Contact Us

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News