Bihar Bharat Tiwari Encounter: सोशल एक्टिविस्ट या अपराधी? सरेंडर के बाद भी बिहार पुलिस ने क्यों किया भरत तिवा – India.Com

Bihar Bharat Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर में 17 जून 2026 को हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. पुलिस इसे आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बता रही है, जबकि परिवार का आरोप है कि सरेंडर के बाद भी उन्हें गोली मार दी गई. आइए जानते हैं यह पूरा मामला क्या है, कैसे कहां से कब और क्या शुरू हुआ. इस केस की पूरी टाइमलाइन और दोनों पक्षों के दावे को विस्तार से समझिए.बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में आने वाले बिलौटी गांव में 17 जून 2026 को 28-30 वर्षीय भरत भूषण तिवारी नाम के युवक की पुलिस मुठभेड़ (एनकाउंटर) में मौत हो गई. indianexpress.com के मुताबिक पुलिस का दावा है कि वह अवैध पिस्टल लेकर पुलिस पर फायरिंग कर रहा था, इसलिए स्व-रक्षा में गोलियां चलाई गईं. परिवार और ग्रामीणों का आरोप है कि उसने सरेंडर कर दिया था और पिस्टल फेंक दी थी, फिर भी गोली मारी गई. विस्तार से समझिए मामला.

भरत भूषण तिवारी भोजपुर के बिलौटी गांव का रहने वाला युवक था. वह बीएससी पास था, पिता बिहार पुलिस में ड्राइवर रह चुके थे. वह पिछले 1-2 साल से गांव की बाढ़, कटाव और सरकारी वादों की पूर्ति न होने जैसे मुद्दों पर सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर आवाज उठाता था. लोगों उसे सोशल एक्टिविस्ट या लोकल सामाजिक कार्यकर्ता मानते थे. 16 जून को वह पिस्टल लेकर वीडियो बनाते हुए दिखा, जिसके बाद पुलिस पहुंची. दो दिन की घटनाक्रम के बाद 17 जून को एनकाउंटर में वह घायल हुआ और पटना मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई.
पुलिस के अनुसार एनकाउंटर की क्या वजहें हैं ?

etvbharat.com की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस के अनुसार भरत अवैध पिस्टल लेकर सार्वजनिक रूप से घूम रहा था, हवा में फायरिंग कर रहा था और पुलिस टीम पर भी गोली चलाई. 16 जून को घर पर पहुंचने पर उसने विरोध किया. 17 जून को STF और लोकल पुलिस ने घेरा डाला, उसने फायरिंग की तो स्व-रक्षा में पैरों पर गोलियां चलाई गईं. पुलिस ने उसे मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया और इलाज की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही थी.
परिवार और ग्रामीणों के अनुसार मारने की क्या वजहें हैं ?

भरत ने फेसबुक लाइव में पिस्टल फेंककर सरेंडर कर दिया था. इसके बावजूद 3-4 या 4-5 गोलियां मारी गईं. वह निहत्था था और मानसिक रूप से परेशान था. परिवार का आरोप है कि यह फर्जी एनकाउंटर था. मां ने हत्या और जहर दिए जाने का भी दावा किया.
अन्य एंगल: भरत बाढ़ पीड़ितों के मुद्दे उठाता था, जिससे स्थानीय प्रशासन पर दबाव पड़ रहा था. कुछ रिपोर्ट्स में भूमि विवाद या सरकारी कामों की आलोचना का जिक्र है. पुलिस ने इसे मानसिक स्वास्थ्य का मामला बताया लेकिन एनकाउंटर कर दिया, जिससे सवाल उठे कि क्या गैर-आपराधिक व्यक्ति के साथ इतनी सख्ती जरूरी थी.
पुलिस ने 3-4 अधिकारियों को सस्पेंड किया: शाहपुर SHO राजेश कुमार मलकार, एक SI और कांस्टेबल आदि. सस्पेंशन एनकाउंटर से पहले वाले लापरवाही (16 जून) के लिए बताया गया.
भरत के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी पर FIR हुई है, उनपर अवैध हथियार रखने और संरक्षण देने का आरोप है.
भरत पर भी FIR हुई है उसपर अवैध हथियार, पुलिस पर फायरिंग, सरकारी काम में बाधा का आरोप है.

यह मामला बिहार पुलिस की कार्रवाई, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, सोशल मीडिया के दुरुपयोग और ग्रामीण मुद्दों (बाढ़) पर बहस छेड़ गया है. कुछ इसे फर्जी एनकाउंटर बता रहे हैं, जबकि पुलिस इसे जरूरी कार्रवाई कह रही है. कोई आपराधिक बैकग्राउंड नहीं होने के बावजूद हथियार का इस्तेमाल बड़ा सवाल है.
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फ़रहा फ़ातिमा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस से ग्रेजुएशन के बाद पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2015 में LIVE India में इंटर्नशिप से की. प्रारंभिक दौर में ही उन्होंने जामिया … और पढ़ें
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