बिलासपुर। 07 नवंबर 2026| पिता की जमीन में हिस्सेदारी से भाई को बेदखल करने के लिए उसके चाचा द्वारा गोद लिए जाने का दावा करने वाले व्यक्ति को छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली। हाई कोर्ट ने कहा कि जिस चाचा पर गोद लेने का आरोप है, उनके पहले से तीन बेटे थे। ऐसे में हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की धारा 11 के तहत बेटे को गोद लेने की वैधानिक शर्त पूरी नहीं होती। जस्टिस सुषमा सावंत ने इस आधार पर दूसरी अपील सुनवाई के प्रारंभिक चरण में ही खारिज कर दी।
जानिए क्या था जमीन विवाद?
छत्तीसगढ़ कोंडागांव जिले के सोनाबाल निवासी पदुम सिंह ने अपने दिवंगत जैविक भाई सोमन सिंह की दोनों पत्नियों और बच्चों के खिलाफ दीवानी मुकदमा दायर किया था। विवाद पिता पुरसती के नाम दर्ज 2.45 एकड़ जमीन को लेकर था। पदुम सिंह का दावा था कि सोमन सिंह को उनके चाचा सीताराम ने गोद ले लिया था। इसलिए जैविक पिता की संपत्ति में उनका कोई अधिकार या हिस्सा नहीं बनता।
पदुम सिंह ने जमीन पर अपना मालिकाना हक घोषित करने, कब्जे में हस्तक्षेप रोकने और राजस्व अभिलेखों में अपना नाम दर्ज कराने की मांग की थी।
निचली अदालतों ने खारिज किया था दावा
कोंडागांव के सिविल जज द्वितीय ने 28 अक्टूबर 2010 को फैसला सुनाते हुए गोद लेने की प्रक्रिया कानूनी रूप से साबित नहीं होने पर पदुम सिंह का मुकदमा खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ दायर अपील को अतिरिक्त जिला न्यायाधीश कोंडागांव ने 24 जून 2016 को खारिज कर दिया। इसके बाद पदुम सिंह ने हाई कोर्ट में दूसरी अपील दायर की।
अपीलकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि दोनों निचली अदालतों ने सोमन सिंह के कथित गोद लिए जाने के प्रभाव और उनकी जैविक व दत्तक पिता की संपत्तियों में उत्तराधिकार के अधिकारों पर उचित विचार नहीं किया।
गोद लेने की कानूनी शर्तें पूरी नहीं
हाई कोर्ट ने हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम की धारा 6 और 11 का उल्लेख करते हुए कहा कि वैध गोद लेने के लिए यह साबित करना जरूरी है कि बच्चे को गोद देने वाला व्यक्ति कानूनी रूप से सक्षम था और गोद लेने वाला भी इसके लिए पात्र था। बच्चे को वास्तविक रूप से गोद देने और लेने की प्रक्रिया भी पूरी होनी चाहिए।
कोर्ट ने पाया कि निचली अदालत के रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है, जिससे यह पता चले कि सोमन सिंह को किसने गोद दिया था और गोद देने व लेने वाले व्यक्ति कानूनी रूप से सक्षम थे या नहीं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि कथित दत्तक पिता सीताराम के पहले से तीन बेटे थे। कानून के अनुसार, बेटे को गोद लेने के समय दत्तक पिता या माता का कोई हिंदू बेटा, पोते की अगली पीढ़ी का पुरुष वंशज जीवित नहीं होना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि गोद लेने की वैधानिक शर्तें पूरी साबित नहीं हुई हैं। दोनों निचली अदालतों के निष्कर्षों में कोई कानूनी त्रुटि या ऐसी खामी नहीं है, जिसके आधार पर हस्तक्षेप किया जाए। दूसरी अपील में कानून का कोई महत्वपूर्ण प्रश्न भी नहीं बनता। इसी के साथ हाई कोर्ट ने पदुम सिंह की दूसरी अपील प्रवेश के स्तर पर ही खारिज कर दी।
राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।