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पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने हाल ही में एक बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि 2027 का पंजाब चुनाव कांग्रेस पार्टी मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़ेगी. अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि क्या कांग्रेस मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करेगी या सामूहिक नेतृत्व के मॉडल पर आगे बढ़ेंगी?
पंजाब में 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर चुनाव मैदान में उतरी थी. तब संगठन की जिम्मेदारी कांग्रेस ने सुनील जाखड़ को सौंपी थी. 2022 का चुनाव पार्टी ने चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम फेस घोषित कर लड़ा था. तब नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष थे. तब सिद्धू को दरकिनार कर चन्नी को सीएम फेस घोषित करने का दांव विफल रहा था.
भगवंत मान को सीएम फेस घोषित कर चुनाव मैदान में उतरी आम आदमी पार्टी बड़ी जीत के साथ सत्ता में आई. तब 117 सदस्यों वाली पंजाब विधानसभा में कांग्रेस पार्टी महज 18 सीटें ही जीत सकी थी. तब से अब तक कांग्रेस में राजनीतिक समीकरण बहुत बदल गए हैं. कैप्टन अमरिंदर सिंह और सुनील जाखड़, ये दोनों ही कद्दावर कांग्रेसी अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में हैं. चरणजीत सिंह चन्नी भी अब सांसद हैं और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हैं.
नवजोत सिंह सिद्धू भी 2022 चुनाव के बाद से ही राजनीति से दूरी बनाए हुए हैं. इसके उलट पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा जैसे नेता पंजाब कांग्रेस में अपना प्रभाव बनाए हुए हैं. कांग्रेस इस बार नेतृत्व को लेकर कोई ऐलान कर पार्टी में गुटबाजी को और हवा नहीं देना चाहती. कांग्रेस पार्टी पिछले चार से लगातार सरकार को शासन से लेकर कानून-व्यवस्था और बेअदबी तक, घेरती आ रही है.
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अब अमरिंदर सिंह राजा वडिंग का यह कहना कि कांग्रेस मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़ेगी, गुटबाजी के मर्ज को दबाए रखते हुए एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. यह एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. कांग्रेस पंजाब में कई पावर सेंटर और मुख्यमंत्री पद को लेकर नेताओं की आपसी खींचतान से बचना चाहती है.
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कांग्रेस चाहती है कि पंजाब में पहले जीत सुनिश्चित हो, इसके बाद नेतृत्व पर फैसला ले लिया जाएगा. कांग्रेस इस बार 2022 चुनाव जैसी गलती नहीं दोहराना चाहती. कांग्रेस नेतृत्व भी इस बात को अच्छे से समझ रहा है कि पंजाब चुनाव में सीएम फेस घोषित करने की वजह से पनपे असंतोष का किस तरह से पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा था.
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