मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े वायरल वीडियो को लेकर एक स्वतंत्र डिजिटल मीडिया फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट में कई अहम दावे किए गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो की तकनीकी जांच में पोस्ट-प्रोडक्शन एडिटिंग, मल्टी-लेयर कंपोजिशन और विजुअल मैनिपुलेशन के संकेत मिले हैं.
रिपोर्ट के अनुसार जांच के लिए दो पेन ड्राइव में उपलब्ध वीडियो फाइल्स की टेस्टिंग की गई, जिसमें मेटा डाटा, फ्रेम विश्लेषण, विजुअल समीक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया.
रिपोर्ट में कहा गया है कि वीडियो की संरचना सामान्य कैमरा रिकॉर्डिंग जैसी नहीं दिखती, बल्कि इसमें कई विजुअल लेयर, टेक्स्ट ओवरले, ग्राफिकल एलिमेंट्स और वॉटरमार्क शामिल हैं. फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने वीडियो में ऐसे संकेत दर्ज किए हैं जो पोस्ट-प्रोडक्शन प्रोसेसिंग और विजुअल मैनिपुलेशन की संभावना को दर्शाते हैं. जांच के दौरान फ्रेम-दर-फ्रेम विश्लेषण में कुछ दृश्य तत्वों के असंगत होने और बैकग्राउंड तथा विषय की प्रस्तुति में अंतर पाए जाने का उल्लेख भी किया गया है.
फॉरेंसिक रिपोर्ट में वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की शारीरिक बनावट, हाव-भाव और अन्य दृश्य विशेषताओं की तुलना संदर्भ तस्वीरों से भी की गई. इस विश्लेषण में कुछ फ्रेमों में अनुपात, पोजिशनिंग और विजुअल प्रस्तुति में अंतर पाए जाने का दावा किया गया है.
हालांकि रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि ये निष्कर्ष केवल उपलब्ध डिजिटल सामग्री के तकनीकी परीक्षण पर आधारित हैं. किसी व्यक्ति की पहचान या वीडियो की प्रामाणिकता को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकारी या न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही लिया जा सकता है.
बता दें कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें एक व्यक्ति को सिख गुरुओं की तस्वीरों पर शराब छिड़कते हुए दिखाया गया था. कहा जा रहा था कि ये शख्स कोई और नहीं बल्कि भगवंत मान हैं. लेकिन आम आदमी पार्टी ने इसे एआई जेनरेटेड वीडियो करार दिया था.
विवाद के बाद वायरल वीडियो की फॉरेंसिक जांच कराई गई. गुरुग्राम पुलिस को शिकायत मिली कि पंजाब के कुछ अधिकारियों ने वीडियो को फर्जी साबित करने के लिए एक एक्सपर्ट पर दबाव बनाया और 10 लाख रुपये की रिश्वत दी. हालांकि पंजाब सीएम लगातार सभी आरोपों को निराधार बता रहे हैं.