DNA Analysis: उत्तर प्रदेश के स्कूल में वैचारिक हिंसा हुई है. हरदोई के एक प्राइवेट स्कूल में KG में पढ़ने वाली बच्ची की मां को सार्वजनिक तौर पर सबके सामने अपमानित किया गया. बच्ची ने स्कूल का कोई नियम नहीं तोड़ा था. अभिभावकों ने भी कोई गलती नहीं की थी. फिर भी प्रिंसपल मैडम ने शाब्दिक हिंसा करके बच्चे की मां का सार्वजनिक अपमान किया.
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Hardoi news: उत्तर प्रदेश के स्कूल में वैचारिक हिंसा हुई है. हरदोई के एक प्राइवेट स्कूल में KG में पढ़ने वाली बच्ची की मां को सार्वजनिक तौर पर सबके सामने अपमानित किया गया. बच्ची ने स्कूल का कोई नियम नहीं तोड़ा था. अभिभावकों ने भी कोई गलती नहीं की थी. उनकी गलती बस इतनी थी कि चार कॉपियां बाहर की स्टेशनरी शॉप से खरीद ली गई थीं. ध्यान से पढ़िएगा, सिर्फ 4 कॉपियां बाहर की स्टेशनरी शॉप से खरीद ली थीं. इस अपराध में बच्ची के अभिभावक को सार्वजनिक तौर पर अपमानित किया गया. ये स्कूल के लालच की पराकाष्ठा है. ये खबर हर उस माता-पिता से जुड़ा है जिनके बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं.
24 अप्रैल को नीलम वर्मा न्यू सनबीम पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाली अपनी बच्ची को लेने गई थीं. KG में पढ़ने वाली बच्ची को स्कूल से पिछले कई दिनों से होमवर्क नहीं मिल रहा था. मां के पूछने पर बच्ची ने बताया था कि नई कॉपियां नहीं होने के कारण उसे होमवर्क नहीं दिया जा रहा है. माता-पिता ने बच्ची के लिए कॉपियां खरीदी थीं. नीलम वर्मा ने स्कूल प्रबंधन से बात की. बताया गया कि उन्हें स्कूल से ही ये चार कॉपियां खरीदनी होंगी. जिनकी कीमत 1200 रुपए है. पैसे नहीं थे, इसलिए वो स्कूल की प्रिंसिपल ममता मिश्रा से मिलने पहुंचीं. निवेदन किया कि कुछ समय दिया जाए. इस निवेदन पर प्रिंसिपल मैडम भड़क गईं.
नीलम वर्मा के साथ शाब्दिक हिंसा कैसे हुई?
अमेरिकी सामाजिक कार्यकर्ता मैल्कम एक्स ने कहा है कि शिक्षा भविष्य का पासपोर्ट है, क्योंकि आने वाला कल उसी का होता है जो आज इसकी तैयारी करता है. एक मां की बेबसी समझिए. वो अपनी बच्ची को भविष्य का पासपोर्ट दिलाना चाहती है. इसलिए वो सार्वजनिक तौर पर अपमानित होने के लिए विवश हैं. वो एक शब्द भी बोलने की कोशिश करती हैं तो प्रिंसिपल मैडम अंग्रेजी में जोर-जोर से you shut up कह कर उन्हें चुप करा देती हैं. एक मिनट यानी 60 सेकेंड में प्रिंसिपल मैडम ने उन्हें कुल 10 बार you shut up कहा. उन्हें सिर्फ चुप नहीं कराया गया। बच्ची का नाम काटने की धमकी भी दी गई. ये सब कुछ क्यों हुआ. क्योंकि परिवार ने 1200 की चार कॉपियां स्कूल से नहीं खरीदी थी. ये लालच है.
वीडियो वायरल
इस घटना का वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो में प्रिंसिपल और नीलम वर्मा के साथ ही दूसरे कई लोग भी दिख रहे हैं. न्यू सनबीम पब्लिक स्कूल को आठवीं क्लास तक की मान्यता मिली है. स्कूल में दो हजार से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं. लेकिन किसी भी अभिभावक ने नीलम वर्मा के साथ सार्वजनिक बदसलूकी पर एक शब्द नहीं बोला. आज जो नीलम वर्मा के साथ हुआ है, कल किसी दूसरे पैरेंट्स के साथ भी हो सकता है. लेकिन सब खामोश हैं. क्यों खामोश हैं?
क्योंकि उन्हें पहले ये लगता है कि हमारे साथ नहीं हो रहा है. हम सुरक्षित हैं. दूसरा उन्हें ये लगता है कि हम क्यों आवाज उठाएं. आवाज उठाने के लिए मीडिया है. सरकार है, सिस्टम है. वो आवाज उठाएंगे. रोजाना की बातचीत में आपने सुना होगा लोग कहते हैं हमें भगत सिंह जैसा क्रांतिकारी चाहिए लेकिन अपने घर में नहीं चाहिए. ये वही प्रवृत्ति है.
मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने कहा है कि हमारे जीवन का उस दिन अंत शुरू हो जाता है जब हम उन चीजों के बारे में चुप रहते हैं जो मायने रखती हैं. प्राइवेट स्कूल की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाना कितना जरूरी मुद्दा है. लेकिन यहां सब खामोश हैं. एक महिला से बदसलूकी हो रही है. लेकिन स्कूल में पढ़नेवाले किसी भी दूसरे बच्चे के माता-पिता ने आवाज नहीं उठाई. क्यों क्योंकि उन्हें लगता है आवाज उठाने के लिए मीडिया है. एक्शन लेने के लिए सिस्टम है, सरकार है. हम क्यों बोलें.
संगठित लालच वाले नेटवर्क से कोई अकेले नहीं लड़ सकता है. सिर्फ 4 कॉपियों की कीमत 1200 है. ये कॉपियां स्कूल में पढ़ने वाले हर बच्चे के माता-पिता ने खरीदी होगी. आप भी इस लालच के शिकार हुए होंगे. आपकी इस चुप्पी की वजह से ही प्राइवेट स्कूल संचालक शाब्दिक हिंसा कर रहे हैं. आपकी चुप्पी की वजह से ही प्राइवेट स्कूल लूट का अड्डा बन गए हैं. स्कूलों की हिम्मत बढ़ गई है. स्कूल की लूट के सामने घुटने टेकनेवालों को आज नीलम वर्मा की बात आपको जरूर सुननी चाहिए.
अगर ये वीडियो रिकॉर्ड नहीं होता तो नीलम वर्मा की शिकायत भी नहीं सुनी जाती. उन्हें मजबूरी में सिर झुका कर पहले तो स्कूल से 1200 की चार कॉपियां खरीदनी पड़ती. प्रिसिंपल मैडम से माफी मांगनी पड़ती. हो सकता है उन पर जुर्माना भी लगा दिया जाता. वो सब कुछ सहती, क्योंकि उन्हें अपनी बच्ची का भविष्य बनाना है. सोचिए अगर स्कूल बच्ची को बाहर कर देता तो क्या होता. नए स्कूल में दाखिला शायद ही मिलता. क्योंकि शहर के बड़े स्कूल की प्रिंसिपल से विवाद होने के बाद दूसरा स्कूल शायद ही नीलम वर्मा की बच्ची को दाखिला देता. और अगर कहीं एडमिशन मिलता भी तो बड़ी रकम लगती. सोचिए जो परिवार 1200 रुपए के लिए 15 दिन की मोहलत मांग रहा हो, वो दूसरे स्कूल के लिए मोटी फीस कहां से लाता. बच्ची का एक साल बर्बाद हो जाता.
इसके बाद उन्होंने प्रिंसपल ममता मिश्रा ने कैमरे पर आकर सफाई दी.
हरदोई के न्यू सनबीम पब्लिक स्कूल में धन के अत्यधिक संचय वाले लालच से ही दूसरे के अधिकार का हनन हुआ है. हमने आपको बताया कि नीलम वर्मा से बदसलूकी इसलिए हुई क्योंकि उन्होंने चार कॉपियों का सेट स्कूल से नहीं खरीदा था. चार कॉपियों के इस सेट की कीमत 1200 रुपए है. सोचिए 1200 रुपए में सिर्फ चार कॉपियां. यानी एक कॉपी की कीमत 300 रुपए. आज हमने प्राइवेट स्कूलों में स्टेशनरी में होनेवाली बंपर मुनाफाखोरी की जांच ग्राउंड पर की.
प्राइवेट स्कूलों का सालाना कारोबार करीब 2 लाख 30 हजार करोड़ रुपए का है.
स्कूल स्टेशनरी मार्केट करीब 22 हजार 87 करोड़ रुपए का है.
स्कूलों के कुल कारोबार में फीस, किताब-स्टेशनरी से मिलने वाला कमीशन और दूसरे तरीके से मिलने वाला पैसा भी शामिल हैं.
अब इस आंकड़े को थोड़ा और सरल तरीके से समझते हैं. प्राइवेट स्कूलों की कुल कमाई में लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा फीस से आता है. यानी 100 रुपए की कमाई में 60 रुपए फीस से आता है, इसमें ट्यूशन फीस, एडमिशन फीस, एग्ज़ाम फीस, एक्टिविटी फीस, ट्रांसपोर्ट फीस शामिल है.
कमाई का दूसरा जरिया किताब और कॉपी बेचने से होने वाली इनकम है. ये करीब कुल आय का 20 प्रतिशत है. स्कूल प्राइवेट पब्लिशर की किताब और अपने नाम से कॉपी बेचते हैं. इसमें 20 से 22 प्रतिशत तक का मुनाफा होता है. स्कूलों की कमाई में करीब 8 प्रतिशत हिस्सेदारी यूनिफॉर्म कमीशन से आती है. इसलिए हर साल स्कूल यूनिफॉर्म बदल देते हैं. इसके अलावा करीब 12 प्रतिशत कमाई अन्य तरीकों जैसे डिजिटल सब्सक्रिप्शन, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी फीस जैसी अन्य फीस के नाम पर होती है.
समझिए स्कूलों को होनेवाली हर 100 रुपए की कमाई में 20 रुपए किताब और स्टेशनरी बेचने से आता है. स्कूल फीस के बाद ये कमाई का दूसरा बड़ा जरिया है. अब नीलम वर्मा ने 4 कॉपियां स्कूल से नहीं खरीद कर बाहर से खरीद ली थी. मैडम के गुस्से की वजह यही थी. उनकी कमाई से कुछ रुपए कम हो गए.
अर्थशास्त्र के जनक कहे जानेवाले एडम स्मिथ ने कहा है कि जहां भी बड़े व्यापारी मिलते हैं, वहां आम जनता के खिलाफ कोई न कोई साजिश जरूर होती है.
ये साजिश मुनाफे के लिए होती है. प्रिंसिपल मैडम के गुस्से की तीव्रता देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि मुनाफे की साजिश कितनी बड़ी होगी. स्कूल 4 कॉपी का सेट 1200 रुपए का बेच रहा है. यानी एक कॉपी 300 रुपए की. हमारी संवाददाता आज एक स्टेशनरी प्रिंटर के पास पहुंची. प्रिंटर ने हमें बताया कि कॉपी 30 से 40 रुपए में मिल जाएगी
₹30 की कॉपी, ₹300 में बेची
30 रुपए की कॉपी 300 रुपए में बेची जा रही है. समझ रहे हैं आप. हर एक कॉपी पर 270 रुपए का बंपर मुनाफा. अब सोचिए प्रिंसिपल मैडम का गुस्सा इतना तेज क्यों था.
ये लालच की पराकाष्ठा है. ये कमीशन वाला गुस्सा है. सोचिए अभिभावक ने अगर बाहर से कॉपी खरीद ली तो प्रिंसिपल मैडम को 1 हजार 80 रुपए का नुकसान हो गया. स्कूल भी इन्हीं का है. इसलिए इन्हें गुस्सा भी इतना तेज आया.
लेकिन अब प्रशासन ने मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई है. कमेटी की रिपोर्ट पर कार्रवाई भी होगी. हो सकता है स्कूल पर जुर्माना लग जाएगा. प्रिंसिपल मैडम को प्रशासन नोटिस थमा दे. ये माफी भी मांग लें. लेकिन सच तो ये है कि स्कूल में पढ़ने वाले दूसरे बच्चे इस स्कूल में सालभर कमीशनखोरी वाली किताब-कॉपी से ही पढ़ते रहेंगे.
किताब-कॉपी बेचकर स्कूल ने जो कमाई कर ली है, प्रशासन का एक्शन अभिभावकों को कमीशनखोरी वाली किताब-कॉपी के पैसे वापस नहीं करा पाएगा. स्कूल पर कार्रवाई हो जाए तब भी अगले साल ये कमीशनखोरी वाला सिस्टम जारी रहेगा. ऐसे में पैरेंट्स से मुनाफाखोरी और लूट होती रहेगी.
एक अप्रैल को हमने स्कूलों में किताब, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी के नाम पर होनेवाली लूट को एक्सपोज किया था. तब से पीड़ित अभिभावक हमें सोशल मीडिया पर टैग कर रहे हैं. अपना दुख बता रहे हैं. सोचिए 26 दिन बाद भी हरदोई में अभिभावकों से लूट हो रही है. न जाने कितने शहरों में ऐसी लूट जारी होगी. अफसोस ये है कि जो करना चहिए वो नहीं हो रहा है. इस लूट के खिलाफ ZEE न्यूज़ की मुहिम जारी रहेगी. आप हमें सोशल मीडिया पर टैग कर अपनी आपबीती बता सकते हैं. हम इस संगठित लालच और लूट के खिलाफ अपनी आवाज को उठाते रहेंगे.
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श्वेतांक रत्नाम्बर पत्रकारिता जगत में 22 साल का अनुभव रखते हैं. देश-दुनिया की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत रखने वाले श्वेतांक को राजनीतिक और अंतर्राष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ है. ZEE न्यूज…और पढ़ें
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