Rashmi Singh
Date: 11-10-26 15:33
Durga Maa Aarti: शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व आज यानी 11 अक्टूबर 2026 से शुरू हो चुका है. मां दुर्गा की भक्ति में डूबे इन नौ दिनों में भक्त विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं और माता रानी का आशीर्वाद पाने के लिए व्रत रखते हैं. नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. इस दौरान सुबह और शाम मां दुर्गा की आरती करने का विशेष महत्व माना जाता है. ‘अम्बे तू है जगदम्बे काली’ माता की सबसे प्रचलित आरतियों में से एक है. मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ इस आरती को गाने से मन को शांति मिलती है और भक्त मां दुर्गा के प्रति अपना समर्पण व्यक्त करते हैं. आइए जानते हैं इस आरती का धार्मिक महत्व और यहां पढ़ें इसके संपूर्ण बोल.
नवरात्रि में मां दुर्गा की आरती का क्या है महत्व?
सनातन परंपरा में नवरात्रि को मां दुर्गा की उपासना का विशेष पर्व माना जाता है. इन नौ दिनों में भक्त देवी के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं. पूजा के दौरान मंत्र जाप, दुर्गा सप्तशती का पाठ और आरती के जरिए माता रानी की स्तुति की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आरती पूजा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके माध्यम से भक्त देवी के प्रति अपनी श्रद्धा, आस्था और समर्पण प्रकट करते हैं.
मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की आरती करने से घर में सुख-शांति और सकारात्मकता का वातावरण बना रहता है. भक्त माता रानी से परिवार की खुशहाली, समृद्धि और संकटों से रक्षा की प्रार्थना करते हैं. हालांकि, ये धार्मिक आस्थाओं और परंपराओं से जुड़ी मान्यताएं हैं.
मां दुर्गा के अनेक स्वरूपों का वर्णन करती है यह आरती
‘अम्बे तू है जगदम्बे काली’ आरती में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों और उनकी शक्तियों का गुणगान किया गया है. इसमें देवी को जगदम्बा, काली, दुर्गा, सिंहवाहिनी और अष्टभुजा जैसे नामों से पुकारा गया है. आरती के बोल मां के उग्र और शक्तिशाली स्वरूप के साथ-साथ उनकी करुणा, ममता और भक्तों के प्रति वात्सल्य को भी दर्शाते हैं.
इस आरती में मां दुर्गा को दुखियों के कष्ट दूर करने वाली, भक्तों की रक्षा करने वाली और संकटों से उबारने वाली देवी के रूप में याद किया जाता है. इसके जरिए भक्त माता रानी से धन-दौलत के बजाय उनके चरणों में स्थान, भक्ति और आशीर्वाद की कामना भी करते हैं.
Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Aarti Lyrics: मां दुर्गा की पूरी आरती
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली.
तेरे ही गुण गावें भारती,
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती.
तेरे भक्त जनों पे माता, भीड़ पड़ी है भारी,
भीड़ पड़ी है भारी.
दानव दल पर टूट पड़ो मां, करके सिंह सवारी,
करके सिंह सवारी.
सौ-सौ सिंहों से भी बलशाली, है अष्ट भुजाओं वाली,
दुष्टों को तू ही ललकारती,
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती.
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली.
तेरे ही गुण गावें भारती,
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती.
मां-बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता,
बड़ा ही निर्मल नाता.
पूत कपूत सुने हैं, पर ना माता सुनी कुमाता,
ना माता सुनी कुमाता.
सब पे करुणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली,
दुखियों के दुखड़े निवारती,
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती.
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली.
तेरे ही गुण गावें भारती,
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती.
नहीं मांगते धन और दौलत, ना चांदी ना सोना,
ना चांदी ना सोना.
हम तो मांगें तेरे चरणों में छोटा सा कोना,
तेरे चरणों में छोटा सा कोना.
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली,
सतियों के सत को संवारती,
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती.
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली.
तेरे ही गुण गावें भारती,
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती.
चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली,
ले पूजा की थाली.
वरद हस्त सिर पर रख दो मां, संकट हरने वाली,
संकट हरने वाली.
मां भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली,
भक्तों के कारज तू ही सारती,
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती.
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली.
तेरे ही गुण गावें भारती,
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती.
बैल चढ़े शिव शंकर आए, गरुड़ चढ़े भगवान,
सिंह चढ़ी मेरी मैया आईं, पूरन करने काम.
सब पे करुणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली,
दुखियों के दुखड़े निवारती,
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती.
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली.
तेरे ही गुण गावें भारती,
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती.
घनन-घनन घन घंटा बाजे, और बजे करताल,
सिंहनाद मेरी मैया करतीं, दुष्टों की हैं काल.
मां भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली,
भक्तों के कारज तू ही सारती,
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती.
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली.
तेरे ही गुण गावें भारती,
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती.
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती.
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती.
नवरात्रि में श्रद्धा के साथ करें मां दुर्गा की आराधना
शारदीय नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा की भक्ति और उपासना के लिए विशेष माने जाते हैं. इन दिनों भक्त अपनी परंपराओं के अनुसार व्रत रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और सुबह-शाम माता रानी की आरती गाते हैं. ‘अम्बे तू है जगदम्बे काली’ आरती मां के शक्ति, करुणा और ममता से जुड़े स्वरूपों का स्मरण कराती है. भक्त इस आरती के माध्यम से माता रानी से सुख-शांति, परिवार की खुशहाली और जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति देने की प्रार्थना करते हैं.
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