भारत के नेशनल हाईवे पर कोरोना महामारी के बाद पहली बार मौतों में कमी आई है. लोकसभा में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की ओर से पेश आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में नेशनल हाईवे पर 62,122 लोगों की जान गई, जो 2024 के 64,772 के मुकाबले 4.1 प्रतिशत कम है. यानी अगर सीधे शब्दों में कहें तो हर घंटे औसतन करीब 7 लोग नेशनल हाईवे पर मारे जा रहे हैं. हालांकि, यह अब भी बहुत बड़ा आंकड़ा है. सवाल यह है कि यह गिरावट असली सुधार है या सिर्फ एक साल का उतार-चढ़ाव…
पहले यह समझिए कि सड़कें कितनी और हादसे कितने?
2025 में नेशनल हाईवे पर कुल 1,43,526 दुर्घटनाएं दर्ज हुईं. अगर पूरे देश की बात करें तो 2025 में कुल 5,13,563 सड़क दुर्घटनाएं हुईं. इनमें 1,83,382 लोगों की मौत हुई, यानी पूरे देश में हर घंटे 21 लोग सड़क हादसों में जान गंवा रहे हैं.
अब नेशनल हाईवे की एक खास बात समझिए. देश के कुल सड़क नेटवर्क में नेशनल हाईवे की हिस्सेदारी सिर्फ 2.3 प्रतिशत है, लेकिन सड़क हादसों में होने वाली कुल मौतों में से 36 प्रतिशत से ज्यादा मौतें इन्हीं रास्तों पर होती हैं. राष्ट्रीय राजमार्गों पर हर 100 किलोमीटर पर सालाना औसतन 42.1 मौतें होती हैं.
सीधे शब्दों में कहें तो देश की सबसे अच्छी सड़कें ही सबसे ज्यादा जान ले रही हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है रफ्तार. 2026 में अब तक कुल सड़क दुर्घटनाओं में से 46,075 दुर्घटनाएं सिर्फ ओवर-स्पीडिंग की वजह से हुई हैं. यानी हर तीन में से एक हादसा तेज गति से जुड़ा है.
पैदल चलने वालों के लिए हाईवे और भी खतरनाक हैं. 27 जुलाई 2026 तक राष्ट्रीय राजमार्गों पर 24,446 पैदल यात्रियों की मौत हुई है. बिहार में सबसे ज्यादा 2,423 पैदल यात्री मारे गए, उसके बाद तमिलनाडु में 2,328 और महाराष्ट्र में 2,002. यह साफ बताता है कि हाईवे के किनारे चलने वाले लोगों के लिए फुटपाथ, फुट ओवरब्रिज और सुरक्षित क्रॉसिंग की भारी कमी है.
ब्लैक स्पॉट: वे जगहें जहां बार-बार होते हैं हादसे
सरकार ने IIT कानपुर के AI-आधारित टूल्स की मदद से 2023 से 2025 के बीच 6,358 ब्लैक स्पॉट कॉरिडोर (बार-बार दुर्घटना वाली जगहें) की पहचान की है. हालांकि, इससे पहले 2025 तक कुल 13,795 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए थे, जिनमें से सिर्फ 5,036 पर स्थायी सुधार काम पूरा हुआ था. यानी बाकी जगहों पर अभी भी लोग जान गंवा रहे हैं. कर्नाटक की बात करें तो वहां 1,278 ब्लैक स्पॉट की पहचान हुई, जिनमें से 701 को ठीक किया गया और 577 अभी बाकी हैं.
ब्लैक स्पॉट के इलाकों में तत्काल उपाय तो किए जा रहे हैं- जैसे सड़क चिह्न, क्रैश बैरियर, रोड स्टड और गलत मोड़ बंद करना. लेकिन स्थायी समाधान में सड़क की ज्यामिति सुधारना, जंक्शन डिजाइन बदलना, अंडरपास या ओवरपास बनाना शामिल है, जिसमें जमीन अधिग्रहण और वन मंजूरी जैसी लंबी प्रक्रियाएं लगती हैं.
इसके लिए सरकार ने 4 बड़े कदम उठाए:
जून 2026 तक के ताजा आंकड़े भी देख लीजिए
2026 के पहले सात महीनों (27 जुलाई 2026 तक) में नेशनल हाईवे पर 77,234 दुर्घटनाएं दर्ज हुई हैं. इसके अलावा, 2026 के पहले छह महीनों में देशभर में 2,85,770 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुई हैं. यानी समस्या अभी खत्म नहीं हुई है और लगातार निगरानी और सुधार की जरूरत बनी हुई है.
अगर 2026 की बात करें तो सरकार का अनुमान है कि इस साल सड़क हादसों में 3.2 प्रतिशत की कमी आ सकती है, हालांकि दुर्घटनाओं की संख्या में इजाफा हो सकता है. यानी मौतें कम हो रही हैं, लेकिन दुर्घटनाएं कम नहीं हो रहीं. इसका मतलब है कि सड़कों की गुणवत्ता और इमरजेंसी रिस्पॉन्स में सुधार हो रहा है, लेकिन ड्राइविंग की लापरवाही अब भी जारी है.

अब आते हैं असली चुनौती पर: ब्लैक कॉरिडोर
एक बहुत बड़ी और गंभीर बात ये है कि देश के नेशनल हाईवे पर 6,358 ‘ब्लैक कॉरिडोर’ यानी दुर्घटना-संभावित लगातार खंड हैं. इसकी कुल लंबाई 6,409.7 किलोमीटर है. इन पर 2023 से 2025 के बीच तीन साल में 37,164 लोगों की जान गई है.
इनमें सबसे ज्यादा ब्लैक कॉरिडोर तमिलनाडु में 958 हैं. इसके बाद उत्तर प्रदेश में 671 और कर्नाटक में 607. सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि 2025 में तमिलनाडु में नेशनल हाईवे पर सबसे ज्यादा 71,387 दुर्घटनाएं हुईं, जबकि उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 27,550 लोगों की मौत हुई. यानी तमिलनाडु में दुर्घटनाएं ज्यादा हो रही हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में मौतें ज्यादा हो रही हैं.
तो क्या नेशनल हाईवे सुरक्षित हो रहे हैं?
सीधा जवाब तो हां है, लेकिन अभी बहुत कुछ बाकी है…
ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.
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