डीपीआईआईटी द्वारा विदेशी निवेश नियमों में बदलाव के बाद पिछले ढाई महीनों में 29 विदेशी कंपनियों ने भारत में निवेश की इच्छा जताई है।
FDI नियम में बदलाव।
डीपीआईआईटी के नियमों में बदलाव से विदेशी निवेश बढ़ा।
पिछले ढाई महीनों में 29 विदेशी कंपनियों ने निवेश किया।
आईटी, फार्मा, एआई जैसे क्षेत्रों में निवेश की उम्मीद।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) की तरफ से विदेशी निवेश से जुड़े नियम, जिसे प्रेस नोट के नाम से जाना जाता है, में बदलाव के बाद पिछले ढाई महीनों में 29 विदेशी कंपनियां भारत में निवेश के लिए आगे आई है।
मुख्य रूप से कोरिया, जापान, अमेरिका, सिंगापुर की ये कंपनियां भारत में आईटी, फार्मा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डाटा सेंटर, ट्रांसपोर्ट सेवा के सेक्टर में निवेश करने जा रही है। इस साल मई में डीपीआईआईटी ने प्रेस नोट में बदलाव किया था।
इसके तहत चीन व हांगकांग की कंपनी का किसी विदेशी कंपनी में 10 प्रतिशत तक की हिस्सेदारी है तो वह कंपनी भारत के जिस सेक्टर में विदेशी निवेश की अनुमति है, वहां बिना सरकारी इजाजत के निवेश कर सकती है। लेकिन चीन व हांगकांग में पंजीकृत कंपनियां ऐसा नहीं कर सकती है।
वर्ष 2020 में भारत की सीमा से सटे देशों के निवेश से जुड़ी सभी कंपनियों को भारत में निवेश पर रोक लगा दी गई थी। उस समय चीन की हिस्सेदारी वाली सैकड़ों विदेशी कंपनियों के प्रस्ताव भारत में निवेश के लिए विचाराधीन थे।
उद्योग विभाग का कहना है कि सरकार के इस फैसले से विदेशी ट्रांजेक्शन आसान हो गया और आने वाले समय में इस प्रकार के कई निवेश आ सकते हैं। इंडियन वेंचर एंड अल्टरनेट कैपिटल एसोसिएशन (आईवीसीए) के अध्यक्ष रजत टंडन के मुताबिक डीपीआईआईटी के इस फैसले से विदेशी निवेश अब आसान हो जाएगा।
भविष्य में निवेश को आसान करने के लिए और कदम उठाए जा रहे हैं ताकि निवेश को प्रोत्साहित किया जा सके। डीपीआईआईटी का यह कदम इज ऑफ डूइंग बिजनेस में भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। विदेशी निवेश नियम में ढील की वजह से इस साल जुलाई में 5.70 अरब डालर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश रहा जो पिछले साल जुलाई के मुकाबले 17 प्रतिशत अधिक है।