Yuvraj Singh
Date: 19-10-26 23:33
फ्रांस में महंगाई, शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर शुरू हुआ विरोध-प्रदर्शन अब सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. देश के कई शहरों में प्रदर्शन के दौरान आगजनी, लूटपाट और तोड़फोड़ की घटनाओं ने हालात बिगाड़ दिए हैं. स्थिति को काबू में करने के लिए सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था सख्त करने का फैसला किया है. प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने स्थानीय प्रशासन से प्रभावित इलाकों में आंशिक कर्फ्यू लगाने को कहा है. वहीं, जरूरत पड़ने पर आपातकाल लागू करने का विकल्प भी खुला रखा गया है. अधिकारियों के मुताबिक, सप्ताहांत में हुई हिंसा के सिलसिले में 2,400 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
हिंसक प्रदर्शनों के बाद सरकार ने बढ़ाई सख्ती
फ्रांस में शनिवार और रविवार को कई जगहों पर विरोध-प्रदर्शन हिंसक हो गए. प्रदर्शनकारियों के समूहों ने दुकानों में लूटपाट की, सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया और पुलिस के साथ झड़प की. लिमोज शहर में ऐतिहासिक सिटी हॉल को आग के हवाले कर दिया गया, जबकि पेरिस समेत कई दूसरे शहरों में भी तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आईं. सरकार के अनुसार, देशभर में 3,000 से अधिक दुकानों को लूटपाट या नुकसान का सामना करना पड़ा.
इस स्थिति के बाद प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ाने और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान करने की प्रक्रिया तेज कर दी है. पुलिस ऑनलाइन वीडियो और तस्वीरों की मदद से संदिग्धों का पता लगाने में जुटी है. सरकार का जोर अब सार्वजनिक व्यवस्था बहाल करने और कारोबारियों को हुए नुकसान से उबरने में मदद देने पर है.
प्रधानमंत्री ने स्थानीय स्तर पर कर्फ्यू लगाने को कहा
फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने सोमवार, 19 अक्टूबर को कहा कि उन्होंने स्थानीय प्रशासन से जरूरत के मुताबिक सीमित और आंशिक कर्फ्यू लागू करने को कहा है. इसका उद्देश्य रात के समय होने वाली हिंसा, लूटपाट और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं पर रोक लगाना है. हालांकि, किन इलाकों में और किस समय कर्फ्यू लागू होगा, इसका फैसला स्थानीय प्रशासन करेगा.
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि पूरे पेरिस में कर्फ्यू लगाने की योजना नहीं है. सरकार का इरादा केवल उन इलाकों में पाबंदियां लगाने का है, जहां हालात बिगड़ने का खतरा अधिक है. उन्होंने हिंसक समूहों का सामना करने वाले पुलिसकर्मियों का बचाव करते हुए कहा कि सरकार सार्वजनिक व्यवस्था बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है.
हालात बिगड़े तो लागू हो सकता है आपातकाल
हिंसा की गंभीरता को देखते हुए फ्रांस में आपातकाल लागू करने की संभावना पर भी चर्चा हो रही है. प्रधानमंत्री लेकोर्नू ने संकेत दिया कि यदि परिस्थितियां इसकी मांग करती हैं, तो सरकार इस विकल्प का इस्तेमाल कर सकती है. फिलहाल उनकी प्राथमिकता स्थानीय स्तर पर कर्फ्यू और सुरक्षा उपायों के जरिए हालात को नियंत्रित करना है.
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने आंतरिक मामलों के मंत्री लॉरेंट नुनेज का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया. इसके बजाय उन्हें सुरक्षा संबंधी तैयारियों और खुफिया सूचनाओं के आकलन में हुई कमियों की जांच करने तथा पुलिस की कार्यप्रणाली में जरूरी बदलाव लाने की जिम्मेदारी दी गई है.
2400 से अधिक गिरफ्तारियां, कई शहरों में नुकसान
अधिकारियों के मुताबिक, सप्ताहांत के दौरान फ्रांस में 2,400 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया. पेरिस, मार्सिले, ल्योन और लिमोज समेत कई शहरों में हिंसा की घटनाएं दर्ज की गईं. प्रदर्शन के दौरान दुकानों, सरकारी कार्यालयों और दूसरी सार्वजनिक संपत्तियों को निशाना बनाया गया. कई कारोबारियों को भारी नुकसान हुआ है और प्रशासन प्रभावित व्यवसायों को राहत देने के उपायों पर काम कर रहा है.
सरकार ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई जा सकती है. हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ नुकसान झेलने वाले कारोबारियों को आर्थिक सहायता देने के विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है.
महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर क्यों भड़का गुस्सा?
फ्रांस में हालिया विरोध-प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में बढ़ती जीवन-यापन लागत, महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति जैसे मुद्दे हैं. शुरुआत में स्कूलों में शिक्षकों की कमी और खराब सुविधाओं को लेकर विद्यार्थियों के बीच नाराजगी सामने आई थी. धीरे-धीरे यह असंतोष व्यापक विरोध-प्रदर्शनों में बदल गया. हालांकि, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बीच हिंसक समूहों की गतिविधियों ने आंदोलन को नया रूप दे दिया.
अब सरकार के सामने दोहरी चुनौती है. उसे एक तरफ हिंसा और लूटपाट पर लगाम लगानी है, वहीं दूसरी तरफ उन समस्याओं का समाधान भी तलाशना है, जिनसे लोगों में असंतोष बढ़ रहा है. सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ सार्वजनिक सेवाओं में सुधार और बढ़ती महंगाई से राहत देना भी सरकार के लिए अहम होगा.
सरकार की प्रतिक्रिया पर उठ रहे सवाल
हिंसा के बाद फ्रांस के कई शहरों के महापौरों ने सुरक्षा तैयारियों को लेकर सरकार से जवाब मांगा है. उनका कहना है कि बड़े पैमाने पर अशांति की आशंका के बावजूद पर्याप्त तैयारी नहीं दिखाई दी. इस बीच, सरकार ने पुलिस की तैनाती बढ़ाने और सुरक्षा संबंधी कमियों की जांच का भरोसा दिया है.
फ्रांस में अगले साल राष्ट्रपति चुनाव भी होने हैं. ऐसे में कानून-व्यवस्था, महंगाई और सरकार की कार्यशैली से जुड़े मुद्दे राजनीतिक बहस को और तेज कर सकते हैं. फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता हिंसा पर नियंत्रण, प्रभावित इलाकों में शांति बहाल करने और दोबारा ऐसी घटनाएं होने से रोकने की है.
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