Gold ETFs की चमक बरकरार, भारत में लगातार 11 महीनों से जारी है इसमें निवेश का सिलसिला – Moneycontrol Hindi

Gold ETFs : सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद,भारत के गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स में अप्रैल में लगातार ग्यारहवें महीने निवेश का सिलसिला जारी रहा। भारतीय गोल्ड ETFs में नेट इनफ्लो मार्च के 17.66 करोड़ डॉलर से बढ़कर अप्रैल में 29.72 करोड़ डॉलर हो गया यानी इसमें 68 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है। इस महीने सोने की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। मार्च में 11.6 प्रतिशत की गिरावट के बाद,इस महीने इसकी कीमतों में 1 प्रतिशत की और गिरावट आई। यह अक्टूबर 2008 के बाद से सबसे बड़ी मासिक गिरावट है।

ग्लोबल मार्केट की बात करें तो मार्च में भारी निकासी के बाद,अप्रैल में फिजिकली-बैक्ड गोल्ड ETFs में 6.6 अरब डॉलर का निवेश आया। सभी बाजारों में पॉजिटिव इनफ्लो देखने को मिला जिसमें यूरोपीय फंड सबसे आगे रहे। उत्तरी अमेरिका ने अप्रैल में अपना रुख बदला और यहां भी 1 अरब डॉलर का निवेश देखने को मिला।

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क्या कहते हैं वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़े?

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक यह रिकवरी महीने के पहले आधे हिस्से में ज्यादा मजबूत रही। इस अवधि में सोना मार्च के निचले स्तरों से उबरता दिखा और बाजार पर बना दबाव भी कम हो गया। अप्रैल के दूसरे आधे हिस्से में सोने की रफ्तार फिर से धीमी पड़ गई। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे टकराव के और बढ़ने के संकेत मिलने और डॉलर के मज़बूत होने तथा बॉन्ड यील्ड बढ़ने के कारण सोने में निवेश का अवसर लागत (opportunity cost) फिर से बढ़ता दिखा। इससे सोने पर दबाव बना।

एशियाई बाजारों पर एक नजर

एशिया में चीन Gold ETFs में निवेश के मामले में सबसे आगे रहा। हांगकांग SAR के फंड्स में 73.2 करोड़ डॉलर का इजाफा हुआ। यह नए प्रोडक्ट्स की लिस्टिंग की मदद से एक रिकॉर्ड महीना रहा। मैन लैंड चाइना में गोल्ड ETF में 49.8 करोड़ डॉलर का निवेश आया। जिसकी वजहें थी बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव,घटती यील्ड्स और सरकारी क्षेत्र द्वारा लगातार सोने की खरीद। जापान में Gold ETFs 24.6 करोड़ डॉलर का निवेश आया।

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यूरोपियन बाजारों पर एक नजर

अप्रैल में यूरोपीय फंड्स में 3.7 अरब डॉलर का बड़ा निवेश आता दिखा। इससे साल की शुरुआत से अब तक का उनका कुल आंकड़ा नेगेटिव से पॉजिटिव हो गया। इस बढ़त में UK सबसे आगे रहा,जबकि स्विट्जरलैंड और जर्मनी ने भी इसमें अहम योगदान दिया। इस इलाके में Gold ETFs में बढ़तें निवेश की वजह भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक जोखिम रहे। निवेशक ईरान के साथ लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष के कारण महंगाई पर पड़ने वाले असर और ऊर्जा की कीमतों पर पड़ने वाले दबाव के असर से निपटने के लिए गोल्ड की तरफ रुख करते दिखे। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक लोकल इक्विटीज़ में गिरावट और बैंक ऑफ़ इंग्लैंड के उम्मीद से कम सख़्त रवैये के चलते,सोने की कीमतों में सुधार और स्थिरता आने पर निवेशकों की दिलचस्पी सोने में और भी बढ़ गई।

गोल्ड ETF में अप्रैल में हुई बढ़ोतरी के चलते ग्लोबल गोल्ड ETF फंडों के कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट बढ़कर 615 अरब डॉलर पर पहुंच जो पिछले महीने के मुकाबले 1 प्रतिशत ज्यादा है। कुल होल्डिंग्स भी 1 प्रतिशत बढ़कर 4,137 टन हो गई, जो अब तक की तीसरी सबसे बड़ी होल्डिंग है। यह 27 फरवरी, 2026 को बने 4,176 टन के रिकॉर्ड हाई से बस थोड़ा ही कम है।

 
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