Gorakhpur News: गोरखपुर, राजीव दत्त पाण्डेय राज्य स्मार्ट सिटी में शामिल गोरखपुर महानगर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए अब झील के किनारे स्मार्ट गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन (जीटीएस), पार्किंग और मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर का निर्माण शुरू हो गया है। 7.05 करोड़ रुपये की इस परियोजना के लिए गोरखपुर नगर निगम से कार्यादेश पाने वाली संस्था ने पाइलिंग का काम भी शुरू कर दिया है।
नगर निगम का दावा है कि रामगढ़ताल थाना के ठीक सामने 660 वर्ग मीटर जमीन में गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन (जीटीएस) और मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर का उद्देश्य कूड़े के संग्रहण, पृथक्करण और परिवहन की व्यवस्था को आधुनिक बनाना है। योजना के मुताबिक यहां गोरखपुर विकास प्राधिकरण की कॉलोनियों एवं कामर्शियल स्थलों से एकत्र कचरा को एकत्र किया जाएगा। एमआरएफ सेंटर में कूड़े से रीसाइक्लिंग योग्य सामग्री अलग की जाएगी, जबकि गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन पर आने वाले कचरे का अस्थायी संग्रहण कर उसे अंतिम निस्तारण स्थल तक भेजा।
चयनित फर्म को जीटीएस शेड, एमआरएफ शेड, पार्किंग शेड, बाउंड्रीवाल, आफिस बिल्डिंग, गार्ड रूम, टॉयलेट ब्लॉक का निर्माण करना है। जीटीएस और एफआरएफ सेंटर में लगने वाली मशीनों के लिए अलग से धनराशि अवमुक्त होगी और संचालन एजेंसी का चयन किया जाएगा।
जीटीएस एवं एमआरएफ सेंटर निर्माण को लेकर विवाद शुरू हो गया है। झील के पास जीटीएस और एफआरएफ का निर्माण ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016/2026 (एमएसडब्ल्यू रूल्स) की भावना और प्रावधानों के विपरीत है। जल स्त्रोत और आवासीय क्षेत्र के पास निर्माण नहीं हो सकता। जबकि यहां निर्माण स्थल के पास सूबे की पहली संरक्षित रामगढ़झील, शहीद अशफाक उल्ला खॉ प्राणि उद्यान, 50 हेक्टेयर का नगर वन, बौद्ध संग्रहालय, इंटरनेशनल वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, अरबों रुपये से खर्च कर बना रामगढ़झील फ्रंट नया सवेरा एक और दो, यशोधरा आवासीय कॉलोनी, जेमिनी गार्डेनिया अपार्टमेंट, रेल विहार कॉलोनी स्थित है। फोरलेन सड़कों और रामगढ़झील की रामगढ़झील की वाटरबाड़ी के बीच निर्माण का प्राणि उद्यान से लेकर आवासीय कॉलोनियों तक विरोध किया जा रहा है।
वन पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय हेरिटेज फाउंडेशन के मनीष चौबे कहते हैं कि झील एरिया घनी आबादी वाला आवासीय क्षेत्र है। इस तरह के संवेदनशील और पर्यटन महत्व वाले क्षेत्र में गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन स्थापित करना पर्यावरणीय दृष्टि से गंभीर सवाल खड़े करता है। पर्यावरण कार्यकर्ता अनिल तिवारी कहते हैं कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016/ 2026 के के उन प्रावधानों की अनदेखी की गई है, जिनमें ऐसे केंद्रों के लिए पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का विशेष ध्यान रखने की बात कही गई है।
जीटीएस और एमआरएफ सेंटर के विरोध में जेमिनी गार्डेनिया आरडब्ल्यूए अध्यक्ष प्रेमसागर नाथ त्रिपाठी, उपाध्यक्ष डॉ अनिता अग्रवाल और सचिव वीर बहादुर सिंह ने भी कड़ा एतराज जताया है। उन्होने तत्काल परियोजना का स्थान बदलने की मांग की है। रेल विहार और यशोधरा के लोगों का कहना है कि प्रभावित नागरिकों के जनसुनवाई किए बगैर निगम का यह कदम अनुचित है।
बसंतपुर और चरगांवा में संचालित गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन भी नियमों के उल्लंघन और स्थानीय विरोध के कारण लगातार चर्चा में रहे हैं। इसके बावजूद अब एक और संवेदनशील क्षेत्र में इसी तरह की परियोजना पर रामगढ़ताल क्षेत्र मनोनीत पार्षद अरविद निषाद के हैरान हैं। कहते हैं कि निगम सदन में मसला उठाएंगे। वहीं, उधर बसंतपुर वार्ड से पार्षद बिजेंद्र अग्रहरि की भी पीड़ा है कि उनके वार्ड में घनी आबादी के बीच जीटीएस का निर्माण होने से परेशान होकर नौ लोगों ने अपने घर बेचे दिए हैं। वहीं, चरगावा में बनाए गए गारबेज ट्रांसफर स्टेशन एवं एमआरएफ सेंटर को लेकर स्थानीय लोगों में रोष है।
-7.05 करोड़ से रामगढ़ थाने के सामने बनेगा गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन -660 वर्ग मीटर में एमआरएफ, पार्किंग, आफिस, टॉयलेट ब्लॉक भी बनेगा -झील, चिड़ियाघर और आवासीय क्षेत्र के बीच स्थल चयन पर उठे सवाल
परियोजना का उद्देश्य शहर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को वैज्ञानिक और आधुनिक बनाना है। परियोजना से जुड़े सभी कार्य नियमानुसार किए जाएंगे। स्थानीय लोगों की आपत्तियों पर निर्णय सक्षम स्तर पर लिया जाएगा।’
– प्रमोद कुमार, अपर नगर आयुक्त
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