एक साड़ी, हिम्मत और जान बचाने की जिद… नेपाल त्रासदी में तमिलनाडु के कपल ने ऐसे बचाई महिलाओं की जान – India.com

Nepal Flood: नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बीच तमिलनाडु से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालुओं की जिंदगी कुछ पलों के लिए खतरे में पड़ गई. पहाड़ी रास्ते पर तेज पानी, कीचड़ और फिसलन ने रास्ता बेहद मुश्किल बना दिया. इसी दौरान एक दंपति ने ऐसा साहस दिखाया, जिसकी कहानी अब इस मुश्किल सफर की सबसे खास घटनाओं में शामिल हो गई है.

तमिलनाडु के मयावरम के रहने वाले रत्नकुमार और उनकी पत्नी पूंगुजली भी 21 सदस्यीय तीर्थयात्री दल का हिस्सा थे. समूह कैलाश की यात्रा पर निकला था. नेपाल में मौसम बिगड़ने के बाद हालात अचानक खतरनाक हो गए और कई यात्रियों को सुरक्षित ऊंचाई तक पहुंचने के लिए कीचड़ भरी ढलान चढ़नी पड़ी.

यात्रियों में शामिल शिवरंजनी ने बताया कि उनका वाहन भारतीय दूतावास के चेकपॉइंट के पास फंस गया था. चारों तरफ पानी तेजी से बढ़ रहा था. उनके मुताबिक, अगर वाहन कुछ फीट इधर या उधर चला जाता तो पूरा वाहन बाढ़ के तेज बहाव की चपेट में आ सकता था.

वाहन से बाहर निकलने का रास्ता भी आसान नहीं था. यात्रियों के लिए ड्राइवर की तरफ का दरवाजा ही एकमात्र रास्ता बचा था. सभी लोग गहरे कीचड़ से गुजरते हुए ऊपर की तरफ मौजूद ढलान पर पहुंचने की कोशिश करने लगे.
फिसलन इतनी ज्यादा थी कि कई महिलाएं ढलान पर चढ़ नहीं पा रही थीं. इसी दौरान रत्नकुमार और उनकी पत्नी पहले ऊंचाई पर पहुंच चुके थे. लेकिन नीचे फंसी महिलाओं को देखकर रत्नकुमार दोबारा खतरे वाले हिस्से में उतर गए.

रत्नकुमार ने महिलाओं को ऊपर खींचने के लिए साड़ी का इस्तेमाल किया. साड़ी को मजबूती से बांधकर उसे अस्थायी रस्सी की तरह बनाया गया. इसके बाद उन्होंने नीचे फंसी महिलाओं को एक-एक करके ऊपर खींचना शुरू किया.
ऊपर मौजूद पूंगुजली ने भी इस काम में उनका साथ दिया. रत्नकुमार नीचे से महिलाओं को सहारा देकर खींचते रहे, जबकि उनकी पत्नी ऊपर से उन्हें सुरक्षित जगह तक पहुंचाने में मदद करती रहीं.
शिवरंजनी के मुताबिक, जब लोग अपनी जान बचाकर ऊंचाई पर पहुंच जाते हैं तो दोबारा नीचे खतरे में जाने से स्वाभाविक रूप से डरते हैं. लेकिन रत्नकुमार पहले से सुरक्षित होने के बावजूद दूसरों को बचाने के लिए वापस नीचे गए.
फ्लैश फ्लड के बाद तीर्थयात्री दल को करीब दो दिन बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजारने पड़े. खाने-पीने का सामान सीमित था और उन्हें स्थानीय लोगों से मिले पानी और हल्के-फुल्के खाने पर निर्भर रहना पड़ा.
इस दौरान समूह के लोग भारतीय दूतावास के अधिकारियों के लगातार संपर्क में रहे. अधिकारियों ने नेपाल में मौजूद विभिन्न एजेंसियों के साथ मिलकर उनके सुरक्षित निकास की व्यवस्था की.
तमिलनाडु के कई मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विदेश मंत्री एस जयशंकर के स्तर पर भी समूह की सुरक्षित वापसी को लेकर समन्वय किया गया. इसके बाद यात्रियों को नेपाल की राजधानी काठमांडू पहुंचाया गया और करीब 48 घंटे के भीतर भारत वापस लाने की प्रक्रिया पूरी की गई.
नेपाल में बुधवार को आई फ्लैश फ्लड ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई. बाढ़ के साथ बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा और बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए.
रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 724 तक पहुंच गई थी, जबकि करीब 2,500 लोग अब भी लापता बताए गए. नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के टूटने के बाद बर्फ और चट्टानों का मलबा नीचे आया, जिसके बाद अचानक बाढ़ की स्थिति बनी.
इस भयावह आपदा के बीच तमिलनाडु के तीर्थयात्रियों की यह कहानी बताती है कि मुश्किल वक्त में एक साधारण साड़ी भी किसी की जिंदगी बचाने का जरिया बन सकती है.
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हल्द्वानी से दिल्ली के बड़े न्यूजरूम तक… तनुजा जोशी, उत्तराखंड के शांत और खूबसूरत शहर हल्द्वानी से ताल्लुक रखती हैं. देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी … और पढ़ें
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