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विपक्षी गठबंधन के समूह INDIA ब्लॉक के भविष्य पर संकट है और ये संकट दिनोंदिन गहराता जा रहा है. एक धड़ा अब खुलकर कांग्रेस की मुखालफत कर रहा है और अलायंस की कमान ममता बनर्जी को सौंपने की पैरवी करने में जुटा है. हालांकि, लीडरशीप की लड़ाई में स्टेट फैक्टर भी देखने को मिल रहा है.
दरअसल, जिन राज्यों में विपक्षी दल सत्ता में नहीं हैं यानी बाहर हैं, वहां के सहयोगी दलों का कांग्रेस पर दबाव ज्यादा है और वो नेतृत्व परिवर्तन की आवाज उठा रहे हैं.
जिन राज्यों में सरकार, वहां सहयोग बरकरार
जबकि जिन राज्यों में विपक्षी दल सत्ता में हैं और कांग्रेस उस सरकार का हिस्सा है, वहां सहयोग बरकरार देखने को मिल रहा है. यानी सत्तारूढ़ वाले राज्यों में विपक्षी दल कांग्रेस के नेतृत्व पर सवाल नहीं उठा रहे हैं.
इसे ऐसे देख सकते हैं. झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में JMM की सरकार है और कांग्रेस सहयोगी दल है. इसी तरह, तमिलनाडु में एमके स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके की सरकार है और कांग्रेस सहयोगी पार्टी है. इसी तरह, जम्मू कश्मीर में भी उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) की सरकार है और कांग्रेस सहयोगी पार्टी है. इन तीनों ही राज्यों में इंडिया ब्लॉक के नेतृत्व को लेकर सवाल नहीं उठ रहे हैं और ना किसी तरह की प्रतिक्रिया दी जा रही है. यानी तीनों ही राज्यों में कांग्रेस के नेतृत्व को समर्थन है.
बिहार और महाराष्ट्र में नेतृत्व परिवर्तन की आवाज
जबकि बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इंडिया ब्लॉक में नेतृत्व परिवर्तन की मांग पर उठ रही है. पश्चिम बंगाल में टीएमसी का प्रभाव है और वहां ममता बनर्जी जैसी क्षत्रप हैं, जहां कांग्रेस का लोकसभा चुनाव से ही विरोध किया जा रहा है. लेफ्ट दल भी कांग्रेस से खुश नहीं हैं.
खड़गे के पास है इंडिया ब्लॉक की कमान
फिलहाल, इंडिया ब्लॉक की कमान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पास है और विरोध में कहा यह जा रहा है कि खड़गे से कमान वापस ली जाए और ममता बनर्जी की दावेदारी को मजबूत किया जाए. यह सब तब हुआ, जब ममता बनर्जी ने खुले तौर पर कहा कि वे इंडिया ब्लॉक की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं.
इंडिया ब्लॉक में कौन-कौन पार्टियां?
केंद्र की एनडीए सरकार को चुनौती देने के लिए 18 महीने पहले ही इंडिया ब्लॉक बनाया गया था. पहली बैठक जून 2023 में पटना में हुई थी. इस बैठक में विपक्ष की करीब 26 पार्टियों ने सहभागिता की और अलायंस का हिस्सा होने पर सहमति जताई थी. बाद में जेडीयू और आरएलडी ने इंडिया ब्लॉक से नाता तोड़ा और एनडीए में शामिल हो गए.
जिन पार्टियों ने इंडिया ब्लॉक जॉइन किया, उनमें कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, सपा, AAP, RJD, JMM, NCP (SP), शिवसेना (UBT), अपना दल (कमेरावादी), जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी), ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एमडीएमके), विदुथलाई चिरुथैगल काची (वीसीके), कोंगुनाडु मक्कल देसिया काची (केएमडीके), मणिथनेय मक्कल काची (एमएमके), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल), केरल कांग्रेस (एम), केरल कांग्रेस (जोसेफ) का नाम शामिल है.
आम चुनाव के बाद बिखरने लगा विपक्ष?
हालांकि, आम चुनाव के बाद विपक्ष को खास सफलता नहीं मिली तो यह समूह भी धीरे-धीरे टकराव और बिखराव की तरफ बढ़ने लगा. हरियाणा चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अलग-अलग मैदान में उतरी. उससे पहले लोकसभा चुनाव में टीएमसी और कांग्रेस पश्चिम बंगाल और पंजाब में AAP और कांग्रेस ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे.
ममता बनर्जी ने क्या बयान दिया?
दरअसल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हरियाणा और फिर महाराष्ट्र और उपचुनावों में INDIA ब्लॉक के खराब प्रदर्शन पर नाराजगी जताई थी. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, मैंने INDIA अलायंस बनाया. इसका नेतृत्व करने वाले इसे ठीक से नहीं चला सकते, तो मुझे मौका दें. मैं बंगाल से ही अलायंस का नेतृत्व करने के लिए तैयार हूं. उसके बाद INDIA ब्लॉक के कई नेताओं ने अलायंस की कमान ममता बनर्जी को सौंपने की मांग उठाई. इनमें महाराष्ट्र से शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत, प्रियंका चतुर्वेदी और NCP (SP) के शरद पवार और RJD सुप्रीमो लालू यादव का नाम शामिल है.
बुधवार को फिर ममता बनर्जी का बयान आया और उन्होंने कहा कि नेताओं ने मुझे जो सम्मान दिया है, मैं उसके लिए आभारी हूं. मैं बस ये चाहती हूं कि सभी जुड़े रहें और INDIA ब्लॉक अच्छा रहे. ममता ने ये धन्यवाद किस बात पर दिया है, इसे लेकर उन्होंने कुछ नहीं कहा है. हालांकि, उनके इस बयान को INDIA ब्लॉक की लीडरशिप से जोड़कर देखा जा रहा है.
किस राज्य के नेता ने क्या कहा?
बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने ममता के नाम पर सहमति जताई थी. तेजस्वी ने कहा था, हमें ममता बनर्जी के गठबंधन को लीड किए जाने से कोई समस्या नहीं है, लेकिन ये फैसला सर्वसम्मति से होगा. आरजेडी प्रमुख लालू यादव ने कहा, ममता बनर्जी को इंडिया गठबंधन का नेता चुना जाना चाहिए. कांग्रेस के विरोध का कोई मतलब नहीं है. ममता बनर्जी को ही नेता बनाया जाना चाहिए.
लालू यादव के इस बयान के गहरे मायने हैं. दरअसल, लालू यादव परिवार को कांग्रेस का सबसे करीबी और भरोसेमंद सहयोगी के तौर पर गिना जाता है. 20 साल पहले जब सोनिया गांधी को विदेशी मूल के मुद्दे पर घेरा गया तो लालू समर्थन में खड़े देखे गए. 2004 के आम चुनाव बाद जब कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए का गठन हुआ तो बीजेपी ने सोनिया गांधी के खिलाफ मुहिम छेड़ दी थी. लेकिन लालू यादव ना सिर्फ बचाव में देखे गए, बल्कि सरकार को समर्थन भी दिया.
क्या बोले थे शरद पवार?
शरद पवार ने ममता को अपना समर्थन देते हुए कहा था, हां, निश्चित रूप से वो गठबंधन का नेतृत्व करने में सक्षम हैं. वह इस देश की एक प्रमुख नेता हैं. उनमें वो क्षमता है. उन्होंने जिन निर्वाचित नेताओं को संसद में भेजा है, वे जिम्मेदार, कर्तव्यनिष्ठ और अच्छी तरह से जागरूक लोग हैं, इसलिए, उन्हें ऐसा कहने का अधिकार है.
उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा था?
जम्मू कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा, टीएमसी नेताओं ने ममता का नाम भी प्रस्तावित किया था. लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद इंडिया ब्लॉक की कोई बैठक नहीं हुई है, इसलिए नेतृत्व परिवर्तन का सवाल ही नहीं उठता है. एक बैठक होने दीजिए और अगर ममता बनर्जी चाहें तो नेतृत्व का दावा करने दें. इस पर चर्चा होगी.
कांग्रेस और ममता में क्या मतभेद?
सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के बीच काफी अच्छे संबंध हैं. सोनिया गांधी को अक्सर ममता बनर्जी का सम्मान करते भी देखा गया है, लेकिन दोनों पार्टियों के बीच मतभेद की वजह पश्चिम बंगाल की राजनीति है. टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी मुख्यमंत्री हैं और विपक्षी दलों में कांग्रेस का नाम भी शामिल है. कांग्रेस और लेफ्ट के बीच गठबंधन है. अधीर रंजन चौधरी को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद हमले तेज हुए और ममता की नाराजगी बढ़ती गई. आम चुनाव में सीट शेयरिंग पर भी विवाद हुआ तो ममता बनर्जी ने कांग्रेस से दूरी बना ली.
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