मुख्य बातें
मार्केट की वोलैटिलिटी यानी उठापटक मापने वाला इंडिया VIX पिछले कुछ समय से जोरदार बढ़त में है। सितंबर की शुरुआत से यह 36% से ज्यादा चढ़ चुका है, जबकि साल की शुरुआत से अब तक करीब 61% की बढ़त दिखा चुका है। इसकी वजह मार्केट में बढ़ी अस्थिरता और भू-राजनीतिक कारणों से पैदा हुई अनिश्चितता है।
इंडिया VIX के लिए 9 से 12 की रेंज को निचला बैंड माना जाता है, जबकि 12 से 15 को सामान्य रेंज। फियर इंडेक्स यानी डर का सूचकांक अभी भी सामान्य रेंज के करीब है, लेकिन सितंबर से इसकी लगातार बढ़त बताती है कि तेज इंट्राडे उठापटक के लिए तैयार रहना चाहिए।
1 जनवरी 2026 को 8.72 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद वोलैटिलिटी इंडेक्स मार्च तक बढ़ता रहा और 28.91 तक पहुंच गया। इसकी वजह अमेरिका-ईरान संघर्ष के चलते तेल की कीमतों में तेज उछाल थी। खास बात यह है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने एक साथ ईरान पर हवाई हमले किए थे।
हालांकि, अगले पांच महीनों, अप्रैल से अगस्त के हिसाब से इंडेक्स में लगातार गिरावट रही और यह फिर 9 के करीब आ गया। इस दौरान पश्चिम एशिया संघर्ष सुलझाने की कई कूटनीतिक कोशिशें हुईं, लेकिन अब अमेरिका-ईरान की लड़ाई जारी है और तेल की ऊंची कीमतों से अर्थव्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की चिंता बढ़ रही है, जिससे मार्केट की वोलैटिलिटी फिर ऊपर चढ़ रही है।
इंडिया VIX निफ्टी ऑप्शन की कीमतों से निकाला जाता है। यह दिखाता है कि मार्केट अगले 30 कैलेंडर दिनों में कितनी वोलैटिलिटी की उम्मीद कर रहा है। बढ़ता VIX बताता है कि मार्केट को ऊंची उठापटक की उम्मीद है, लेकिन इसे यह संकेत नहीं मानना चाहिए कि मार्केट क्रैश होने वाला है।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज में रिसर्च हेड देवर्षि वकील ने कहा, “यह बताता है कि ऑप्शन मार्केट कितनी चाल को प्राइस कर रहा है। यह नहीं कि निफ्टी ऊपर जाएगा या नीचे। बढ़ता VIX ऊंची उम्मीद वाली वोलैटिलिटी और अनिश्चितता की ओर इशारा करता है, लेकिन अकेले यह नुकसान का अनुमान नहीं है।”
वकील ने कहा, “सितंबर से इंडिया VIX करीब 30% बढ़ा है, लेकिन इस प्रतिशत बदलाव को संदर्भ में देखना जरूरी है। VIX खुद प्रतिशत में होता है, इसलिए उसकी चाल को और प्रतिशत बढ़ोतरी बताना सिग्नल को बड़ा कर सकता है। असल आंकड़ों में देखें तो पिछले दो साल में इंडिया VIX औसतन 14 के आसपास रहा है और अभी यह 15 से बस थोड़ा ऊपर है। यानी यह अपने हाल के औसत से थोड़ा ही ऊपर है, अकेले इस स्तर से यह नहीं कहा जा सकता कि मार्केट में गहरा डर है।”
मौजूदा समय में एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह चिंता की बात नहीं है। रेलिगेयर ब्रोकिंग में रिसर्च के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट अजीत मिश्रा ने कहा, “सितंबर से इंडिया VIX बढ़ी अनिश्चितता और मार्केट की हलचल के खिलाफ बचाव की बढ़ती मांग दिखाता है। यह जरूरी नहीं कि मार्केट क्रैश होने वाला है, लेकिन यह जरूर बताता है कि निवेशकों को तेज इंट्राडे हलचल और कम अनुमान लगाने वाले मार्केट के लिए तैयार रहना चाहिए।”
दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में ‘लाइव हिन्दुस्तान’ की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए ‘कुछ अलग’ और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें
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