Kanya Pujan 2026: कन्या पूजन के लिए नहीं मिल रहीं 9 बच्चियां? जानें कितनी कन्याओं से पूरी होगी पूजा – Bharat24live

Rashmi Singh
Date: 14-10-26 15:10
Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि में अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है. इस दौरान भक्त छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करते हैं और उन्हें हलवा, पूरी व चने का प्रसाद खिलाते हैं. लेकिन दिल्ली, नोएडा और दूसरे बड़े शहरों की हाईराइज सोसायटी में रहने वाले कई परिवारों के सामने एक व्यावहारिक परेशानी आती है. आसपास नौ कन्याएं एक साथ न मिल पाने के कारण वे सोच में पड़ जाते हैं कि क्या कम कन्याओं के पूजन से व्रत अधूरा रह जाएगा. अगर आपके साथ भी ऐसी स्थिति है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. आइए जानते हैं कन्या पूजन की परंपरा, लांगुर का महत्व और ऐसी परिस्थिति में किन बातों का ध्यान रखा जा सकता है.
कन्या पूजन में कितनी कन्याओं को बुलाना चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में नौ कन्याओं को मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक मानकर पूजा जाता है. इसी वजह से अष्टमी और नवमी पर नौ कन्याओं को भोजन कराने की परंपरा प्रचलित है. कन्या पूजन के साथ एक छोटे बालक को भी आमंत्रित किया जाता है, जिसे कई क्षेत्रों में लांगुर या बटुक भैरव का प्रतीक माना जाता है.
हालांकि, हर परिवार और क्षेत्र में पूजा की परंपराओं में कुछ अंतर हो सकता है. यदि किसी कारण से नौ कन्याएं एक साथ उपलब्ध नहीं हो पाती हैं, तो केवल संख्या की चिंता में पूजा को लेकर परेशान होने के बजाय अपनी पारिवारिक परंपरा और मान्यताओं के अनुसार व्यवस्था की जा सकती है. श्रद्धा, सम्मान और स्वच्छता के साथ पूजा करना भी इस परंपरा का अहम हिस्सा है.
नौ कन्याएं न मिलें तो क्या करें?
दिल्ली-एनसीआर जैसे बड़े शहरों में अपार्टमेंट और हाईराइज सोसायटी में रहने वाले परिवारों के लिए कन्या पूजन के दिन नौ कन्याओं को एक साथ बुलाना कभी-कभी मुश्किल हो सकता है. ऐसी स्थिति में आसपास रहने वाले परिवारों से पहले ही संपर्क किया जा सकता है या सोसायटी में रहने वाली बच्चियों और उनके अभिभावकों से बात करके व्यवस्था बनाई जा सकती है.
यदि इसके बावजूद नौ कन्याएं उपलब्ध न हों, तो अपनी पारिवारिक परंपरा या किसी जानकार पुरोहित की सलाह के अनुसार उपलब्ध कन्याओं का आदरपूर्वक पूजन किया जा सकता है. यह ध्यान रखना जरूरी है कि कम कन्याओं के पूजन से व्रत का फल निश्चित रूप से पूरा मिलता है या नहीं, इस बारे में सभी परंपराओं में एक समान नियम नहीं बताया जाता. इसलिए किसी एक संख्या को हर जगह के लिए अनिवार्य या पर्याप्त बताने के बजाय स्थानीय रीति और मान्यता को प्राथमिकता देना बेहतर है.
घर पर कैसे करें कन्या पूजन?
कन्या पूजन के दिन सबसे पहले पूजा स्थल और भोजन तैयार करने की जगह को अच्छी तरह साफ कर लें. इसके बाद कन्याओं का सम्मानपूर्वक स्वागत करके उन्हें स्वच्छ आसन पर बैठाएं. परंपरा के अनुसार उनके चरण धोए जाते हैं, माथे पर तिलक लगाया जाता है और मौली बांधी जाती है. इसके बाद उन्हें हलवा, पूरी, काले चने और अन्य पारंपरिक पकवानों का भोजन कराया जाता है.
भोजन के बाद कन्याओं को अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा या उपहार दिया जा सकता है. कई परिवार कन्याओं के चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद भी लेते हैं. इस दौरान बच्चों की सहजता, इच्छा और सम्मान का ध्यान रखना जरूरी है. पूजा का उद्देश्य केवल रस्म निभाना नहीं, बल्कि कन्याओं को सम्मान देना और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करना भी है.
लांगुर यानी छोटे बालक की पूजा क्यों की जाती है?
कन्या पूजन के साथ एक छोटे बालक को लांगुर के रूप में बैठाने की परंपरा भी कई क्षेत्रों में प्रचलित है. धार्मिक मान्यता में उसे बटुक भैरव का प्रतीक माना जाता है. इसी कारण कई परिवार नौ कन्याओं के साथ एक बालक को भोजन कराते हैं. हालांकि, इस परंपरा का स्वरूप अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकता है.
यदि आप अपने घर में कन्या पूजन कर रहे हैं, तो अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार लांगुर की व्यवस्था कर सकते हैं. यदि बालक उपलब्ध न हो, तो इस विषय में अपने परिवार के बड़े-बुजुर्गों या पुरोहित से मार्गदर्शन लेना उचित रहेगा.
कन्या पूजन में भोजन की थालियों को लेकर क्या करें?
कई परिवारों में नौ कन्याओं के लिए नौ अलग-अलग थालियां सजाने की परंपरा है. लेकिन यदि कम कन्याएं उपलब्ध हों, तो बची हुई थालियों का भोजन मंदिर में अर्पित करने, जरूरतमंदों तक पहुंचाने या उचित तरीके से वितरित करने जैसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं. भोजन को गौ माता को खिलाने की परंपरा भी कुछ परिवारों में प्रचलित है. हालांकि, नौ थालियां सजाना और शेष भोजन को किसी विशेष स्थान पर अर्पित करना हर परिवार के लिए एक समान अनिवार्य नियम नहीं है. 
ये भी पढ़ें- दुर्गा अष्टमी पर कन्याओं को क्यों खिलाते हैं हलवा-पूरी और चने? जानें सदियों पुरानी परंपरा
भारत 24 लाइव — भारत का विश्वसनीय हिंदी समाचार पोर्टल। ताज़ा खबरें, विश्लेषण, वीडियो।
लाइव भारत 24 ऐप डाउनलोड करें और लाइव समाचार देखें

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News