Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर, हिप्र। हाईकोर्ट ने राज्य के सभी व्यवहार न्यायालयों के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश से डिजिटल अरेस्ट में फ्रीज की गई राशि को पीड़ितों को दिलाने को लेकर रिपोर्ट मांगी है। इस संबंध में हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार प्रशासन ने पत्र भेजा है।
हाईकोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट के मामले में जब्त या फ्रीज की गई राशि को पीड़ितों को शीघ्रता से दिलाने व इसकी प्रगति रिपोर्ट भेजने को कहा है। डिजिटल अरेस्ट के मामले में पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट के स्वत: संज्ञान रिट याचिका (आपराधिक) पर पारित आदेश के आलोक में हाईकोर्ट ने यह रिपोर्ट मांगी है। जिले में इस वर्ष अब तक डिजिटल अरेस्ट की तीन मामला साइबर थाने में दर्ज हुए है। इसमें एक करोड़ दो लाख से अधिक की राशि की ठगी की गई है। एक मामले में पुलिस ने सात लाख 72 हजार 866 रुपये फ्रीज कराई थी। कोर्ट के आदेश से यह राशि पीड़ित को दी जा चुकी है।
दो मामलों में पुलिस फ्रीज नहीं करा सकी राशि :
काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र के आमगोला निवासी सेवानिवृत्त बैंक कर्मी महेश गामी व उनकी पत्नी रेणु गामी को 26 मार्च से सात अप्रैल तक डिजटल अरेस्ट कर 67 लाख रुपये की ठगी की गई थी। इस संबंध में महेश ने नौ अप्रैल को साइबर थाना में एफआईआर कराई थी। मामले में पुलिस ने पटना के प्रियरंजन शर्मा व उसके पुत्र को गिरफ्तार किया था। हालांकि, पुलिस इस मामले ठगी की राशि को फ्रीज नहीं करा सकी। सदर थाना के मझौली खेतल गांव के भोला प्रसाद महतो को दस अप्रैल को डिजिटल अरेस्ट कर 17 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। मामले में भी पुलिस ठगी की राशि फ्रीज नहीं करा सकी। सदर थाना के भगवानपुर यादव नगर के श्रीकृष्ण विहार कॉलोनी के हरेंद्र कुमार को छह से 11 अप्रैल तक डिजिटल अरेस्ट कर 18 लाख रुपये की ठगी की गई। इसमें से पुलिस ने सात लाख 72 हजार 866 रुपये फ्रीज करा सकी। कोर्ट के आदेश पर यह राशि उन्हें दी जा चुकी है।
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