Nikol Pashinyan Latest News, Updates in Hindi | निकोल पशीनयान के समाचार और अपडेट – aajtak.in

Feedback
निकोल वोवायी पशीनयान आर्मेनिया के प्रधानमंत्री हैं. वे एक पत्रकार भी रहे हैं. पशीनयान ने वर्ष 1998 में अपना समाचार पत्र शुरू किया था. हालांकि, एक साल बाद मानहानि से जुड़े मामले के कारण यह समाचार पत्र बंद कर दिया गया. इस मामले में उन्हें तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री सर्ज सरगस्यान के खिलाफ मानहानि के आरोप में एक साल की सजा सुनाई गई थी. बाद में उन्होंने हायकाकान झामानाक नाम के समाचार पत्र का संपादन किया. वे वर्ष 1999 से 2012 तक इस समाचार पत्र से जुड़े रहे.
1 जून 1975 को जन्में निकोल पशीनयान राजनीतिक जीवन के शुरुआती दौर में पहले राष्ट्रपति लेवोन टेर-पेत्रोसयान के समर्थक रहे. उन्होंने राष्ट्रपति रॉबर्ट कोचरयान, रक्षा मंत्री सर्ज सरगस्यान और उनके सहयोगियों की नीतियों की आलोचना की. पशिनयान आर्मेनिया और रूस के करीबी संबंधों पर भी सवाल उठाते रहे और तुर्की के साथ संबंध मजबूत करने की बात करते थे.
वर्ष 2007 के संसदीय चुनाव में पशीनयान ने एक छोटे विपक्षी दल का नेतृत्व किया. इस चुनाव में उनके दल को करीब 1.3 प्रतिशत वोट मिले. वर्ष 2008 के राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने लेवोन टेर-पेत्रोसयान के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभाई. चुनाव में सर्ज सरगसयान की जीत के बाद विपक्ष ने चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाए.
फरवरी और मार्च 2008 में हुए विरोध प्रदर्शनों में पशीनयान विपक्षी नेताओं में शामिल रहे. 1 मार्च 2008 को सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को हटाया. इस घटना में दस लोगों की मौत हुई थी. इसके बाद पशीनयान पर सामूहिक अशांति आयोजित करने का आरोप लगा. वे कुछ समय तक छिपे रहे और बाद में गिरफ्तार हुए. उन्हें सात साल की जेल की सजा सुनाई गई. मई 2011 में आम माफी के तहत उन्हें रिहा कर दिया गया.
वर्ष 2012 में पशीनयान संसद के लिए चुने गए. बाद में उनके और टेर-पेत्रोसयान के बीच राजनीतिक मतभेद सामने आए. इसके बाद पशीनयान ने सिविल कॉन्ट्रैक्ट नाम की पार्टी बनाई. वर्ष 2017 में उन्होंने दो अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर वे आउट एलायंस बनाया. इस गठबंधन को संसदीय चुनाव में करीब 8 प्रतिशत वोट मिले.
वर्ष 2018 में पशीनयान ने सरकार के खिलाफ बड़े जन आंदोलन का नेतृत्व किया. इस आंदोलन को आर्मेनियाई क्रांति के नाम से जाना गया. आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री सर्ज सरगसयान और उनकी सरकार को इस्तीफा देना पड़ा. 8 मई 2018 को पशीनयान को संसद ने कार्यवाहक प्रधानमंत्री चुना. दिसंबर 2018 में हुए मध्यावधि संसदीय चुनाव में उनकी पार्टी को जीत मिली.
प्रधानमंत्री के रूप में पशीनयान के कार्यकाल में आर्मेनिया को कई राजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ा. इनमें सबसे बड़ी चुनौती नागोर्नो-काराबाख को लेकर अजरबैजान के साथ संघर्ष रही. वर्ष 2020 में आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच 44 दिनों तक युद्ध चला. 9 नवंबर 2020 को पशीनयान ने रूस और अजरबैजान के साथ त्रिपक्षीय युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए.
युद्ध के बाद आर्मेनिया में पशीनयान की सरकार की आलोचना हुई. उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए और इस्तीफे की मांग की गई. अप्रैल 2021 में पशीनयान ने मध्यावधि चुनाव कराने के लिए प्रधानमंत्री पद से औपचारिक इस्तीफा दिया, लेकिन चुनाव तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में काम करते रहे. जून 2021 के चुनाव में उनकी पार्टी ने आधे से अधिक वोट हासिल किए और सरकार बनाने में सफल रही.
वर्ष 2023 में नागोर्नो-काराबाख से बड़ी संख्या में जातीय आर्मेनियाई लोगों के विस्थापन के बाद पशीनयान की सरकार पर फिर सवाल उठे. इसके बाद उनकी लोकप्रियता में गिरावट की खबरें सामने आईं. इसी अवधि में आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच शांति समझौते की दिशा में बातचीत भी आगे बढ़ी. इस प्रक्रिया में आर्मेनिया की ओर से कई समझौतों पर सहमति बनी. पशीनयान का राजनीतिक जीवन आज भी आर्मेनिया की घरेलू राजनीति, अजरबैजान के साथ संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है.
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News