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India News (इंडिया न्यूज), CPEC Political Instability : चीन और पाकिस्तान दोनों दुनिया को ऐसा दिखाते हैं कि दोनों देशों के रिश्ते काफी मजबूत हैं। लेकिन असलियत तो कुछ और ही है।
इस वक्त चीन की सांसे उसकी महत्वाकांक्षी परियोजना चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) को लेकर ऊपर-नीचे हो रही है और इसके पीछे की वजह बलूचिस्तान में पाकिस्तान की नाकामी और लगातार बढ़ता विद्रोह है। अब इसके लेकर चीन ने कुछ ऐसा किया है, जिसकी पाक को बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी।
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असल में CPEC को बचाने के लिए चीन ने पाकिस्तान सरकार और सेना को दरकिनार कर खुद बलूच विद्रोही समूहों से सीधे बातचीत शुरू कर दी है। हाल ही में पाकिस्तान के विदेश मंत्री और उप प्रधानमंत्री इशाक डार की बीजिंग यात्रा के दौरान CPEC पर चर्चा हुई थी।
बलूचिस्तान में पाक सेना के अलावा वहां पर काम कर रहे चीनी इंजीनियरों पर भी हमले हुए हैं। आकड़ों के मुताबिक साल 2021 से अब तक 20 से ज्यादा चीनी नागरिक मारे जा चुके हैं और 30 से अधिक घायल हुए हैं। इन हमलों की वजह से ग्वादर बंदरगाह और हवाई अड्डा जैसे बड़े प्रोजेक्ट भी ठप पड़े हुए हैं। इसी के चलते चीन ने पाक को नजरअंदाज करते हुए बलूच विद्रोही संगठनों के गठबंधन BRAS (बलूच राजी अजोई संगर) से संपर्क किया है।
इसके अलावा अपने नागरिकों और CPEC की सुरक्षा के लिए बीजिंग वहां पर अपनी निजी सुरक्षा कंपनियों को तैनात कर रहा है। लेकिन इससे भी कोई फायदा होता हुआ नजर नहीं आ रहा है। विद्रोही हमले हो रहे हैं। ताजा हमले में विद्रोहियों ने क्वेटा से कराची तक की सड़क काट दी और सुराब जैसे शहर पर कब्जा भी कर लिया।
इस घटनाक्रम को देखते हुए विश्लेषकों का मानना है कि चीन ने इस्लामाबाद और रावलपिंडी में भरोसा खो दिया है। यही वजह है कि वह अब पाक सेना या सरकार के बजाय BRAS से संपर्क कर रहा है। चीन के इस कदम के बाद साफ है कि पाकिस्तान की सामरिक स्थिति कमजोर हुई है। देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही चीनी कर्ज पर निर्भर है और अब सेना की विश्वसनीयता भी सवालों के घेरे में है।
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