Palamu News: मिटार गांव के हाईस्कूल में महज दो शिक्षकों के भरोसे बनाया जा रहा 187 बच्चों का भविष्य – Hindustan

Palamu News: नीलांबर-पीतांबरपुर, जलेश शर्मा। पलामू जिला मुख्यालय सिटी मेदिनीनगर से करीब 70 किलोमीटर दूर मनातू प्रखंड के मिटार गांव स्थित राजकीय उत्क्रमित उच्च विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था शिक्षकों की कमी सहित कई चुनौतियों के बीच संचालित हो रही है। विद्यालय में 187 विद्यार्थियों का नामांकन है, जिनमें करीब 150 बच्चे नियमित रूप से स्कूल पहुंचते हैं। इन विद्यार्थियों की पढ़ाई की जिम्मेदारी फिलहाल दो शिक्षकों के कंधों पर है। प्रधानाध्यापक वीरेंद्र यादव बताते हैं कि हाल में सहायक शिक्षक के रूप में धनंजय यादव की पदस्थापना हुई है। इससे विद्यालय में शिक्षकों की संख्या दो हो गई है, लेकिन विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में अभी भी शिक्षकों की कमी बनी हुई है। उन्हे शिक्षण के साथ स्कूल का प्रशासनिक और लिपिकीय कार्य भी संभालने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के बदलते सामाजिक माहौल में शिक्षा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इसके लिए पर्याप्त शिक्षक, सुरक्षित भवन और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होना आवश्यक है।

विद्यालय के सामने दूसरी बड़ी चुनौती भवन की है। उग्रवाद के दौर में विद्यालय के अपने भवन में पुलिस पिकेट स्थापित किया गया था। वर्तमान में कक्षाएं बगल के मध्य विद्यालय के दो जर्जर कमरों में संचालित हो रही हैं। छत से पानी टपकने के अलावा सीमित जगह के कारण एक ही कमरे में कई कक्षाओं के विद्यार्थियों को बैठाकर पढ़ाना पड़ता है। कार्यालय और स्टोर की व्यवस्था भी इन्हीं सीमित स्थानों में करनी पड़ती है। ग्रामीण महेंद्र ठाकुर, विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष लल्लू साव, वीपीएम राजदेव विश्वकर्मा और शिक्षक वीरेंद्र यादव के अनुसार मध्य विद्यालय के नए भवन के निर्माण के लिए राशि आवंटित हुई थी, लेकिन निर्माण अधूरा रह गया। भवन की खड़ी दीवारों में अब दरारें भी दिखाई देने लगी हैं। मूलभूत सुविधाओं की कमी भी विद्यार्थियों के लिए चुनौती है। विद्यालय में पर्याप्त शौचालय, पीने के पानी, खेल मैदान और खेल सामग्री की सुविधा नहीं है। छठी की छात्रा सोनी कुमारी ने पानी और शौचालय की समस्या बताई। सातवीं के विद्यार्थी निक्की कुमारी, शिखा कुमारी और आशीष कुमार ने भी जर्जर कमरों और सुविधाओं की कमी की बात कही। मिटार का यह विद्यालय फिलहाल सीमित संसाधनों के बीच बच्चों की पढ़ाई जारी रखने की कोशिश कर रहा है।

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