Panchak July 2026: ज्योतिष शास्त्र और हिंदू पंचांग के अनुसार, जुलाई 2026 का महीना धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद विशेष और संवेदनशील होने वाला है. इस महीने एक बहुत ही दुर्लभ संयोग बन रहा है जुलाई के 31 दिनों के भीतर एक नहीं, बल्कि दो बार पंचक का साया रहेगा.
सावन के इस पावन महीने में चंद्रमा का गोचर कुछ इस तरह हो रहा है कि महीने की शुरुआत ‘मृत्यु पंचक’ से होगी और अंत ‘चोर पंचक’ से. ऐसे में आम जनता के बीच इस बात को लेकर उत्सुकता और थोड़ी चिंता है कि आखिर ये दोनों पंचक कब से कब तक रहेंगे और इस दौरान किन बातों का विशेष ध्यान रखना होगा. आइए जानते हैं दोनों पंचक की सटीक तारीखें, समय और पंचांग के कड़े नियम.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में गोचर करता है, तो उस अवधि को पंचक कहा जाता है. इस दौरान चंद्रमा पांच नक्षत्रों- धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती से होकर गुजरता है. आमतौर पर इस 5 दिनों की अवधि को शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए वर्जित या बेहद संवेदनशील माना जाता है. पंचक किस दिन (वार) से शुरू हो रहा है, उसी के आधार पर इसका नाम और प्रभाव तय होता है.
जुलाई 2026 के दोनों पंचक का सटीक समय Panchak Timings
जुलाई के महीने में लगने वाले दोनों पंचक अलग-अलग स्वभाव के हैं. पंचांग के अनुसार इनका सटीक समय इस प्रकार है:
शुरुआत: 4 जुलाई 2026, शनिवार को दोपहर 12:48 बजे से
समाप्त: 8 जुलाई 2026, बुधवार को शाम 04:00 बजे तक
प्रभाव: शनिवार से शुरू होने के कारण यह बेहद कष्टकारी और दुर्घटनाओं का कारक माना जाता है. इसमें शारीरिक कष्ट और कार्यों में बाधा आने की आशंका सबसे ज्यादा रहती है.
शुरुआत: 31 जुलाई 2026, शुक्रवार को सुबह 06:38 बजे से
समाप्त: 4 अगस्त 2026, मंगलवार को रात 09:54 बजे तक
प्रभाव: शुक्रवार से शुरू होने के कारण इसे ‘चोर पंचक’ कहते हैं. ज्योतिष के अनुसार इस दौरान यात्रा करने या बड़े आर्थिक लेन-देन करने से धन हानि, व्यापार में घाटा और चोरी का खतरा रहता है.
शास्त्रों के अनुसार, पंचक के इन 5 दिनों में कुछ कामों को करने की सख्त मनाही होती है. मान्यता है कि इस दौरान किया गया कोई भी गलत काम 5 गुना ज्यादा भारी पड़ सकता है:
दक्षिण दिशा की यात्रा: पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए. ज्योतिष में दक्षिण को यमराज और पितरों की दिशा मनाया गया है, इसलिए इस दिशा में यात्रा करना कष्टकारी हो सकता है.
घर की छत (लेंटर) डालना: यदि आप घर का निर्माण करवा रहे हैं, तो पंचक के दिनों में छत डलवाने का काम रोक दें. माना जाता है कि पंचक में बनी छत घर में क्लेश या धन हानि का कारण बन सकती है.
नया बेड या चारपाई खरीदना: इस अवधि में नया पलंग, खाट या गद्दे खरीदना या बनवाना पूरी तरह वर्जित है. ऐसा करने से परिवार के सदस्यों को शारीरिक कष्ट का सामना करना पड़ सकता है.
लकड़ी और ईंधन इकट्ठा करना: पंचक के दौरान घास, लकड़ी, कंडा या अन्य प्रकार के ईंधन इकट्ठा करके घर में रखना अशुभ माना जाता है. इससे अग्नि का भय बना रहता है.
जोखिम भरे फैसले और विवाद: विशेषकर 4 जुलाई से शुरू हो रहे ‘मृत्यु पंचक’ के दौरान किसी भी तरह के वाद-विवाद, कोर्ट-कचहरी के मामलों में पड़ने या बिना तैयारी के लंबी यात्रा और भारी आर्थिक निवेश करने से बचना चाहिए.
यदि पंचक के दौरान परिवार में किसी अप्रिय घटना या मृत्यु की स्थिति बनती है, तो गरुड़ पुराण के अनुसार विशेष नियम अपनाए जाते हैं. माना जाता है कि पंचक में शव का सामान्य तरीके से अंतिम संस्कार करने से परिवार पर संकट आ सकता है. इससे बचने के लिए दाह संस्कार के समय पवित्र कुशा या आटे के 5 पुतले बनाकर शव के साथ विधि-विधान से जलाए जाते हैं. इसे ‘पंचक शांति विधान’ कहा जाता है, जिससे दोष समाप्त हो जाता है.
ज्योतिषीय उपाय: अगर पंचक के दौरान कोई जरूरी काम करना ही पड़े, तो भगवान शिव और हनुमान जी की आराधना करें. महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना और जरूरतमंदों को अन्न व वस्त्र दान करना इस समय के नकारात्मक प्रभाव को कम करता है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.
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नेहा अवस्थी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 18 सालों का अनुभव है. नेहा टीवी और डिजिटल दोनों माध्यमों की जानकार हैं. इन 18 सालों में इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों … और पढ़ें
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