Bharat24
Date: 14-10-26 15:39
1.पंजाब में कैप्टन बदले, खिलाड़ी बदले… पर ‘कुर्सी-युद्ध’ का पुराना खेल नहीं बदला!
पंजाब कांग्रेस के घमासान पर दिल्ली में आपात बैठक !
पंचनद की धरती पर कांग्रेस का सियासी पारा एक बार फिर उबलने लगा है, और इस बार आग बुझाने का जिम्मा राजस्थान के तपे-तपाए सिपहसालार और पंजाब प्रभारी सचिन पायलट के कंधों पर आ टिका है. दिल्ली दरबार में राहुल गांधी के साथ पायलट की लंबी बैठक हुई, जहां सूबे के ‘अंदरूनी महाभारत’ की पूरी फाइल मेज पर खोल दी गई. चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा बने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग, जो कुर्सी से हटाए जाने के बाद से ही लगातार बगावती तेवरों में नजर आ रहे हैं और समानांतर शक्ति प्रदर्शन कर नए अध्यक्ष परगट सिंह की राह में कांटे बो रहे हैं. मैदान में उतरे परगट सिंह के सामने संगठन को एक सूत्र में पिरोना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है, क्योंकि एक तरफ वड़िंग का गुस्सा है तो दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी खेमे का बढ़ता सियासी रसूख !सचमुच, जब सूबे के दिग्गज ही एक-दूसरे की टांग खींचने में लगे हों, तो विपक्षी खेमे में तालियां बजना स्वाभाविक है. पायलट ने न केवल वड़िंग के बयानों और चन्नी खेमे की गोलबंदी का पूरा कच्चा-चिट्ठा राहुल गांधी के सामने पेश किया, बल्कि अनुशासन का डंडा चलाने की सख्त वकालत भी की. अब लुटियंस जोन से लेकर चंडीगढ़ तक चर्चा गर्म है !
2.कहीं ढोल पर थाप, कहीं हाथ में गदा… और खड़गे बन गए ‘बैटमैन’!
विपक्ष के प्रोटेस्ट में दिखा सियासी मेला !
विपक्ष का हालिया विरोध प्रदर्शन सिर्फ तल्ख नारों और तीखे भाषणों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें रंगारंग सियासी ड्रामे के ऐसे अनूठे पल भी कैमरे में कैद हुए जिसने सबको हैरान कर दिया. जब सड़क पर ढोल की थाप गूंजी, तो प्रियंका गांधी खुद को रोक नहीं पाईं और थिरकने लगीं, उन्हें देखकर पास खड़ी सुप्रिया सुले भी ताल मिलाते हुए झूम उठीं. वहीं दूसरी तरफ राजस्थान के युवा चेहरे सचिन पायलट पूरे मार्च में हाथ में भारी-भरकम गदा थामे ‘महाबली’ के अंदाज में कदमताल करते नजर आए,लेकिन महफिल का सबसे बड़ा सरप्राइज राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जुगलबंदी रही, जहां एक हल्के-फुल्के पल में राहुल ने खड़गे जी के चेहरे पर हॉलीवुड सुपरहीरो ‘बैटमैन’ का मास्क लगा दिया. अलबत्ता, सियासी प्रदर्शनों में ऐसी जिंदादिली और चुटीले अंदाज कम ही देखने को मिलते हैं.सचमुच जब गंभीर मुद्दों के बीच ऐसे रंग घुल जाएं तो सोशल मीडिया का पारा चढ़ना तय है. अब राजनीतिक प्रेक्षक चुटकी ले रहे हैं कि क्या यह विपक्ष का नया ‘सुपरहीरो’ अवतार है जो सत्ता पक्ष के चक्रव्यूह को भेदने निकला है?
3.जब अपनों पर ही चल जाए जुबान, तो फिर तय समझिए निलंबन का फरमान!
यूपी कांग्रेस में अंदरूनी कलह से राहुल गांधी नाराज !
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने की कोशिशों के बीच पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी एक बार फिर सरेआम हो गई है. यूपी कांग्रेस के भीतर वरिष्ठ नेताओं के साथ हुए विवाद और कथित अमर्यादित आचरण की गूंज अब सीधे राहुल गांधी के कानों तक पहुंच चुकी है. सूत्रों के मुताबिक, राहुल ने पूरे घटनाक्रम पर सख्त नाराजगी जताते हुए प्रदेश नेतृत्व से विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली है. इसी कड़ी में विवादों के केंद्र में आईं पार्षद ममता चौधरी को फौरन दिल्ली तलब किया गया है. माना जा रहा है कि अनुशासनहीनता के इस मामले में ममता चौधरी पर गाज गिरना लगभग तय है और पार्टी से निलंबन का परवाना किसी भी वक्त जारी हो सकता है. सचमुच, जब पार्टी बाहर विरोधियों से लड़ रही हो, तब घर के भीतर की यह कलह संगठन के मनोबल पर पानी फेर देती है. अलबत्ता, कड़ा संदेश देने के लिए अनुशासन का चाबुक चलाना आलाकमान की मजबूरी बन चुका है. राजनीतिक प्रेक्षक इसे यूपी में पार्टी की बिखरती कमान को कसने की आखिरी कोशिश के रूप में देख रहे हैं !
4.अंदर दो घंटे मंथन, बाहर गाड़ी तक छोड़ना… दोस्ती में सब ‘ऑल इज वेल’!
दिल्ली में यूपी के सियासी समीकरणों पर बनी नई रणनीति !
सड़क पर हुए विरोध मार्च का पसीना अभी सूखा भी नहीं था कि लुटियंस दिल्ली के एक बंगले में सपा और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की सीक्रेट महफिल जम गई. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव के बीच लगभग दो घंटे तक चली इस लंबी गुफ्तगू में उत्तर प्रदेश के आगामी समीकरणों, सीट शेयरिंग और गठबंधन की गांठों को सुलझाने पर गंभीर मंथन हुआ. दोनों दलों के बीच हाल के दिनों में उभरे मतभेदों की अटकलों को हवा में उड़ाते हुए मुलाकात के अंत में राहुल गांधी खुद अखिलेश को उनकी गाड़ी तक छोड़ने बाहर आए और गर्मजोशी से विदा किया. अलबत्ता राजनीति में बॉडी लैंग्वेज शब्दों से ज्यादा बोलती है और गाड़ी तक छोड़ने का यह शिष्टाचार गठबंधन के वफादारों के लिए राहत का टॉनिक बन गया. सचमुच यूपी की सियासी बिसात पर साइकिल और हाथ का तालमेल साधना आसान काम नहीं है. अब गलियारों में यक्ष प्रश्न यह गूंज रहा है कि क्या यह दो घंटे की केमिस्ट्री जमीनी कार्यकर्ताओं के मतभेदों को भी दूर कर पाएगी? राजनीतिक प्रेक्षक इस बैठक को 2027 की सियासी जमीन पक्की करने की सधी हुई चाल मान रहे हैं !
5.सियासत में तकरार अपनी जगह, मुसीबत में खाकी बनी मददगार!
जब दिल्ली पुलिस की दरियादिली ने जीता दिल !
विरोध प्रदर्शनों और कानूनी हलचलों के बीच सुप्रीम कोर्ट के अहाते से एक ऐसा नजारा सामने आया जिसने सियासी कड़वाहट के बीच मानवीय संवेदनाओं की मिसाल पेश कर दी. हुआ यूं कि झारखंड से राज्यसभा सांसद महुआ मांझी अदालत परिसर में थीं कि अचानक उनके पैर में जोरदार मोच आ गई और वे दर्द से कराह उठीं. विपक्षी दलों के मंचों से आमतौर पर निशाने पर रहने वाली दिल्ली पुलिस ने यहां गजब की तत्परता दिखाई. महिला कांस्टेबल और मौके पर मौजूद एसीपी ने बिना एक पल गंवाए सांसद को संभाला, सहारा दिया और सुरक्षित तरीके से उनकी गाड़ी तक पहुंचाया. इस अप्रत्याशित आत्मीयता से भावुक होकर सांसद महोदया ने खाकी की दिल खोलकर तारीफ की. सचमुच वर्दी का यह चेहरा बताता है कि फर्ज और मानवीयता किसी राजनीतिक खेमेबंदी की मोहताज नहीं होती. अलबत्ता सियासी मोर्चों पर पुलिसिया कार्रवाइयों की जो भी नुक्ताचीनी हो, लेकिन संकट के वक्त पुलिस का यह कदम तालियों का हकदार बन गया. राजनीतिक प्रेक्षक भी मान रहे हैं कि जब सियासत किनारे हटती है, तो खाकी का मानवीय चेहरा ही सबसे बड़ा असर छोड़ जाता है !
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