Psychology Facts: पहले ऑनलाइन खरीदते हैं, फिर कर देते हैं रिटर्न, आखिर ऐसे लोगों के दिमाग में चलता क्या है? – AajTak

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PSYCHOLOGICAL FACTS: ऑनलाइन शॉपिंग करते समय आपने भी कभी न कभी ऐसा किया होगा. कोई ड्रेस पसंद आई, तुरंत ऑर्डर कर दी, लेकिन डिलीवरी के बाद उसे देखकर लगा कि यह वैसी नहीं है जैसी तस्वीर में दिख रही थी. कभी रंग पसंद नहीं आता, कभी फिटिंग सही नहीं बैठती और कभी लगता है कि इस सामान की जरूरत ही नहीं थी. ऐसे में आप उसे रिटर्न कर देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि कुछ लोग लगभग हर दूसरी ऑनलाइन खरीदारी के बाद सामान वापास लौटा देते हैं. वे कपड़े, जूते, बैग और दूसरी चीजें ऑर्डर करते हैं, लेकिन सामान घर पहुंचने के बाद उसे वापस भेज देते हैं. आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या ये लोग बहुत ज्यादा पसंद-नापसंद करने वाले होते हैं, जल्दी फैसले लेते हैं या खरीदारी करने के बाद उनका मन बदल जाता है?
मनोविज्ञान और ग्राहकों के खरीदारी व्यवहार पर हुई रिसर्च बताती है कि इसके पीछे एक नहीं, बल्कि कई वजहें हो सकती हैं. अचानक खरीदारी करने की आदत से लेकर उम्मीद के मुताबिक सामान न मिलने तक, कई चीजें किसी व्यक्ति के फैसले को प्रभावित करती हैं. हालांकि, सिर्फ सामान रिटर्न करने की आदत से किसी व्यक्ति के पूरे स्वभाव का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता.
1. बिना ज्यादा सोचे खरीदारी करने वाले लोग
कुछ लोग ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान ज्यादा सोच-विचार नहीं करते. उन्हें कोई ड्रेस, जूता या गैजेट पसंद आता है और वे तुरंत ऑर्डर कर देते हैं. कई बार डिस्काउंट, सेल या आकर्षक तस्वीर देखकर भी खरीदने का मन बन जाता है. ऐसी खरीदारी को इम्पल्स बाइंग यानी अचानक या बिना पहले से योजना बनाए खरीदारी करना कहा जाता है. उस समय सामान खरीदने का उत्साह इतना ज्यादा होता है कि व्यक्ति यह नहीं सोचता कि उसे वास्तव में इसकी जरूरत है या नहीं.
लेकिन सामान घर पहुंचने के बाद जब खरीदारी का उत्साह कम होता है, तो व्यक्ति को अपनी गलती का एहसास हो सकता है. उसे लग सकता है कि उसने जरूरत से ज्यादा पैसे खर्च कर दिए या यह चीज उसके किसी काम की नहीं है. ऐसे में वह सामान रिटर्न करने का फैसला ले सकता है.
2. खरीदारी के बाद पछतावा महसूस करना
क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि कोई सामान खरीदते समय बहुत अच्छा लगा, लेकिन कुछ देर बाद ही लगा कि इसे नहीं खरीदना चाहिए था? मनोविज्ञान में इसे पोस्ट-पर्चेज रिग्रेट यानी खरीदारी के बाद पछतावा महसूस करना कहा जाता है. ऐसा तब हो सकता है, जब व्यक्ति को लगे कि उसने जल्दबाजी में फैसला लिया या उसके पैसे किसी दूसरी चीज पर खर्च होने चाहिए थे. उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति ने ऑनलाइन 2,000 रुपये की ड्रेस खरीद ली.
ऑर्डर करने के बाद उसे दूसरी वेबसाइट पर वैसी ही ड्रेस कम कीमत में दिखाई देती है. अब उसे लगता है कि उसने ज्यादा पैसे खर्च कर दिए. इसी तरह, खरीदारी के बाद उसे महसूस हो सकता है कि ड्रेस की उसे जरूरत ही नहीं थी. ऐसी स्थिति में सामान लौटाना उसे अपना फैसला बदलने का एक आसान तरीका लग सकता है. हालांकि, हर बार रिटर्न करना पछतावे की वजह से ही हो, यह जरूरी नहीं है.
3. तस्वीर और असली सामान में अंतर से परेशान होना
ऑनलाइन शॉपिंग में ग्राहक सामान को छूकर, पहनकर या इस्तेमाल करके नहीं देख सकता. वह तस्वीरों, वीडियो, प्रोडक्ट की जानकारी और दूसरे ग्राहकों के रिव्यू के आधार पर फैसला लेता है. कई बार तस्वीर में दिखने वाला रंग असली सामान से अलग होता है. ड्रेस की फिटिंग सही नहीं बैठती, कपड़े की क्वालिटी उम्मीद से कम निकलती है या कोई इलेक्ट्रॉनिक सामान जरूरत के मुताबिक काम नहीं करता.
ऐसे में सामान लौटाना ग्राहक के लिए स्वाभाविक फैसला हो सकता है. 2024 में जर्नल ऑफ रिटेलिंग एंड कंज्यूमर सर्विसेज (Journal of Retailing and Consumer Services ) में प्रकाशित एक स्टडी में भी ऑनलाइन खरीदे गए सामान को लौटाने की वजहों में गलत फिटिंग, डिलीवरी से जुड़ी समस्याएं, भ्रामक विज्ञापन और खरीदारी के बाद होने वाली निराशा जैसे कारण सामने आए थे. इसलिए हर बार सामान लौटाने वाले व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा नखरे करने वाला कहना सही नहीं होगा. कई बार समस्या ग्राहक के फैसले में नहीं, बल्कि सामान की क्वालिटी या उसके बारे में दी गई जानकारी में होती है.
4. हर चीज को लेकर ज्यादा विकल्प तलाशना
कुछ लोगों को खरीदारी करते समय एक ही चीज के कई विकल्प देखने की आदत होती है. वे एक ड्रेस पसंद करते हैं, फिर दूसरी देखते हैं, उसके बाद तीसरी ड्रेस उन्हें बेहतर लगने लगती है. कई बार वे एक ही तरह के दो या तीन प्रोडक्ट मंगवा लेते हैं, ताकि घर पर देखकर तय कर सकें कि कौन-सा सामान रखना है. कपड़ों की खरीदारी में ऐसा ज्यादा देखने को मिल सकता है, क्योंकि ऑनलाइन तस्वीर और असली फिटिंग में अंतर हो सकता है.
इस तरह के व्यवहार को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि व्यक्ति विकल्पों की तुलना क्यों कर रहा है. हो सकता है कि वह सही सामान चुनना चाहता हो. लेकिन अगर वह हर बार कई चीजें मंगवाकर ज्यादातर वापस भेज देता है, तो खरीदारी का यह तरीका उसके लिए समय और मेहनत दोनों बढ़ा सकता है.
5. पैसे खर्च करने को लेकर दुविधा में रहना
कई लोगों को खरीदारी करते समय सामान पसंद आ जाता है, लेकिन पैसे खर्च करने के बाद वे बार-बार सोचते हैं कि क्या यह चीज इतनी कीमत की थी. इसे समझने के लिए एक उदाहरण लेते हैं. किसी व्यक्ति ने 3,000 रुपये के जूते खरीदे. ऑर्डर करते समय उसे लगा कि जूते अच्छे हैं और कीमत भी ठीक है. लेकिन सामान मिलने के बाद वह सोचने लगा कि इतने पैसों में दूसरे बेहतर जूते मिल सकते थे.
ऐसी स्थिति में व्यक्ति के मन में दो बातें चल सकती हैं. एक तरफ उसे सामान पसंद आता है, दूसरी तरफ वह खर्च को सही साबित करने की कोशिश करता है. अगर उसे लगता है कि खरीदारी सही नहीं थी, तो वह सामान लौटाने का फैसला कर सकता है. हालांकि, ऐसा होना इस बात का प्रमाण नहीं है कि व्यक्ति हमेशा पैसों को लेकर परेशान रहता है. यह किसी खास खरीदारी को लेकर असमंजस भी हो सकता है.
6. डिस्काउंट देखकर जरूरत से ज्यादा खरीद लेना
सेल, कूपन और सीमित समय के ऑफर लोगों को जल्दी खरीदारी करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं. कई बार व्यक्ति सामान इसलिए खरीद लेता है, क्योंकि उसे लगता है कि ऑफर खत्म होने के बाद यही चीज महंगी हो जाएगी. उदाहरण के लिए, किसी वेबसाइट पर लिखा है कि ड्रेस पर 50 प्रतिशत की छूट मिल रही है. व्यक्ति पहले से ड्रेस खरीदने की योजना नहीं बना रहा था, लेकिन ऑफर देखकर ऑर्डर कर देता है.
बाद में जब वह अपने ऑर्डर को देखता है, तो उसे एहसास होता है कि उसने जरूरत के बिना सामान खरीद लिया. ऐसे में वह रिटर्न का विकल्प चुन सकता है. यानी कई बार खरीदारी की वजह सामान की जरूरत नहीं, बल्कि कम कीमत में कुछ हासिल करने का एहसास होता है. लेकिन छूट मिलना और वास्तव में पैसे बचाना दोनों अलग-अलग बातें हैं.
7. क्या बार-बार सामान लौटाने वाले लोग परफेक्शन चाहते हैं?
कुछ लोग सामान खरीदते समय बहुत खास उम्मीदें रखते हैं. वे चाहते हैं कि कपड़े का रंग बिल्कुल वैसा हो जैसा तस्वीर में दिखा था, फिटिंग सही हो और क्वालिटी भी अच्छी हो. जब सामान उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता, तो वे उसे वापस कर देते हैं. ऐसे मामलों में वे शायद बेहतर विकल्प तलाश रहे हों या अपने पैसे का सही इस्तेमाल करना चाहते हों. लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हर बार सामान रिटर्न करने वाला व्यक्ति परफेक्शनिस्ट होता है. किसी व्यक्ति की पसंद, उसकी जरूरत, प्रोडक्ट की जानकारी और सामान की असल क्वालिटी भी उसके फैसले को प्रभावित करती है.
8. क्या बार-बार रिटर्न करने की आदत गलत है?
सिर्फ सामान रिटर्न करने से किसी व्यक्ति को गैर-जिम्मेदार, चिड़चिड़ा या अनिर्णायक कहना सही नहीं होगा. अगर सामान खराब है, गलत आया है या उसकी जानकारी और असलियत में अंतर है, तो उसे लौटाना ग्राहक का जायज फैसला हो सकता है. परेशानी तब हो सकती है, जब कोई व्यक्ति बिना सोचे बार-बार सामान खरीदता है, जरूरत से ज्यादा खर्च करता है और फिर लगातार ऑर्डर रद्द करने या रिटर्न करने में समय लगाता है. इससे उसके बजट, समय और खरीदारी के अनुभव पर असर पड़ सकता है.
आखिर में क्या कहती है साइकोलॉजी?
बार-बार ऑनलाइन सामान खरीदकर रिटर्न करने के पीछे जल्दबाजी में खरीदारी करना, खरीदारी के बाद पछतावा, उम्मीद से अलग प्रोडक्ट मिलना, ज्यादा विकल्प तलाशना और डिस्काउंट का आकर्षण जैसी कई वजहें हो सकती हैं. इसलिए अगली बार जब कोई व्यक्ति बार-बार सामान लौटाता दिखे, तो उसके स्वभाव पर तुरंत फैसला करने के बजाय यह समझना जरूरी है कि वह ऐसा क्यों कर रहा है. क्योंकि सामान लौटाने की आदत अपने आप में किसी की पर्सनैलिटी का पूरा सच नहीं बताती.
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