Quote of the Day: भारतीय संत परंपरा में संत कबीरदास का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है. संत कबीरदास के दोहे के केवल साहित्य का हिस्सा नहीं है, बल्कि इन दोहों के माध्यम से उन्होंने लोगों को जीवन में सही दिशा चुनने का सूत्र दिया है. अगर कबीरदास जी के दोहों का सही अर्थ समझ में आ जाए तो ये दोहे जीवन को सही दिशा दिखाने वाले अनमोल सूत्र से कम नहीं हैं. कबीरदास ने सरल शब्दों में ऐसे गहरे सत्य बताए हैं, जो आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने सदियों पहले थे. उनके दोहे हमें अहंकार छोड़ने, धैर्य अपनाने, सच्चाई के मार्ग पर चलने और जीवन के वास्तविक अर्थ को समझने की प्रेरणा देते हैं. आज हम कबीरदास के 10 ऐसे दोहों के बारे में बता रहे हैं जिनमें सही मायने में जिंदगी का असली ज्ञाप छिपा हुआ है.
1. बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥
सीख: कबीरदास जी के इस दोहे का अर्थ बहुत ही गहरा है. इसमें अर्थ है कि दूसरों की गलतियां खोजने से पहले हमें अपनी कमियों पर ध्यान देना चाहिए. आत्मचिंतन ही आत्मविकास का पहला कदम होता है.
2. धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय।
माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय॥
सीख: जीवन में सफलता पाने के लिए धैर्य जरूरी है. हर काम का अपना समय होता है और समय आने पर कार्य जरूर सफल होता है.
3. काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।
पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगा कब॥
सीख: किसी भी काम को टालना सबसे बड़ी भूल होती है. जो करना है, उसे तुरंत करना चाहिए.
4. पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥
सीख: केवल किताबों का ज्ञान पर्याप्त नहीं होता, बल्कि वही व्यक्ति ज्ञानी होता है जिसने जीवन में प्रेम, करुणा और मानवता को अपनाया है.
5. दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, दुख काहे को होय॥
सीख: कबीरदास जी कहते हैं कि दुख में तो भगवान को सभी याद करते हैं लेकिन सुख में भूल जाते हैं. जबकि ईश्वर को केवल संकट में नहीं, बल्कि सुख के समय भी याद करना चाहिए.
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6. ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होय॥
सीख: मधुर वाणी रिश्तों को मजबूत बनाती है और समाज में सम्मान दिलाती है. मधुर वाणी बोलने वाला खुद भी खुश रहता है और अन्य लोग भी उससे खुश रहते हैं.
7. जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ।
मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ॥
सीख: जो लोग जोखिम उठाते हैं और मेहनत करते हैं, सफलता उन्हीं को मिलती है.
8. निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय।
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय॥
सीख: कबीरदास जी कहते हैं कि आलोचना करने वाले लोगों हमेशा अपने आस-पास रखिए क्योंकि वह हमारी कमियों को उजागर करके हमें बेहतर बनने का अवसर देते हैं.
9. माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोय।
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूंगी तोय॥
सीख: जीवन में कभी अहंकार कभी नहीं करना चाहिए. समय सबको उसकी वास्तविकता दिखा देता है. जिस तरह माटी को कूट रहे कुम्हार को भी एक दिन मिट्टी में ही मिल जाना है.
10. जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहिं।
प्रेम गली अति सांकरी, तामें दो न समाहिं॥
सीख: ईश्वर और प्रेम को पाने के लिए अहंकार का त्याग करना आवश्यक है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.
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रेनू यादव, India.Com हिंदी में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के पद कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में करीब 15 वर्षों के अनुभव के दौरान उन्हें टेक्नोलॉजी, धर्म, लाइफस्टाइल, हेल्थ व अन्य विषयों … और पढ़ें
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