RBI Waiver Saves Shapoorji from Debt : शापूरजी ग्रुप को RBI से मिली बड़ी राहत, महंगे कर्ज से बची कंपनी |… – Newstrack

RBI Waiver Saves Shapoorji from Debt 
RBI Waiver Saves Shapoorji from Debt : भारत की मशहूर कंपनी शापूरजी पलोनजी ग्रुप को हाल ही में एक बड़ी राहत मिली है। कंपनी ने करीब 28,000 करोड़ रुपये का निजी कर्ज लिया था, जिसे अब तक की सबसे बड़ी निजी कर्ज डीलों में से एक माना जा रहा है। इस लोन पर ब्याज दर बढ़ने की आशंका थी, जिससे कंपनी को भारी नुकसान और चुकौती में चूक का खतरा हो सकता था। लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से समय पर मिली एक जरूरी छूट की वजह से यह संकट टल गया और कंपनी को तीन साल की राहत भी मिल गई।
शापूरजी ग्रुप की एक कंपनी है – स्टर्लिंग इनवेस्टमेंट कॉर्पोरेशन। यह एक ऐसी कंपनी है जो बैंक नहीं है, लेकिन कर्ज देने का काम करती है, जिसे NBFC (नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी) कहा जाता है।
RBI ने इस कंपनी को तीन साल की छूट दी है, ताकि वह जरूरी नियमों को पूरा कर सके। इन नियमों में एक यह होता है कि कंपनी के पास एक निश्चित मात्रा में पूंजी यानी नकद पैसा होना जरूरी है। इस नियम को पूरा करने के लिए अब कंपनी को और वक्त मिल गया है।
इस कर्ज सौदे की शर्तों के मुताबिक, शापूरजी की कंपनी को या तो सितंबर के अंत तक RBI से छूट लेनी थी, या फिर 6,000 करोड़ रुपये की नई पूंजी लगानी थी। अगर ऐसा नहीं होता, तो कंपनी को 19.75% की जगह और 2% ज्यादा ब्याज देना पड़ता।
सिर्फ यही नहीं, यदि कर्ज देने वाले निवेशकों में से 50.1% ने एक साथ भुगतान की मांग की होती, तो कंपनी समय पर कर्ज चुकाने में असमर्थ हो सकती थी, जिससे डिफॉल्ट की स्थिति पैदा हो जाती।
इस डील में स्टर्लिंग इनवेस्टमेंट ने टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड में अपनी 9.2% हिस्सेदारी को गिरवी रखा है। इसका मतलब यह है कि अगर वह पैसा नहीं चुका पाते, तो उनके शेयर जब्त किए जा सकते हैं।
इस डील में भारत की मुद्रा में ज़ीरो-कूपन बॉन्ड्स (ऐसे बॉन्ड्स जिन पर बीच में ब्याज नहीं मिलता, बल्कि अंत में एक साथ पैसा दिया जाता है) जारी किए गए थे। इन्हें खरीदने वाले निवेशकों में दुनिया की जानी-मानी कंपनियाँ थीं:
• Ares Management Corp
• Cerberus Capital Management
• Davidson Kempner Capital Management
• Farallon Capital Management
डॉयचे बैंक (Deutsche Bank AG) ने इस पूरे सौदे की योजना बनाई और खुद भी इसमें पैसा लगाया। यह डील मई में पूरी हुई थी।
यदि शापूरजी ग्रुप को समय रहते RBI से यह छूट नहीं मिलती, तो उसे या तो अतिरिक्त ब्याज देना पड़ता या फिर नई पूंजी की व्यवस्था करनी पड़ती। ये दोनों विकल्प कंपनी के लिए आर्थिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण होते। लेकिन नियामक से समय पर मिली यह राहत कंपनी को संभावित बड़े नुकसान से सुरक्षित निकाल ले गई।

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