Sitamarhi News: सीतामढ़ी। जिले में बिजली आपूर्ति को लेकर विभाग भले ही शहरी क्षेत्रों में 21 से 22 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 19 से 20 घंटे बिजली देने का दावा कर रहा हो, लेकिन जिले में जमीनी स्थिति इससे अलग दिखाई है। लोकल फॉल्ट, ओवरलोड ट्रांसफॉर्मर, ट्रिपिंग और वितरण व्यवस्था की खामियों से शहर में औसतन 17 से 18 घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 16 से 17 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। कई ग्रामीण इलाकों में स्थानीय फॉल्ट के बाद 8 से 10 घंटे तक बिजली गुल रहने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं।
बथनाहा, रुन्नीसैदपुर, बाजपट्टी, परिहार, सुरसंड, मेजरगंज और रीगा प्रखंड के दर्जनों उपभोक्ताओं का कहना है कि स्थानीय फॉल्ट होने के बाद घंटों बिजली बहाल नहीं हो पाती। इससे पेयजल, सिंचाई, घरेलू कार्य और छोटे कारोबार प्रभावित होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यही स्थिति कई बार अघोषित कटौती का रूप ले लेती है।
शहर की स्थिति भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। अत्यधिक लोड के कारण दर्जनभर से अधिक मोहल्लों में बार-बार ट्रिपिंग होती है। कई इलाकों में लो वोल्टेज के कारण एसी, कूलर, मोटर और अन्य विद्युत उपकरण सही ढंग से काम नहीं कर पाते। बिजली विभाग के विभिन्न प्रशाखा कार्यालयों से मिली जानकारी के अनुसार केवल शहर में ही दर्जनभर से अधिक ट्रांसफॉर्मर क्षमता से अधिक लोड पर संचालित हो रहे हैं। गर्मी के मौसम में बढ़ी खपत के कारण इन ट्रांसफॉर्मरों पर दबाव और बढ़ जाता है।
बिजली संकट का असर खेती, धान रोपनी, सिंचाई, छोटे उद्योग, वेल्डिंग, आटा चक्की, बाजार और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर भी पड़ रहा है। वहीं अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और विद्यार्थियों की पढ़ाई भी अनियमित बिजली आपूर्ति से प्रभावित हो रही है।
स्थानीय फाल्ट के कारण आती है समस्या : विद्युत आपूर्ति प्रमंडल, सीतामढ़ी के कार्यपालक अभियंता समीर कुमार ने बताया कि रोस्टर के अनुसार शहरी क्षेत्रों में 21 से 22 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि स्थानीय फॉल्ट के कारण कुछ स्थानों पर बाधा आती है, लेकिन उसे जल्द दूर करने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने बताया कि जिले में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2024 में अधिकतम खपत करीब 200 मेगावाट थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 210-213 मेगावाट और वर्ष 2026 में लगभग 225 मेगावाट तक पहुंच गई है। यानी तीन वर्षों में जिले की बिजली मांग करीब 25 मेगावाट बढ़ी है।
उन्होंने बताया कि पुराने जर्जर तारों को बदलने के लिए नई परियोजना जल्द शुरू होगी। पूर्व की योजना पूरी हो चुकी है। जिले में वर्तमान में 26 पावर सब-स्टेशन कार्यरत हैं तथा बिजली की आपूर्ति सिमरा, सुरसंड, रुन्नीसैदपुर, बेलसंड और ढाका ग्रिड से की जाती है। वहीं रुन्नीसैदपुर, गाढ़ा-पितौंझिया, मेजरगंज, भादियांन और बाजपट्टी में नए पावर सब-स्टेशन का निर्माण चल रहा है।
विभाग के अनुसार शहरी क्षेत्र में खराब ट्रांसफॉर्मर 24 घंटे के भीतर तथा ग्रामीण क्षेत्रों में दो से तीन दिनों के भीतर बदलने का लक्ष्य निर्धारित है।अभियंता एवं विशेषज्ञ का मानना है कि बढ़ती बिजली मांग के अनुरूप वितरण नेटवर्क, ट्रांसफॉर्मर क्षमता और फीडरों का समय पर विस्तार नहीं होने से समस्या बनी हुई है। नई परियोजनाएं पूरी होने और ओवरलोड ट्रांसफॉर्मरों के अपग्रेडेशन के बाद ही जिले में निर्बाध एव गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति की स्थिति बेहतर हो सकेगी।
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