सरकारी बैंकों की जबरदस्त तिमाह
सितंबर तिमाही (Q2 FY26) में Canara Bank और Union Bank of India दोनों ने उम्मीद से बेहतर नतीजे दिए हैं. दोनों बैंकों का मुनाफा बढ़ा है और एसेट क्वालिटी में सुधार देखने को मिला है.
Canara Bank का मुनाफा उछला:
बैंक का नेट प्रॉफिट ₹4,014 करोड़ से बढ़कर ₹4,773 करोड़ हो गया — यानी करीब 19% की बढ़त. ये मजबूत लोन ग्रोथ और बेहतर वसूली की वजह से हुआ.
लेकिन NII में हल्की गिरावट:
Canara Bank की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) ₹9,315 करोड़ से घटकर ₹9,141 करोड़ रही. यानी मार्जिन पर थोड़ा दबाव बना हुआ है.
NPA घटने से एसेट क्वालिटी बेहतर:
बैंक का ग्रॉस NPA 2.69% से घटकर 2.35% और नेट NPA 0.63% से घटकर 0.54% हो गया — मतलब बैंक की वसूली प्रणाली और लोन क्वालिटी में सुधार हुआ है.
Union Bank ने उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया:
Union Bank का नेट प्रॉफिट ₹4,249 करोड़ रहा, जबकि मार्केट का अनुमान ₹3,528 करोड़ था — यानी लगभग 20% ज्यादा. बैंक की NII ₹8,812 करोड़ रही, जो उम्मीद से बेहतर है.
Union Bank की एसेट क्वालिटी भी मजबूत:
बैंक का ग्रॉस NPA 3.52% से घटकर 3.29% और नेट NPA 0.62% से घटकर 0.55% रह गया — यानी कर्ज वसूली और बैलेंस शीट दोनों में सुधार.
PSU बैंकों की वापसी पटरी पर:
दोनों बैंकों के शानदार नतीजों से साफ है कि सरकारी बैंकिंग सेक्टर में रिकवरी मजबूत हो रही है. ब्याज दरों की स्थिरता और बढ़ती लोन डिमांड आने वाले महीनों में ग्रोथ को और रफ्तार दे सकती है.
शेयर में बड़ी गिरावट
सुप्रीम कोर्ट के AGR बकाया पर लिखित आदेश आने के बाद Vodafone Idea का शेयर 12% तक फिसल गया और ₹8.21 तक गिरा.
दूसरे टेलिकॉम शेयर भी गिरे
इंडस टावर्स 3% नीचे, भारती एयरटेल 1.5% और भारती हेक्साकॉम 3% गिरकर ₹1,861 पर आ गए.
सुप्रीम कोर्ट का आदेश क्या कहता है
कोर्ट ने कहा कि AGR बकाया पर राहत सिर्फ Vodafone Idea के लिए है और वो भी FY2016-17 तक की अवधि तक सीमित रहेगी.
सरकार की प्रतिक्रिया
दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा — “आदेश का अध्ययन करेंगे, फिलहाल कोई त्वरित निर्णय नहीं होगा.” यानी राहत के लिए अभी इंतजार करना होगा.
निवेशकों की चिंता
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह आदेश भावनात्मक राहत देता है, लेकिन वित्तीय राहत नहीं. सरकार के ठोस कदम के बिना शेयर में तेजी की उम्मीद कम है.
शेयर का हाल
27 अक्टूबर को यह ₹10.57 तक गया था, पर तीन दिन में ₹8.21 तक गिर गया — यानी 20% से ज्यादा का नुकसान.
आगे का रास्ता
अगर सरकार FY2016-17 तक के बकाये पर राहत देती है तो शेयर में शॉर्ट-टर्म उछाल आ सकता है.
लेकिन कर्ज और कैश फ्लो की मुश्किलें अभी बरकरार हैं — इसलिए निवेशकों को वेट-एंड-वॉच रणनीति अपनानी चाहिए.
सेंसेक्स पर दबाव
आज Sensex के 30 में से 28 शेयरों में बिकवाली देखने को मिली.
लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में रहे.
बैंकिंग शेयर कमजोर
Bank Nifty के 12 में से 9 शेयर गिरे,
यानी बैंकिंग स्टॉक्स में भी सेलिंग का दबाव जारी रहा.
निफ्टी पर भारी दबाव
Nifty के 50 में से 44 शेयरों में गिरावट,
जिससे इंडेक्स पर चौतरफा बिकवाली का असर दिखा.
निफ्टी इंट्राडे में टूटा
दिन के दौरान Nifty 25,900 के नीचे फिसल गया,
यानी शॉर्ट टर्म सपोर्ट लेवल टूटा.
सेक्टरवाइज तस्वीर
आईटी, बैंकिंग, मेटल और एनर्जी स्टॉक्स में
सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई.
विदेशी निवेशक सतर्क
FII की लगातार बिकवाली और ग्लोबल अनिश्चितता
से घरेलू निवेशकों का सेंटीमेंट कमजोर पड़ा.
एक्सपर्ट व्यू
एनालिस्ट मानते हैं — जब तक निफ्टी 26,000 के ऊपर नहीं टिकता,
तब तक बाजार में कमजोरी का रुझान बना रह सकता है.
देश के बिजली बाजार से जुड़ा बड़ा केस फिर सुर्खियों में है. Indian Energy Exchange (IEX) की याचिका पर Electricity Appellate Tribunal (APTEL) में अब 30 अक्टूबर को सुनवाई होगी. यह मामला “मार्केट कपलिंग” से जुड़ा है — यानी सरकार चाहती है कि सभी बिजली एक्सचेंज एक ही सिस्टम से जुड़ें और पूरे देश में बिजली की कीमत एक समान तय हो. लेकिन IEX का कहना है कि यह व्यवस्था प्रतिस्पर्धा खत्म कर देगी और बाजार में एकाधिकार बढ़ा देगी.
केस का ताजा अपडेट
13 अक्टूबर की पिछली सुनवाई में APTEL ने IEX को कहा था कि वह अपनी याचिका संशोधित कर सभी जरूरी पक्षों को शामिल करे.अब IEX ने नई याचिका दाखिल की है, जिसमें Grid Corporation of India, Power Exchange, और Hindustan Power Exchange (HPX) को भी पार्टी बनाया गया है.
ट्रिब्यूनल ने अब इन सभी पक्षों से कहा है कि वे IEX की याचिका पर लिखित जवाब दाखिल करें ताकि अगली सुनवाई में बहस शुरू की जा सके.
क्या है “मार्केट कपलिंग”?
मार्केट कपलिंग का मतलब है कि देश के सभी बिजली एक्सचेंजों को एक केंद्रीय प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाए.
उसी प्लेटफॉर्म से बिजली की एक समान कीमत तय होगी.
सरकार और CERC (Central Electricity Regulatory Commission) का तर्क है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और कीमतों में स्थिरता आएगी.
लेकिन IEX का कहना है कि इससे बिजली एक्सचेंजों के बीच प्रतिस्पर्धा खत्म होगी, जिससे उपभोक्ताओं को नुकसान होगा.
IEX की आपत्ति क्या है?
IEX का मानना है कि अगर “मार्केट कपलिंग” लागू हुई, तो बिजली की खरीद-बिक्री का नियंत्रण एक ही प्लेटफॉर्म पर चला जाएगा.
यह सिस्टम निजी कंपनियों की भूमिका सीमित कर देगा और बिजली की कीमत तय करने की प्रक्रिया पर सरकारी दबाव बढ़ेगा.
IEX का तर्क है कि फ्री मार्केट मैकेनिज़्म से ही सही दाम तय होते हैं, न कि केंद्रीकृत नियंत्रण से.
30 अक्टूबर की सुनवाई में क्या होगा?
APTEL यह देखेगा कि IEX ने नई याचिका में क्या संशोधन किए हैं और बाकी पक्षों का जवाब क्या है.
अगर सभी पक्ष तैयार हुए, तो ट्रिब्यूनल अगली सुनवाई में अंतिम बहस (Final Argument) की तारीख तय कर सकता है.
क्यों अहम है यह केस?
भारत का बिजली बाजार करीब ₹18 लाख करोड़ रुपये का है.
IEX इस बाजार में सबसे बड़ी ट्रेडिंग कंपनी है और इसका मार्केट शेयर 90% से ज्यादा है.
अगर मार्केट कपलिंग लागू हुई, तो निजी बिजली एक्सचेंजों की स्वतंत्रता और राजस्व दोनों प्रभावित हो सकते हैं.
इसलिए यह मामला सिर्फ IEX बनाम सरकार नहीं, बल्कि पूरे बिजली बाजार की संरचना और भविष्य से जुड़ा हुआ है.
सुप्रीम कोर्ट ने Vodafone Idea Ltd को बड़ी लेकिन सीमित राहत देते हुए सरकार को AGR (Adjusted Gross Revenue) देनदारी के मामले में दोबारा विचार करने की अनुमति दी है. कोर्ट ने साफ किया कि यह आदेश केवल Vodafone Idea पर लागू होगा और सिर्फ FY2016-17 तक के अतिरिक्त AGR डिमांड के लिए मान्य रहेगा. यह निर्णय कंपनी की “विशिष्ट परिस्थितियों” और सरकार की 49% हिस्सेदारी को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जो कंपनी के पुनरुद्धार के लिए अहम कदम माना जा रहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने AGR विवाद पर ऐतिहासिक लेकिन सीमित दायरे वाला फैसला सुनाया है, जिससे Vodafone Idea Ltd को आंशिक राहत मिल सकती है. कोर्ट ने सरकार को अनुमति दी है कि वह कंपनी के अतिरिक्त AGR बकाये (FY2016-17 तक) पर फिर से विचार कर सकती है.
चीफ जस्टिस बी. आर. गवई की अगुवाई वाली बेंच ने 27 अक्टूबर को अपने आदेश में कहा —“यह आदेश केवल याचिकाकर्ता Vodafone Idea Ltd के संदर्भ में दिया जा रहा है, और यह FY2016-17 तक की अतिरिक्त AGR मांग तक सीमित है.”कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अनुमति “मामले की विशिष्ट परिस्थितियों” और “भारत सरकार की 49% हिस्सेदारी” को देखते हुए दी गई है.
क्या कहा गया आदेश में
Moneycontrol द्वारा देखी गई आदेश की कॉपी के अनुसार,“याचिका में खुद यह कहा गया है कि राहत केवल FY2016-17 तक की अतिरिक्त AGR मांग तक सीमित है.”इसका मतलब है कि 2017 के बाद की AGR देनदारी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.यानी सरकार केवल इस तय अवधि तक की मांग पर पुनर्विचार कर सकती है.
सरकार की प्रतिक्रिया
टेलीकॉम मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि सरकार आदेश का विस्तार से अध्ययन करेगी —“हमें आदेश को समझने और उसके प्रभावों का विश्लेषण करने की जरूरत है. Vodafone Idea को राहत के लिए औपचारिक आवेदन करना होगा.”
सरकारी सूत्रों के मुताबिक,
सरकार किसी भी राहत का फैसला विस्तृत आदेश की समीक्षा के बाद ही लेगी.DoT (Department of Telecommunications) को अभी कोर्ट का पूरा लिखित आदेश मिलना बाकी है.किसी भी नीति निर्णय से पहले Vodafone Idea को यह बताना होगा कि वह किस प्रकार की राहत चाहती है.
Vodafone Idea के लिए क्यों अहम है यह फैसलाकंपनी पर पहले से हजारों करोड़ रुपये के AGR बकाये हैं.सरकार की 49% हिस्सेदारी और करीब 20 करोड़ ग्राहकों के कारण यह मामला सार्वजनिक हित से जुड़ा माना गया है.सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार चाहे तो इस मुद्दे पर कानून के दायरे में पुनर्विचार कर सकती है और इसमें कोई बाधा नहीं है.इस आदेश ने कंपनी को भले सीधी राहत नहीं दी, लेकिन सरकारी समीक्षा का दरवाज़ा खोल दिया है, जिससे Vodafone Idea के वित्तीय पुनर्गठन की संभावना बढ़ी है.
Vodafone Idea ने कोर्ट में याचिका दायर कर DoT की अतिरिक्त AGR डिमांड को रद्द करने और Deduction Verification Guidelines (फरवरी 2020) के तहत बकाये का पुनर्गणना करने की मांग की थी.सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि सरकार बदलती परिस्थितियों — विशेषकर अपनी हिस्सेदारी और पब्लिक इंटरेस्ट — को देखते हुए AGR देनदारी पर पुनर्विचार के लिए तैयार है.
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश ने Vodafone Idea के लिए राहत की नई खिड़की खोली है, लेकिन दायरा सीमित है — सिर्फ FY2016-17 तक की AGR मांग तक.सरकार अब इस पर पुनर्विचार कर सकती है, जो कंपनी के लिए एक संभावित पुनर्जीवन संकेत है.यदि सरकार कोई राहत देती है, तो यह टेलीकॉम सेक्टर के पूरे परिदृश्य को प्रभावित कर सकती है.
ज्वेलरी और फैशन एक्सेसरीज़ कंपनी Vaibhav Global Ltd (VGL) ने सितंबर तिमाही (Q2FY26) के शानदार नतीजे जारी किए हैं. कंपनी का कंसोलिडेटेड मुनाफा साल-दर-साल 71% बढ़कर ₹47.5 करोड़ हो गया, जबकि रेवेन्यू और EBITDA दोनों उम्मीद से बेहतर रहे. मजबूत डिमांड और ऑपरेटिंग एफिशिएंसी की वजह से कंपनी का मार्जिन भी सुधरा है. आइए आसान भाषा में समझते हैं Vaibhav Global के तिमाही नतीजों की झलक.
मुनाफा (Net Profit):
कंपनी का कंसोलिडेटेड मुनाफा ₹27.8 करोड़ से बढ़कर ₹47.5 करोड़ हो गया — यानी 71% की जबरदस्त बढ़त.
राजस्व (Revenue):
इस तिमाही में रेवेन्यू ₹796 करोड़ से बढ़कर ₹877 करोड़ पहुंचा, यानी करीब 10% की ग्रोथ.
EBITDA में जोरदार सुधार:
ऑपरेटिंग लेवल पर कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा —
EBITDA ₹60.2 करोड़ से बढ़कर ₹77.6 करोड़, यानी 29% की बढ़त.
EBITDA मार्जिन:
7.55% से बढ़कर 8.84% हुआ — यह बताता है कि कंपनी की कॉस्ट कंट्रोल और प्रोडक्ट मिक्स बेहतर रहा.
बिजनेस परफॉर्मेंस:
कंपनी ने कहा कि उसके ग्लोबल प्लेटफॉर्म (टीवी, ऑनलाइन और मोबाइल शॉपिंग) पर ऑर्डर वॉल्यूम और औसत टिकट साइज दोनों बढ़े हैं.
अंतरराष्ट्रीय डिमांड:
अमेरिका और यूरोप जैसे मुख्य बाजारों में कंज्यूमर स्पेंडिंग में सुधार से कंपनी को फायदा मिला.
आउटलुक:
Vaibhav Global का फोकस अब प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ाने और डिजिटली चैनलों में निवेश पर है. प्रबंधन को उम्मीद है कि आने वाले क्वार्टर्स में यह ग्रोथ ट्रेंड जारी रहेगा.
BHEL (Morgan Stanley)
रेटिंग: Overweight | टारगेट: ₹258
कंपनी का रेवेन्यू और EBITDA उम्मीद से बेहतर रहा.
पावर बिजनेस में 13% और इंडस्ट्री सेगमेंट में 18% सालाना बढ़त.
मार्जिन भी मजबूत रहे — पावर 10.5%, इंडस्ट्री 15.3%.
PB Fintech (Policybazaar)
MS की राय: Underweight | टारगेट: ₹1,370 – GST असर पर क्लैरिटी का इंतजार.
Jefferies की राय: Buy | टारगेट: ₹2,100 – Q2 नतीजे बेहतर, मैनेजमेंट कमीशन कट को लेकर निश्चिंत.
यानी, एक फर्म ने सावधानी, दूसरी ने तेजी की राय दी है.
Dr. Reddy’s Labs
Nomura: Buy | टारगेट घटाकर: ₹1,580 – कनाडा से Non-Compliance नोटिस, EPS 3–6% घटाया.
MS: Equal-weight | टारगेट: ₹1,389 – कनाडा में gSemaglutide की सफलता FY27 के लिए अहम.
कुल मिलाकर शेयर पर मीडियम-टर्म सावधानी, लेकिन वैल्यूएशन आकर्षक.
HPCL (Hindustan Petroleum)
MS: Overweight | टारगेट: ₹533 – कोर मुनाफा और वॉल्यूम्स अनुमान से बेहतर, नेट डेट स्थिर.
Nomura: Buy | टारगेट: ₹510 – मजबूत GRM से Q2 बीट, पर LPG में ₹1,200 करोड़ की अंडर-रिकवरी.
दोनों ब्रोकरेज हाउस ने बाय कॉल दी है.
L&T (Nuvama Securities)
रेटिंग: Buy | टारगेट: ₹4,680
कोर रेवेन्यू 10% बढ़ा, ऑर्डर इनफ्लो 54% उछला.
FY26 में 15% रेवेन्यू और 8.5% मार्जिन गाइडेंस बरकरार.
एनालिस्ट मानते हैं कि L&T की ग्रोथ 10% लक्ष्य से ऊपर जाएगी.
CG Power, Apar Industries और MGL (Nomura)
CG Power: Buy | ₹800 – ऑर्डर बुक मजबूत, EPS CAGR FY25–28 में 33%.
Apar Industries: Buy | ₹10,200 – एक्सपोर्ट्स और प्रीमियम कंडक्टर बिजनेस ने EBITDA 15% बढ़ाया.
MGL: Buy | ₹1,580 – गैस कॉस्ट बढ़ने से दबाव, लेकिन वॉल्यूम और ग्रोथ मजबूत.
LIC Housing Finance
MS: Underweight | ₹510 – NIM घटा, PAT अनुमान से 2% कम.
Jefferies: Buy | ₹635 – खर्च घटने से नतीजे इनलाइन, क्रेडिट कॉस्ट थोड़ी बढ़ी.
यानी, ब्रोकरेज के बीच राय बंटी हुई है — एक सावधानी, एक भरोसा.
कुल मिलाकर:ब्रोकरेज हाउस इस हफ्ते इंफ्रा, एनर्जी और इंडस्ट्रियल स्टॉक्स पर बुलिश हैं —L&T, HPCL, Apar और CG Power पर तेजी की राय,जबकि PB Fintech और LIC Housing पर मिला-जुला रुख.
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर ब्याज दरें 3.75%–4% के दायरे में ला दी हैं. यह फैसला उम्मीद के मुताबिक था, लेकिन चेयर जेरोम पॉवेल के बयान ने बाजार को हिला दिया — उन्होंने साफ कहा कि दिसंबर में एक और रेट कट “फोरगॉन कंक्लूजन नहीं है, बिल्कुल नहीं!” यानी आगे की राहत पर अब सवालिया निशान. इस बीच, Nvidia ने $5 ट्रिलियन मार्केट कैप छूकर इतिहास रचा, जबकि ट्रंप-शी बैठक से पहले ग्लोबल मार्केट्स में घबराहट दिखी.
अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) ने बुधवार को उम्मीद के मुताबिक 25 बेसिस प्वाइंट रेट कट किया, जिससे फेडरल फंड रेट अब 3.75% से 4% के बीच आ गया है.निर्णय 10-2 वोटों से पास हुआ, लेकिन दो गवर्नर्स — स्टेफन मिरन (जिन्होंने 50 bps कट की मांग की) और जेफरी श्मिड (जिन्होंने स्टेटस को वोट दिया) — असहमत रहे.
फेड ने साथ ही एलान किया कि क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) प्रक्रिया 1 दिसंबर से समाप्त कर दी जाएगी.
पॉवेल का बड़ा बयान — “दिसंबर कट तय नहीं” फेड चेयर जेरोम पॉवेल ने साफ कहा,“दिसंबर में एक और रेट कट फोरगॉन कंक्लूजन नहीं है, बिल्कुल नहीं.”उन्होंने बताया कि 19 फेड अधिकारियों में से कई अब अगला कदम उठाने से पहले एक पूरा चक्र इंतजार करने के पक्ष में हैं.
इसके बाद CME FedWatch पर दिसंबर रेट कट की संभावना 90% से गिरकर 67% रह गई.
फेड के बयान के मुताबिक —अमेरिकी आर्थिक गतिविधि “मॉडरेट पेस” पर बढ़ रही है,जॉब ग्रोथ धीमी पड़ी है,बेरोजगारी दर थोड़ी बढ़ी है लेकिन अब भी निचले स्तर पर है,और महंगाई पहले से ऊपर बनी हुई है.
मार्केट रिएक्शन: राहत की जगह निराशा
फेड के बयान के बाद Dow Jones दिन के ऊपरी स्तर से 400 अंक फिसलकर लाल निशान में बंद हुआ.
Dow ने इंट्राडे में 48,000 का स्तर छुआ, लेकिन दिन खत्म होते-होते 0.2% गिरकर 47,632 पर आ गया.
S&P 500 भी 30 अंक फिसला, जबकि Nasdaq Nvidia की रैली के दम पर 0.55% चढ़कर 23,958.47 के नए रिकॉर्ड पर बंद हुआ.
सोने की कीमतें $4,000 के नीचे फिसलीं, जबकि डॉलर इंडेक्स 99 के ऊपर और 10-Year Yield 4% पार पहुंच गया.
Nvidia बनी $5 ट्रिलियन कंपनी
फेड की खबरों के बीच Nvidia ने एक और इतिहास रचा.कंपनी का मार्केट कैप अब $5 ट्रिलियन को पार कर गया — और इस साल S&P 500 की बढ़त का 20% सिर्फ Nvidia की वजह से है.सिर्फ तीन महीनों में कंपनी ने $1 ट्रिलियन जोड़ा जुलाई में $4 ट्रिलियन से अक्टूबर में $5 ट्रिलियन.अब Nvidia दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी “इकॉनमी” मानी जा रही है अमेरिका और चीन के बाद.
बिग टेक के तगड़े नतीजे
Meta: रेवेन्यू $51.24B बनाम $49.4B अनुमान, EPS $7.25 बनाम $6.69; लेकिन स्टॉक 8% गिरा.
Microsoft: रेवेन्यू $77.67B, EPS $4.13; Azure बिजनेस 40% बढ़ा, फिर भी शेयर 4% नीचे.
Alphabet: रेवेन्यू $102.35B, EPS $3.1; स्टॉक 6% उछला.
कंपनी ने 2026 में कैपेक्स $85B तक बढ़ाने का एलान किया.
सारी नजरें अब ट्रंप-शी बैठक पर
दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के प्रमुख — डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग — गुरुवार शाम 6:30 बजे (IST) बुसान में मिल रहे हैं.ट्रंप ने कहा है कि वे फेंटानिल से जुड़े चीनी आयातों पर कुछ टैरिफ घटाने पर विचार कर रहे हैं.हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि बैठक से “अस्पष्ट और सीमित नतीजे” ही निकलेंगे.
आज की नजर
आज रात बाजार की नजर Apple, Amazon, Eli Lilly, Mastercard, Shell और Merck के नतीजों पर रहेगी.
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