पश्चिम बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में सियासा भूचाल आ गया है। ममता बनर्जी के बागी सांसदों ने बड़ा विद्रोह करते हुए त्रिपुरा की क्षेत्रीय पार्टी नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर लिया है। इस घटनाक्रम से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है और सवाल उठने लगे हैं कि आखिर यह एनसीपीआई क्या है और उत्तर-पूर्व में इसकी क्या भूमिका है? आइये हम आपको विस्तार से बताते हैं।
नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) त्रिपुरा की एक छोटी लेकिन चुनाव आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टी है। इसका मुख्य वोट बैंक बंगाली समुदाय है। पार्टी उत्तर-पूर्वी राज्यों में बंगाली भाषी नागरिकों के हितों का प्रतिनिधित्व करती है और त्रिपुरा विधानसभा चुनावों में भी उतर चुकी है।
बताया जा रहा है कि एनसीपीआई अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा बनकर काम करेगी और केंद्र में एनडीए सरकार को पूर्ण समर्थन देगी। टीएमसी सांसदों के विलय के बाद पार्टी को त्रिपुरा के अलावा पश्चिम बंगाल और असम सहित आसपास के राज्यों में मजबूती मिलने की उम्मीद है। पार्टी का प्रमुख फोकस इन तीन राज्यों में बंगाली समुदाय के मुद्दों पर रहेगा।
एनसीपीआई में विलय के बाद बागी गुट की प्रमुख नेता और लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात के बाद कहा कि हमारे पास दो-तिहाई सांसद है। हम संसद में अलग से बैठेंगे और प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाले एनडीए का हिस्सा बनकर काम करेंगे।
वहीं, टीएमसी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय, जिन्हें ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है, ने भी इस गुट में शामिल होने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि हम नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी में विलय कर रहे हैं, जो एक क्षेत्रीय पार्टी है। यहां आपको बता दें कि लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं। बताया जा रहा है कि कम से कम 19 सांसदों ने टीएमसी से विद्रोह कर NCPI में शामिल हो गए हैं।
टीएमसी के वरिष्ठ नेता मदन मित्रा ने बागी गुट पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने तृणमूल के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा, ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी को मजबूत करने का वादा किया था, लेकिन अब मुकर गए। यह साफ धोखा है। मित्रा ने आगे कहा कि दो-तिहाई बहुमत होने के बावजूद अलग पार्टी बनाने या मान्यता पाने के लिए कई कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। यह तो बस शुरुआत है।
इससे पहले आज टीएमसी सांसद सागरिका घोष और कीर्ति आजाद ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर पार्टी के दूसरे नंबर नेता अभिषेक बनर्जी का पत्र सौंपा। पत्र में बागी गुट को अलग मान्यता न देने की अपील की गई है। पत्र में लिखा है कि लोकसभा में विधायी दल का अस्तित्व राजनीतिक दल से जुड़ा होता है। कोई भी सदस्य या गुट अपनी मर्जी से समानांतर गुट बनाकर स्वतंत्र मान्यता का दावा नहीं कर सकता। अदालत के फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया कि कानून राजनीतिक दल के अंदर प्रतिस्पर्धी गुटों को स्वीकार नहीं करता और ऐसे मामलों में अयोग्यता की कार्रवाई हो सकती है।
देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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