अमेरिकी सरकार आव्रजन नियमों को सख्त बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. एच-1बी वीज़ा प्रोग्राम, रोज़गार-आधारित ग्रीन कार्ड और विदेशी छात्रों के वीज़ा पर नए प्रस्तावित और कुछ लागू बदलाव आ रहे हैं. ये बदलाव मुख्य रूप से अमेरिकी कामगारों की सुरक्षा, वेतन समानता और प्रोग्राम की विश्वसनीयता बढ़ाने के उद्देश्य से हैं. भारतीय पेशेवर सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे क्योंकि वे एच-1बी वीज़ा के सबसे बड़े यूज़र हैं और ग्रीन कार्ड बैकलॉग में उनकी हिस्सेदारी सबसे अधिक है.कई बदलाव अभी प्रस्तावित चरण में हैं और पूरी तरह लागू नहीं हुए हैं.
अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (डीएचएस) एच-1बी नॉन-इमिग्रेंट वीज़ा प्रोग्राम को रिफॉर्म करने का प्रस्ताव तैयार कर रहा है (आरआईएन 1615-एडी00). इसमें कैप छूट (कैप एग्जेम्प्शन्स) की योग्यता में बदलाव, पहले उल्लंघन करने वाले नियोक्ताओं की ज़्यादा जांच, थर्ड-पार्टी वर्कसाइट प्लेसमेंट पर सख्त निगरानी और अमेरिकी कर्मचारियों की सुरक्षा के उपाय शामिल हैं. यह प्रस्तावित नियम अभी शुरुआती चरण में है और इसका मकसद प्रोग्राम की इंटीग्रिटी बढ़ाना है. डीएचएस के अनुसार, ये बदलाव अमेरिकी कामगारों के वेतन और काम की स्थितियों की बेहतर सुरक्षा करेंगे. यूएससीआईएस ने पहले ही कुछ सुधार लागू किए हैं, जैसे लाभार्थी-केंद्रित रजिस्ट्रेशन सिस्टम, जो वित्तीय वर्ष 2027 एच-1बी कैप के लिए इस्तेमाल हो रहा है. इसमें एक लाभार्थी को कई रजिस्ट्रेशन्स से फायदा नहीं मिलता. इसके अलावा, वेटेड सिलेक्शन प्रोसेस लागू हुआ है, जो हायर वेज और हायर स्किल्ड उम्मीदवारों को प्राथमिकता देता है. यह नियम फरवरी 2026 से प्रभावी है.
अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ लेबर (डीओएल) ने मार्च 2026 में एच-1बी, एच-1बी1, ई-3 और पीईआरएम (रोज़गार-आधारित ग्रीन कार्ड) प्रोग्राम्स के लिए प्रिवेलिंग वेज मेथडोलॉजी में बदलाव का प्रस्ताव जारी किया. नया तरीका ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स (बीएलएस) के ओईडब्ल्यूएस सर्वे के अपडेटेड प्रतिशतकों पर आधारित होगा.
यह बदलाव अगर लागू हुआ तो एच-1बी स्पॉन्सर करने वाले नियोक्ताओं और पीईआरएम फाइल करने वालों पर असर पड़ेगा. डीओएल का कहना है कि इससे विदेशी कामगारों को अमेरिकी कामगारों के बराबर वेतन मिलेगा और विस्थापन कम होगा.
पीईआरएम लेबर सर्टिफिकेशन प्रिवेलिंग वेज बदलाव से सीधे प्रभावित होगा, जो ईबी-2/ईबी-3 ग्रीन कार्ड का महत्वपूर्ण स्टेप है. भारतीय आवेदक पहले से ही भारी बैकलॉग का सामना कर रहे हैं. यूएससीआईएस डेटा के अनुसार, रोज़गार-आधारित श्रेणियों में 10 लाख से ज़्यादा भारतीय इंतज़ार कर रहे हैं, जिसमें डिपेंडेंट्स शामिल हैं. कुछ अनुमानों में वेट टाइम दशकों का है. नए वेज नियमों से स्पॉन्सरशिप महंगी हो सकती है, जिससे कंपनियां कम एच-1बी-टू-ग्रीन कार्ड पाथवे ऑफर करें.
डीएचएस रेगुलेटरी एजेंडा में एफ-1 स्टूडेंट्स के प्रैक्टिकल ट्रेनिंग प्रोग्राम्स (ओपीटी, स्टेम ओपीटी, सीपीटी) पर सुधार या प्रतिबंधों का प्रस्ताव है. कुछ रिपोर्ट्स में ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस (डी/एस) को फिक्स्ड एंड डेट्स से बदलने और ग्रेस पीरियड्स छोटे करने की चर्चा है. एच-1बी से जुड़े कैप-गैप एक्सटेंशन्स में पहले ही कुछ बदलाव हो चुके हैं. भारतीय छात्र अमेरिका में सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय छात्र समूह में शामिल हैं, इसलिए ओपीटी-टू-एच-1बी पाथवे पर सख्ती का उन पर बड़ा असर पड़ेगा.
एच-1बी में दबदबा: वित्तीय वर्ष 2022-23 में एच-1बी वीज़ा का लगभग 70 प्रतिशत भारतीयों को मिला. वे स्पेशलिटी ऑक्यूपेशन्स (आईटी, इंजीनियरिंग) में सबसे ज्यादा हैं.
ग्रीन कार्ड बैकलॉग: प्रति-देश सीमा (7 प्रतिशत) के कारण भारतीयों का इंतज़ार सबसे लंबा. बैकलॉग 10 लाख से ज़्यादा है.
थर्ड-पार्टी प्लेसमेंट्स: कई भारतीय आईटी कंसल्टिंग फर्म्स थर्ड-पार्टी साइट्स पर काम कराती हैं.
हायर वेज आवश्यकताएं: एंट्री-लेवल पदों (जो नए ग्रेजुएट्स लेते हैं) पर सबसे ज़्यादा असर.
ये बदलाव धोखाधड़ी कम करने, अमेरिकी कामगारों को प्राथमिकता देने और प्रोग्राम को कुशल बनाने के लिए हैं, लेकिन भारतीय पेशेवरों, छात्रों और परिवारों के लिए चुनौतियां बढ़ा सकते हैं. कंपनियों को हायर वेजेस देनी पड़ेंगी, कंप्लायंस लागत बढ़ेगी और सिलेक्शन में प्रतिस्पर्धा कड़ी होगी. भारतीय आधिकारिक यूएससीआईएस/डीओएल/यूएससीआईएस.गॉव साइट्स पर अपडेट चेक करें और इमिग्रेशन अटॉर्नी से सलाह लें.
जवाब: अब हाई वेतन और हाई-स्किल उम्मीदवारों को ज्यादा प्राथमिकता मिलेगी, साथ ही नियम और निगरानी सख्त होगी.
जवाब: कंपनियों को H-1B और ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरशिप के लिए ज्यादा वेतन देना पड़ सकता है.
जवाब: स्पॉन्सरशिप महंगी होने से भारतीयों के लिए ग्रीन कार्ड का रास्ता और मुश्किल हो सकता है.
जवाब: OPT, STEM OPT और CPT नियम सख्त हो सकते हैं, जिससे पढ़ाई के बाद नौकरी पाना कठिन हो सकता है.
जवाब: क्योंकि H-1B वीजा पाने वालों में भारतीय सबसे अधिक हैं और ग्रीन कार्ड बैकलॉग भी सबसे बड़ा है.
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फ़रहा फ़ातिमा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस से ग्रेजुएशन के बाद पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2015 में LIVE India में इंटर्नशिप से की. प्रारंभिक दौर में ही उन्होंने जामिया … और पढ़ें
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