Varanasi News: वाराणसी, मुख्य संवाददाता। अपनी खुर्राट छवि के लिए पहचाने जाने वाले फिल्म स्टार नाना पाटेकर बनारसी लस्सी और कचौड़ी-जलेबी के दीवाने थे। इन बनारसी व्यंजनों का स्वाद उन्हें वर्ष 1999 में पहली बार मिला था। वह ‘कोहराम’ फिल्म की शूटिंग के लिए बनारस आए थे। कोहराम फिल्म की शूटिंग के दौरान नाना एक सप्ताह तक बनारस में रहे थे। उन्हें जब-जब खाली समय मिलता वह चेहरे को गमछा से ढंक कर बनारस की गलियों में भटकने के लिए निकल जाते थे। वह कहते थे कि बनारस की गलियों में गजब का आकर्षण है। वह आकर्षण क्या है यह समझने के लिए वह कभी भोर में तो कभी आधी रात के बाद भी गलियों में घूमे। नाना पाटेकर बीते 27 वर्षों में चार बार बनारस आए थे। नाना के करीबी मित्र भारतेंदु नाट्य अकादमी में अध्यक्ष डॉ.रतिशंकर त्रिपाठी ने बताया कि नाना की कद-काठी और चेहरे की भाव-भंगिमा ऐसी थी कि वह बहुत गुस्सेवाले दिखते थे लेकिन वास्तविकता यह थी कि वह बहुत ही संवेदनशील व्यक्ति थे।
डॉ.त्रिपाठी बताते हैं कि जब वह काम कर रहे होते थे उस समय कोई खलल उन्हें बर्दाश्त नहीं था। यही कारण था कि बनारस में वह दो बार शूटिंग के लिए आए और दोनों ही बार उनके साथ कुछ ऐसी घटना हुई जिससे वह असहज भी हुए। 2007 में आंच फिल्म की शूटिंग के दौरान चलते सीन के बीच में आने पर उन्होंने अस्सी घाट पर एक युवक को थप्पड़ मार दिया था। 2024 में ‘जर्नी’ की शूटिंग के दौरान दशाश्वमेध क्षेत्र में भी ऐसा ही वाकया हुआ था। मामले ने इतना तूल पकड़ा कि बाद में नाना को सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी।
डॉ.रतिशंकर ने बताया कि जब नाना जॉली मूड में होते तो मुझसे कहते थे ‘पंडितजी पेट अंदर कर लो वर्ना लड्डू खा नहीं पाओगे।’ मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि आखिर ऐसा कैसे हो गया। वह पूरी तरह फिट थे। किसी बीमारी का मानोनिशान नहीं था। उन्हें अपने खेतों से बहुत लगाव था। स्टार बनने के बाद भी वह खेती-किसानी से दूर नहीं हुए थे। रंगधर्मी सुमन पाठक बताती हैं कि फिल्म ‘यशवंत’ की शूटिंग के समय भी एक थप्पड़ कांड हुआ था। उन्होंने सेट पर एक दृश्य के दौरान अभिनेत्री मधु शाह को सच में मार दिया था। मधु शाह इतना तिलमिला गई थीं कि उन्होंने तुरंत पलट कर नाना को भी थप्पड़ मार दिया था।
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प्रशंसकों ने दी श्रद्धांजलि
वाराणसी। नाना पाटेकर के निधन पर वाराणसी डर्बी शायर क्लब ने पितरकुंडा में श्रद्धांजलि सभा की। प्रशंसकों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस मौके पर हिंदी सिनेमा में उनके योगदान को याद किया गया। क्लब के अध्यक्ष शकील अहमद जादूगर, विक्की यादव, हैदर मुलाई, मो. सलीम, प्रांजल यादव, चिंतित बनारसी, गोपाल यादव, शंभू यादव, अमजद अली, बबलू जायसवाल, आदिल आदि मौजूद रहे।
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