Varanasi News: बादल छंटे, नमी बढ़ी तो छा गया कोहरा – Hindustan

Varanasi News: वाराणसी, कार्यालय संवाददाता। चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से छाये बादलों के हटते ही सोमवार सुबह आकाश से धरती तक घना कोहरा छा गया। सुबह लगभग 9 बजे तक दृश्यता बेहद कम रही। इसके चलते वायु और सड़क परिवहन प्रभावित हुआ। मौसम विभाग ने मंगलवार सुबह भी ‘माडरेट या रेडिएटिव फॉग’ रहने का पूर्वानुमान व्यक्त किया है, दोपहर बाद आकाश लगभग साफ रहेगा। बुधवार से आकाश प्राय: साफ रहेगा, दिन और रात के तापमान में कमी आने की संभावना है। यानी, ठंड बढ़ेगी। चक्रवाती तूफान का प्रभाव पिछले कुछ दिनों तक बादल-बारिश के रूप में दिखा। रविवार रात भी लगभग 35 मिनट तक बनारस एवं आसपास मध्यम से हल्की बारिश हुई थी। बरसने के बाद बादल छंटने शुरू हुए, आधी रात के बाद आकाश साफ हुआ तो वातावरण में नमी बढ़ गई। सुबह 8.30 बजे नमी 96 प्रतिशत थी। उसके प्रभाव से कोहरा फैलने लगा, भोर में चार बजे तक घना कोहरा नभ से धरती तक छा चुका था। वह सुबह लगभग 9 बजे तक रहा। सुबह 8.30 बजे बाबतपुर एयरपोर्ट पर दृश्यता 200 मीटर नापी गई। इससे वायु सेवा प्रभावित हुई तो हाइवे पर वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई थी। चालक लाइट जलाते हुए आगे बढ़ते दिखे। कोहरे के प्रभाव से अधिकतम तापमान में भी आंशिक कमी आई। सोमवार को अधिकतम तापमान 31.5 डिग्री जबकि न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।
जानें कैसे बनता है ‘रेडिएटिव फॉग’
लखनऊ मौसम कार्यालय के विशेषज्ञ मो. दानिश ने सोमवार सुबह छाये कोहरा को ‘रेडिएटिव फॉग’ बताया। रेडिएटिव का संबंध रेडिएशन या विकिरण से है। रेडिएटिव फॉग वह कोहरा है जो आमतौर पर साफ और शांत रातों में बनता है, जब पृथ्वी की सतह से गर्मी तेजी से अंतरिक्ष में विकृत (रेडिएट) होकर निकल जाती है और जमीन ठंडी हो जाती है। उस समय जमीन के ठीक ऊपर की हवा ठंडी हो जाती है। चूंकि रविवार आधी रात के बाद आसमान साफ था, नमी बढ़ गई थी, इसलिए ओस भी गिरने लगी। मो. दानिश ने समझाया कि जब जमीन के संपर्क में आने वाली हवा का तापमान उसके ओस बिंदु तक गिर जाता है, तो हवा में मौजूद नमी घनीभूत होकर पानी की सूक्ष्म बूंदों में बदल जाती है और कोहरा बन जाता है। इसे ही रेडिएटिव फॉग कहते हैं। यह अमूमन देर रात या सूर्योदय के ठीक पहले बनता है और सूरज निकलने के बाद धीरे-धीरे गायब हो जाता है। यह मैदानी इलाकों, घाटियों, झीलों और नदियों के पास ज्यादा देखा जाता है क्योंकि वहां नमी अधिक होती है। इसे जमीनी (ग्राउंड फॉग) या उथला कोहरा भी कहा जाता है।
हवा में सुधार, शहर ग्रीन जोन में
वाराणसी। बारिश के बाद शहर वायु गुणवत्ता की दृष्टि से ग्रीन जोन में पहुंच गया है। कई दिनों से बनारस यलो जोन में था। एक्यूआई 100 के उपर था। इधर दो दिन से एक्यूआई सौ के नीचे पहुंच गया है। सोमवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 85 दर्ज किया गया है। यह भेलूपुर में 97, बीएचयू 77, मलदिया में एक्यूआई 88 रहा।
मुरासू का पूर्वी यूपी में असर नहीं
मौसम विभाग के अनुसार चक्रवाती तूफान ‘मुरासू’ का पूर्वांचल सहित उत्तर प्रदेश में कोई प्रभाव नहीं है। आगामी दिनों में मौसम मुख्यतः शुष्क बना रहने की सम्भावना है।
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मौसम : कोहरे से दिल्ली, बेंगलुरु और काठमांडू के विमान डायवर्ट
– घरेलू विमान लखनऊ और इंटरनेशनल फ्लाइट काठमांडू गई
– बाबतपुर एयरपोर्ट पर सुबह 10 बजे के बाद शुरू संचालन
बाबतपुर (वाराणसी), संवाद। मौसम में हुए बदलाव से बाबतपुर एयरपोर्ट पर सोमवार सुबह कोहरा छाया रहा। इसका असर विमानों के संचालन पर पड़ा। दिल्ली, बेंगलुरु तथा काठमांडू की फ्लाइट को डायवर्ट कर दिया गया। दृश्यता सामान्य होने के बाद सुबह 9:14 बजे के बाद विमानों का संचालन शुरू हुआ। 10:30 बजे के बाद डायवर्ट विमान वापस वाराणसी पहुंचे।
इंडिगो एयरलाइंस का विमान 6ई 6558 बेंगलुरु से सुबह 4:30 बजे उड़ान भरकर लगभग 6:40 बजे वाराणसी हवाई क्षेत्र में पहुंचा। दृश्यता सामान्य नहीं होने के चलते एटीसी ने विमान को लैंडिंग की अनुमति नहीं दी। लगभग 20 मिनट चक्कर लगाने के बाद चालक दल ने लखनऊ एटीसी से संपर्क किया। अनुमति के बाद विमान लखनऊ एयरपोर्ट के रनवे पर उतरा। इसी एयरलाइंस का विमान 6ई 6246 दिल्ली से सुबह के 5:25 बजे उड़ान भरकर वाराणसी सुबह 6:50 बजे पहुंचा। हवा में कुछ देर चक्कर लगाने के बाद इस विमान को भी लखनऊ डायवर्ट कर दिया गया।
इसी तरह बुद्धा एयर का काठमांडू के विमान यू4-161 ने सुबह 7:04 बजे वाराणसी के लिए उड़ान भरा। यहां दृश्यता सामान्य नहीं होने के कारण विमान हवा में लगाने के 50 मिनट तक चक्कर लगाने के बाद वापस काठमांडू के लिए डायवर्ट हो गया। कई अन्य विमान लेट भी पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि सुबह 8:15 बजे तक विजिबिलिटी 250 मीटर रही। ऐसे में विमानों की रनवे पर लैंडिंग संभव नहीं हो पाई।
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