weight loss cream: 'क्रीम लगाओ, मोटापा गायब…', वैज्ञानिकों ने बनाई वजन कम करने वाली Cream, जानें कैसे करेगी वेट लॉस – aajtak.in

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Weight loss cream: दुनिया में मोटापे की स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्य वैश्विक संस्थाओं के अनुसार, मोटापा अब एक महामारी के रूप में फैल चुका है जो न केवल विकसित देशों, बल्कि विकासशील और निम्न-आय वाले देशों में भी गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर रहा है. पिछले कुछ समय से वजन कम करने वाले इंजेक्शन ओजेंपिक और मौनजारो चर्चा में बने हुए हैं. ये दवाएं शीशी या लिक्विड वाली सिरिंज में आती हैं जिन्हें हफ्ते में 1 बार इंजेक्शन के रूप में लेना होता है. वहीं कई लोग ऐसे भी हैं जिन्हें इंजेक्शन से डर भी लगता है. ऐसे में खबर आई थी कि मौनजारो बनाने वाली एली लिली कंपनी वेट लॉस पिल्स लाने में है और अब खबर सामने आई है कि वैज्ञानिकों ने ​वेट लॉस क्रीम और पैच बनाए हैं. उनका दावा हैं कि इससे अधिक प्रभावी तरीके से वजन कम हो सकता है. 
क्या कहते हैं डॉ. निकोलस?
स्किन और एंटी-एजिंग विशेषज्ञ डॉ. निकोलस पेरिकोन के मुताबिक, ‘ट्रांसडर्मल ड्रग डिलीवरी सिस्टम (दर्द रहित विधि) का फायदा दशकों से उन लोगों को मिल सकता है जो इंजेक्शन से असहज हैं और अपना वजन कम कर करना चाहते हैं. फिलहाल टिर्जेपाटाइड के जेल फॉर्मूलेशन पर काम कर रहे हैं जो मौनजारो (वेट लॉस वाला इंजेक्शन) बनाने वाला कंपाउंड है और हम उम्मीद करते हैं कि मौनजारो बनाने वाली कंपनी एली लिली के साथ मिलकर इसे आगे बढ़ाया जाएगा क्योंकि मुझे लगता है कि यह काफी यूनीक होगा और यह निश्चित रूप से काम करेगा.’
जेल के रूप में आएगी क्रीम
डॉ. पेरिकोन का कहना है, ‘लैब टिर्जेपेटाइड का एक जेल फार्मूलेशन डेवलप कर रही है. आप निश्चित रूप से स्किन के माध्यम से स्किन की गहरी ब्लड वेसिल्स तक पहुंच सकते हैं. जो जेल बनाया जा रहा है, उस बस आप अपनी कलाई पर रखेंगे और अपनी कलाइयों को आपस में रगड़ना होगा. लगभग एक मिनट के भीतर वह जेल स्किन से अंदर चला जाएगा और पूरे शरीर में फैल जाएगा. अभी यह जेल पूरी तरह से प्रायोगिक है. FDA की मंजूरी मिलने से पहले इसे अभी भी प्री-क्लिनिकल ट्रायल और ह्यूमन ट्रायल से गुजरना होगा.’

अन्य वजन घटाने वाली क्रीम
लास वेगास की स्किनविजिबल फार्मास्यूटिकल्स इंक, ओजेम्पिक और वेगोवी में मौजूद एक्टिव पेप्टाइड-सेमाग्लूटाइड-के क्रीम बनाने पर काम कर रही है जो स्टेंडर्ड टॉपिकल ड्रग की तुलना में स्किन में लगभग 10 गुना बेहतर तरीके से अब्जॉर्व होती है और 6 घंटे तक दवा को शरीर में स्थिक रूप से छोड़ती है.
ट्रायल टेस्ट में वैज्ञानिकों ने पाया कि जब क्रीम में दवा मिलाई गई तो उसका 70 प्रतिशत हिस्सा स्किन की परतों में प्रवेश कर जाता है यानी कि वह त्वचा में अच्छे से अब्जॉर्ब हुई. क्रीम को बनाने में वही पेप्टाइड यूज हुआ था जो सेमाग्लूटाइड को काम करने में सक्षम बनाता है जिसे GLP-1 एगोनिस्ट कहा जाता है. GLP-1 एगोनिस्ट दवाओं का एक ग्रुप है जो टाइप 2 डायबिटीज और मोटापे को मैनेज करने में मदद कर सकता है.

साथ ही इसमें CB-1 रिसेप्टर एंटागोनिस्ट भी होता है जो भूख को कम करता है और शरीर को फैट ब्रन करने के लिए प्रमोट करता है. वैज्ञानिकों ने पाया कि क्रीम में मिलाई गई दवा का लगभग 10 प्रतिशत भाग 6 घंटों के दौरान त्वचा से होकर गुजर गया था जो कि इंजेक्शन की तुलना में अधिक कंट्रोल वाली खुराक है.

वैज्ञानिकों को इस बात की चिंता

वैज्ञानिक इस बात को लेकर अनिश्चित हैं कि उनकी ये नई तकनीक जीवित ऊतकों पर प्रभावी साबित होगी या नहीं. उन्होंने अभी तक वजन कम करने के इच्छुक लोगों पर इसका परीक्षण नहीं किया है और वे अभी तक इसकी जैवउपलब्धता के बारे में भी सुनिश्चित नहीं हैं. सेमाग्लूटाइड के सुई इंजेक्शन की जैव उपलब्धता 50 से 80 प्रतिशत है. हालांकि, वैज्ञानिक अभी तक क्रीम के बारे में निश्चित नहीं हैं. जीएलपी-1 दवाएं ट्रायल में अधिक सफल साबित हुई हैं जिससे लोगों को औसतन अपने शरीर के वजन का लगभग 15 से 20 प्रतिशत कम करने में मदद मिली है.

लेकिन इंजेक्शन से 100 प्रतिशत दवा एक बार में ही शरीर में पहुंच जाती है इसलिए इसके कुछ दुष्प्रभाव भी होते हैं, जिनके कारण 3 में से 2 मरीजों को शुरू करने के एक साल के भीतर ही इसे लेना बंद करना पड़ता है. ओजेम्पिक और वेगोवी जैसे जीएलपी-1 एगोनिस्ट गंभीर पेट दर्द, उल्टी, कब्ज और दस्त का कारण बनते हैं और लोगों का कहना है कि इससे उनकी लाइफ प्रभावित होती है. इसलिए रिसर्चर्स का मानना है कि ये दवाएं एक साथ शरीर में प्रवेश नहीं करेंगी इसलिए लोग इनके दुष्प्रभावों से बचे रहेंगे.
डाक टिकिट के साइज का पैच
बोस्टन स्थित एनोडाइन नैनोटेक भी पैच-आधारित वजन घटाने वाली दवा पर काम कर रही है. कंपनी अपने हीरोपैच का क्लिनिकल परीक्षण शुरू करने की योजना बना रही है, जो डाक टिकट से भी छोटा स्टिकर है और जिसके एक तरफ छोटी, घुलनशील सुइयां लगी होती हैं और उनमें वजन घटाने वाली दवा की खुराक होगी. जब कोई भी इस पैच को स्किन पर लगाएगा तो छोटी-सी सुइयां त्वचा में गहराई तक घुस जाएंगी, लेकिन दर्द महसूस कराने वाले रिसेप्टर्स और ब्लड वेसिल्स तक नहीं पहुंचेंगी. इससे दर्द का अहसास नहीं होगा. और दवा शरीर में अंदर पहुंच जाएगी.

माइक्रोनीडल्स के अंदर GLP-1 एगोनिस्ट की प्रॉपर्टीज होती है जो सेमाग्लूटाइड के समान काम करती हैं. यह बिना किसी दर्द के त्वचा की सतह में प्रवेश कर जाती है और सुइयां त्वचा की नमी में घुलने लगती हैं और धीरे-धीरे दवा को रिलीज करती हैं. त्वचा के नीचे के लिक्विड्स दवा को अब्जॉर्ब कर लेते हैं जिससे दवा अंदर तक चली जाती है. कुछ घंटों के बाद, सुइयां पूरी तरह से घुल जाती हैं और एक खाली पैच रह जाता है जिसे छीलकर फेंक दिया जा सकता है.
कंपनी ने पिछले साल एनिमल ट्रायल किया था जिसमें उन्होंने पाया था कि पैच सेमाग्लूटाइड की 3.6 मिलीग्राम के बराबर खुराक देता है जो वेगोवी (2.4 मिलीग्राम) की खुराक से भी अधिक है. कंपनी के अनुसार, एक पैच ने 1 हफ्ते तक लगातार दवा रिलीज की थी. एनोडाइन के सीईओ और को-फाउंडर लोम्बार्डो ने कहा, ‘हम हीरोपैच को न केवल जीएलपी-1 डिलीवरी के लिए एक गेम-चेंजर के रूप में देखते हैं, बल्कि अन्य पुरानी बीमारियों के ट्रीटमेंट के  लिए भी एक वर्सेटाइल प्लेटफॉर्म के रूप में भी देखते हैं.’
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