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By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: June 26, 2026 08:39 IST2026-06-26T08:31:13+5:302026-06-26T08:39:31+5:30
चीन के लाइनशाइन सुपर कंप्यूटर ने अमेरिकी एल पैपिटन को दूसरे नंबर पर पहुंचा दिया है. कहा जा रहा है कि एल पैपिटन के मुकाबले लाइनशाइन बीस प्रतिशत ज्यादा तेज है. ऐसे में मन में यह सवाल कौंधना स्वाभाविक है कि सुपर कंप्यूटर के क्षेत्र में हमारा देश कहां खड़ा है? चीन ने अपना पहला सुपर कंप्यूटर 1983 में बनाया था जबकि भारत ने यह काम 1991 में किया. हमारे पहले सुपर कंप्यूटर का नाम था परम 8000.
भारत के पहले सुपर कंप्यूटर के निर्माण के पीछे एक चुनौतीपूर्ण कहानी है. दरअसल भारत ने मौसम की सटीक भविष्यवाणी और उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए अमेरिका से आग्रह किया कि वह अपना शक्तिशाली क्रे सुपर कंप्यूटर भारत को उपलब्ध कराए. पहले तो अमेरिका ने साफ इनकार कर दिया. कुछ दिनों बाद कहा कि कंप्यूटर वाले कमरे में अमेरिकी विशेषज्ञों की निगरानी यदि रहेगी तो वह देने को तैयार है. निश्चय ही यह बेहद अपमानजनक शर्त थी. तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने वैज्ञानिक डॉ. विजय भटकर के नेतृत्व में एक टीम को स्वदेशी सुपर कंप्यूटर विकसित करने को कहा.
इसके लिए पुणे में सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग की स्थापना की गई. केवल तीन साल की अवधि में और भारतीय वैज्ञानिकों ने करिश्मा कर दिखाया. यदि हम दुनिया के आंकड़े देखें तो टॉप 500 सुपर कंप्यूटर की लिस्ट में निश्चय ही अमेरिका का पलड़ा बहुत भारी है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उसके पास 161 सुपर कंप्यूटर हैं जबकि जापान के पास 44 और जर्मनी के पास 41 हैं. सूची में चीन के 40 सुपर कंप्यूटर हैं लेकिन चीन के बारे में यह धारणा सर्वमान्य है कि वह सही जानकारी नहीं देता है.
संभव है कि उसके पास ज्यादा सुपर कंप्यूटर हों या फिर कम हों. जहां तक भारत का सवाल है तो हमारी स्थिति लगातार सुधरी है. टॉप 100 में एरावत नाम का हमारा सुपर कंप्यूटर शामिल है जो पुणे स्थित में स्थापित है. भारत में राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत तेजी से नए-नए सुपर कंप्यूटर विकसित किए जा रहे हैं.
इस मिशन के तहत देश में 40 से ज्यादा सुपर कंप्यूटर स्थापित किए जा चुके हैं. मगर यह मानने में हर्ज नहीं है कि हमारे यहां धनराशि की कमी के कारण हम उस मुकाम पर अभी नहीं पहुंचे हैं, जहां हमें पहुंचना चाहिए था. अच्छी बात है कि मौजूदा सरकार ने भी सुपर कंप्यूटर को अपनी प्राथमिकता में रखा है. सितंबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परम रुद्र’ सुपर कंप्यूटर्स की एक श्रृंखला का लोकार्पण किया था. ये सुपर कंप्यूटर पुणे में विशाल मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप के लिए, दिल्ली में अंतर-विश्वविद्यालय त्वरक केंद्र के लिए तथा कोलकाता में एस.एन. बोस राष्ट्रीय बुनियादी विज्ञान केंद्र के लिए काम कर रहे हैं.
निश्चय ही देश को न केवल संख्यात्मक दृष्टि से और ज्यादा सुपर कंप्यूटर की जरूरत है बल्कि गुणवत्ता के हिसाब से हमें टॉप 10 में पहुंचने की भी जरूरत है. भारत ने हाल के वर्षों में कई इतिहास रचे हैं. उम्मीद करें कि सुपर कंप्यूटर की दुनिया में भी हम नया इतिहास रचें.
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