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पहले सिर्फ विंटर सीजन में एयर क्वॉलिटी खराब होती थी. लेकिन इस बार विंटर्स के बाद भी दिल्ली-एनसीआर में एयर क्वॉलिटी खराब स्तर पर है. ब्रिटिश कंपनी Dyson की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक नींद की क्वॉलिटी सिर्फ मोबाइल फ़ोन और टेंशन की वजह से ख़राब नहीं होती. वर्ल्ड स्लीप डे के मौके पर कंपनी ने ये स्टडी पब्लिश की है.
कंपनी का कहना है कि कई बार प्रॉबल्म इससे भी कहीं ज्यादा होती है. आम तौर पर लोग इसे इग्नोर कर देते हैं. आपके बेडरूम की हवा आपकी स्लीप क्वॉलिटी पर काफी असर डालती है.
नई रिपोर्ट और रिसर्च बताती हैं कि इनडोर एयर क्वालिटी हमारी नींद पर सीधा असर डाल सकती है. खासकर रात में जब हम कई घंटे तक एक ही बंद कमरे में सांस लेते हैं.
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टेक कंपनी Dyson से जुड़ी इंजीनियर नताशा टेलर के मुताबिक बेडरूम अक्सर ऐसा बंद स्पेस होता है जहां रात के दौरान धूल के बारीक कण, एलर्जी पैदा करने वाले पार्टिकल्स और गैस जमा हो सकती हैं. जब वेंटिलेशन कम होता है तो ये पॉल्यूटेंट्स धीरे-धीरे बढ़ते जाते हैं और नींद की क्वॉलिटी पर असर डालते हैं.
हवा खराब तो नींद भी खराब
रिसर्च में पाया गया है कि हवा में मौजूद पार्टिकुलेट मैटर यानी बारीक कण नींद के पैटर्न को प्रभावित कर सकते हैं. इससे गहरी नींद कम हो सकती है, रात में बार-बार नींद खुल सकती है और सांस लेने में भी मुश्किल हो सकती है.
स्लीप स्पेश्लिस्ट डॉक्टर मोनिका शर्मा कहती हैं कि उनके पास अक्सर ऐसे लोग आते हैं जो सुबह उठते ही थकान महसूस करते हैं. कई बार बच्चों को रात में खांसी आती है और उन्हें स्कूल में सुस्ती महसूस होती है.
उनका कहना है कि कई मामलों में इसकी वजह सिर्फ खराब नींद की आदतें नहीं होतीं. कमरे की हवा भी एक बड़ा कारण हो सकती है. रात में जब कमरे में कार्बन डाइऑक्साइड का लेवल बढ़ता है तो सांस लेना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. इससे नींद बार-बार टूटती है.
टेक कंपनियां भी अब नींद पर रिसर्च कर रही हैं
एयर प्यूरीफिकेशन टेक्नोलॉजी पर काम करने वाली कंपनियां भी अब इस मुद्दे पर रिसर्च कर रही हैं. Dyson के मुताबिक़ बेडरूम में हवा को साफ रखना जरूरी है क्योंकि रात के दौरान हम लगातार उसी हवा को सांस के साथ अंदर लेते रहते हैं.
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Oura रिंग भारत में लॉन्च हो चुकी है और ये स्मार्ट रिंग के ग्लोबल लीडर हैं. इस कंपनी ने भी स्लीप डेटा पब्लिश किया है जिसमें बताया गया है कि भारतीय दूसरे कई मुल्कों के मुकाबले कम नींद लेते हैं.
Dyson के एयर प्यूरीफायर में इस्तेमाल होने वाला फिल्ट्रेशन सिस्टम बारीक कणों को पकड़ने के लिए बनाया गया है. कंपनी का दावा है कि इसका फिल्टर 0.3 माइक्रोन तक के कणों में से 99.97 प्रतिशत तक को पकड़ सकता है. इसमें एक्टिवेटेड कार्बन फिल्टर भी होता है जो हवा में मौजूद गैसों को कम करने में मदद करता है. आप किसी भी कंपनी का प्यूरिफायर खरीदें तो ये ध्यान रखें कि उसमें HEPA फिल्टर और ऐक्टिवेटेड कार्बन फिल्टर दिया गया हो.
कुछ प्यूरीफायर में खास एयरफ्लो नोजल भी लगाए जाते हैं ताकि साफ की गई हवा पूरे कमरे में घूम सके और सिर्फ मशीन के आसपास ही लिमिट न रहे.
सोने से पहले इन चीजों से बचें
एक्सपर्ट्स यह भी सलाह देते हैं कि सोने से पहले कमरे में ज्यादा खुशबूदार मोमबत्ती, अगरबत्ती या तेज सुगंध वाले स्प्रे का इस्तेमाल कम करना चाहिए. ये चीजें हवा में ऐसे गैस छोड़ सकती हैं जो सांस लेने में परेशानी पैदा कर सकते हैं.
साथ ही अगर बाहर का पॉल्यूशन ज्यादा है तो रात में खिड़कियां खुली छोड़ना भी सही नहीं होता. इससे धूल, धुआं और पराग जैसे कण कमरे में आ सकते हैं.
नींद के लिए सिर्फ बिस्तर नहीं, हवा भी जरूरी
डॉक्टरों का कहना है कि अच्छी नींद सिर्फ अच्छे गद्दे या तकिये से नहीं मिलती. जिस हवा में हम पूरी रात सांस लेते हैं, वह भी उतनी ही अहम होती है. अगर बेडरूम की हवा साफ रहे तो नींद गहरी होती है, शरीर बेहतर तरीके से रिकवर करता है और सुबह उठने पर थकान कम महसूस होती है.
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