अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की होगी समीक्षा, कम नामांकन वाले फिर बन सकते हैं हिंदी माध्यम, दो पारियों में चलेंग… – Dainik Bhaskar

भास्कर न्यूज | नागौर
राजस्थान सरकार महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में लगातार घट रहे नामांकन को लेकर बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेशभर के करीब 300 महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों की समीक्षा शुरू कर दी गई है।
इनमें नागौर और लाडनूं क्षेत्र के कई स्कूल भी शामिल हैं, जहां छात्र संख्या 20 से 40 के बीच सिमट गई है। शिक्षा विभाग अब इन स्कूलों में समानान्तर संचालन के तहत हिंदी माध्यम की दोबारा शुरुआत करने की तैयारी कर रहा है। इसका उद्देश्य उन विद्यार्थियों को फिर से सरकारी स्कूलों से जोड़ना है, जो अंग्रेजी माध्यम बनने के बाद स्कूल छोड़ गए या दूसरे विद्यालयों में जाने को मजबूर हुए। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों से सात कार्य दिवस में विस्तृत प्रस्ताव मांगे हैं। प्रस्ताव संबंधित सीबीईओ और सीडीईओ की अनुशंसा के साथ भेजे जाएंगे। रिपोर्ट के आधार पर इसी शैक्षणिक सत्र से चयनित विद्यालयों में हिंदी माध्यम की कक्षाएं शुरू करने पर निर्णय लिया जाएगा।
^नागौर जिले में महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम के करीब 70 विद्यालय हैं। फिलहाल विभाग से ऐसा कोई आदेश नहीं मिला है। यदि दो शिफ्ट में अंग्रेजी और हिंदी माध्यम साथ-साथ चलाए जाते हैं तो अतिरिक्त स्टाफ की आवश्यकता होगी।
-रामलाल खराड़ी, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, नागौर
शिक्षा विभाग ने रिपोर्ट के लिए विस्तृत प्रारूप जारी किया है। इसमें पूछा गया है कि वर्तमान में अध्ययनरत विद्यार्थियों या उनके अभिभावकों से अंग्रेजी या हिंदी माध्यम को लेकर कोई लिखित सहमति ली गई है या नहीं। इसके अलावा संबंधित क्षेत्र में हिंदी माध्यम में प्रवेश लेने के इच्छुक संभावित विद्यार्थियों की संख्या, स्कूल से तीन से पांच किलोमीटर के दायरे में संचालित हिंदी माध्यम विद्यालयों की दूरी, उनका स्तर और वहां के नामांकन का पूरा विवरण भी देना होगा।
इसके साथ ही विद्यालय में वर्तमान स्टाफ, विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता, संचालित संकाय (कला, विज्ञान, वाणिज्य), अंग्रेजी माध्यम बनने से पहले और बाद के कक्षावार नामांकन का तुलनात्मक विवरण भी मांगा गया है। दो प्रकार के मॉडल तय किसी भी स्कूल को अचानक पूरी तरह हिंदी माध्यम में नहीं बदला जाएगा। पहला मॉडल जहां भवन और कक्ष पर्याप्त हैं, वहां एक ही पारी में स्कूल चलेगा। एक विंग में वर्तमान अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थी पढ़ेंगे, जबकि दूसरे विंग में हिंदी माध्यम की कक्षाएं संचालित होंगी।
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