Rashmi Singh
Date: 31-10-26 08:11
ISRO NVS-03 Launch: भारत ने अंतरिक्ष में अपनी नेविगेशन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम NavIC को अपग्रेड करने के लिए नया सैटेलाइट NVS-03 लॉन्च कर दिया है. इस सैटेलाइट के अंतरिक्ष में पहुंचने से भारत की लोकेशन और टाइमिंग सेवाओं को पहले से अधिक सटीक और भरोसेमंद बनाने में मदद मिलेगी. इसकी खासियत यह है कि इसमें भारत में विकसित एटॉमिक क्लॉक के साथ नया L1 सिग्नल भी दिया गया है, जिससे आम लोगों के नेविगेशन अनुभव में सुधार होने की उम्मीद है.
श्रीहरिकोटा से लॉन्च हुआ NVS-03
ISRO ने GSLV-F18/NVS-03 मिशन के तहत इस नेविगेशन सैटेलाइट को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से रात 11 बजकर 51 मिनट पर लॉन्च किया. इसे अंतरिक्ष में पहुंचाने के लिए GSLV रॉकेट का इस्तेमाल किया गया. यह इस रॉकेट की 20वीं उड़ान है. मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत के अपने नेविगेशन सिस्टम NavIC को और उन्नत बनाना है, ताकि देश को लोकेशन, रास्ते और समय से जुड़ी सेवाओं के लिए दूसरे देशों के सिस्टम पर निर्भर न रहना पड़े.
भारत के NavIC सिस्टम को मिलेगी नई ताकत
NVS-03 भारत की दूसरी पीढ़ी के नेविगेशन सैटेलाइट नेटवर्क का तीसरा उपग्रह है. NavIC यानी Navigation with Indian Constellation भारत का स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम है. इसके जरिए भारत और देश की सीमाओं से करीब 1,500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में सटीक लोकेशन, नेविगेशन और टाइमिंग से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाती है. इस सैटेलाइट के नेटवर्क में शामिल होने से इन सेवाओं की क्षमता और निरंतरता को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.
स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक और L1 सिग्नल हैं बड़ी खासियत
NVS-03 की सबसे अहम विशेषताओं में भारत में विकसित स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक शामिल है. एटॉमिक क्लॉक सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम के लिए बेहद सटीक समय की जानकारी उपलब्ध कराती है. नेविगेशन सेवाओं में समय की सटीकता महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इसी के आधार पर किसी स्थान की सही स्थिति का पता लगाया जाता है. इसके अलावा इस सैटेलाइट में नया L1 सिग्नल भी शामिल किया गया है. इससे आम लोगों के स्मार्टफोन और वाहनों में इस्तेमाल होने वाली नेविगेशन सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी. खासतौर पर उन डिवाइसों को फायदा हो सकता है, जो L1 बैंड पर आधारित नेविगेशन सिग्नल का इस्तेमाल करते हैं.
आम लोगों और सेना के लिए अलग-अलग सेवाएं
भारत का NavIC सिस्टम दो तरह की नेविगेशन सेवाएं उपलब्ध कराता है. पहली स्टैंडर्ड पोजिशनिंग सर्विस है, जिसका इस्तेमाल आम नागरिक कर सकते हैं. इसके जरिए रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लोकेशन और रास्तों की जानकारी मिलती है. वहीं दूसरी सेवा रिस्ट्रिक्टेड सर्विस है, जिसे विशेष रूप से अधिकृत सुरक्षा एजेंसियों और सेना के इस्तेमाल के लिए तैयार किया गया है. यह सेवा एन्क्रिप्टेड होती है, इसलिए इसका इस्तेमाल केवल अधिकृत उपयोगकर्ता ही कर सकते हैं.
पांच दूसरी पीढ़ी के सैटेलाइट लॉन्च करने की योजना
ISRO ने NavIC नेटवर्क को आधुनिक बनाने और इसकी सेवाओं को लगातार जारी रखने के लिए दूसरी पीढ़ी के पांच नेविगेशन सैटेलाइट लॉन्च करने की योजना बनाई है. इस सीरीज का पहला उपग्रह NVS-01 था, जिसे 29 मई 2023 को GSLV-F12 मिशन के तहत अंतरिक्ष में भेजा गया था. इस मिशन की खास बात यह थी कि पहली बार किसी भारतीय नेविगेशन सैटेलाइट में स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक का इस्तेमाल किया गया था. NVS-03 इसी सीरीज का तीसरा सैटेलाइट है. इसमें पहले से इस्तेमाल हो रहे L5 और S बैंड सिग्नल के साथ L1 सिग्नल को भी शामिल किया गया है. इससे NavIC नेटवर्क की क्षमताओं का विस्तार होगा और भारत की स्वदेशी नेविगेशन सेवाओं को अधिक आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी.
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