अंतरिक्ष में सकती है जोरदार टक्कर! भारत के 22 में से 20 सैटेलाइट पर मंडा रहा खतरा, सरकार ने जताई चिंता – India.Com

Edited by: Rishabh Kumar | Updated: Aug 5, 2026, 11:25 PM
लोकसभा में सरकार ने बताया कि भारत के लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में काम कर रहे 22 सक्रिय सैटेलाइट्स में से 20 पर टकराव का खतरा बना हुआ है. यह जानकारी केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लिखित जवाब में दी. उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में लगातार बढ़ रहे सैटेलाइट्स और स्पेस मलबे की वजह से यह खतरा पहले के मुकाबले ज्यादा बढ़ गया है. ऐसे में हर सैटेलाइट की लगातार निगरानी की जाती है ताकि समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें और किसी बड़े नुकसान से बचा जा सके.
लो अर्थ ऑर्बिट यानी धरती से करीब 2,000 किलोमीटर तक की ऊंचाई वाला इलाका सबसे ज्यादा व्यस्त माना जाता है. इसी क्षेत्र में कई देशों के सैटेलाइट्स और पुराने रॉकेट के हिस्से मौजूद हैं. इसके अलावा टूटे हुए छोटे-छोटे स्पेस मलबे भी तेज रफ्तार से घूमते रहते हैं. अगर इनमें से कोई चीज किसी सैटेलाइट से टकरा जाए तो बड़ा नुकसान हो सकता है. यही वजह है कि इस ऊंचाई पर काम करने वाले सैटेलाइट्स पर सबसे ज्यादा नजर रखी जाती है.
सरकार के मुताबिक, साल 2026 में अब तक ISRO ने 9 बार अपने सैटेलाइट्स का रास्ता बदला ताकि किसी संभावित टक्कर से बचा जा सके. साल 2025 में ऐसे 20 मौके आए थे, जब सैटेलाइट्स की कक्षा बदलनी पड़ी थी. यह प्रक्रिया पहले से तय योजना के तहत की जाती है. इससे सैटेलाइट सुरक्षित रहता है और उसका काम बिना किसी रुकावट के चलता रहता है.
जब किसी सैटेलाइट के सामने दूसरे सैटेलाइट या स्पेस मलबे से टकराने का खतरा दिखाई देता है, तब उसका रास्ता थोड़ा बदल दिया जाता है. इस प्रक्रिया को Collision Avoidance Manoeuvre कहा जाता है. इसमें सैटेलाइट को नई कक्षा में ले जाकर संभावित टक्कर से बचाया जाता है. यह पूरी प्रक्रिया बहुत सटीक गणना और लगातार निगरानी के आधार पर की जाती है ताकि सैटेलाइट सुरक्षित रहे और उसकी सेवाओं पर कोई असर न पड़े.
सरकार ने बताया कि भारत स्पेस मलबे की समस्या से निपटने के लिए दुनिया के कई देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है. ISRO, इंटर-एजेंसी डेब्रिस कोऑर्डिनेशन कमेटी (IADC) और संयुक्त राष्ट्र के लॉन्ग टर्म सस्टेनेबिलिटी ग्रुप जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों में हिस्सा लेता है. यहां स्पेस मलबे को कम करने और भविष्य के मिशनों को सुरक्षित बनाने के लिए नए नियमों और तकनीकों पर चर्चा की जाती है.
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि ISRO ने स्पेस मलबे को कम करने से जुड़े नए अंतरराष्ट्रीय दिशा-निर्देश तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है. भारतीय वैज्ञानिकों ने अपने तकनीकी अध्ययन और अनुभव के आधार पर कई सुझाव दिए, जिन्हें नए नियमों में शामिल किया गया. इसका मकसद यह है कि भविष्य में अंतरिक्ष में बेकार मलबा कम बने और सैटेलाइट्स को सुरक्षित तरीके से संचालित किया जा सके.
सरकार ने बताया कि साल 2024 में भारत ने डेब्रिस फ्री स्पेस मिशन की घोषणा की थी. इस पहल का मकसद भविष्य में भारतीय सरकारी और निजी संस्थाओं की तरफ से अंतरिक्ष में नया मलबा बनने से रोकना है. ISRO का लक्ष्य आने वाले समय में जीरो डेब्रिस हासिल करना है. यानी नए मिशन इस तरह तैयार किए जाएं कि उनका इस्तेमाल पूरा होने के बाद वे अंतरिक्ष में बेकार मलबा छोड़कर न जाएं.(इनपुट: PTI) (Image: Canva/AI)
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