अंदर से कैसी दिखती है देश की पहली LNG ट्रेन? साबरमती से शुरू हुई 'हरित रेल' की पूरी डिटेल – Jagran

भारतीय रेलवे ने देश की पहली LNG ट्रेन का सफल संचालन शुरू किया है, जिसे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गुजरात के साबरमती से हरी झंडी दिखाई।
देश की पहली LNG ट्रेन शुरू (फोटो-सोशल मीडिया)
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने पर्यावरण के अनुकूल सफर की ओर एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ा दिया है। पहली हाइड्रोजन ट्रेन के सफल संचालन के बाद, अब देश की पहली लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) से चलने वाली ट्रेन भी पटरी पर उतर चुकी है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गुजरात के साबरमती रेलवे स्टेशन से इस अनूठी हरित ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर ट्रेन में सवार स्कूली बच्चों ने हाथों में तिरंगा लहराकर रेलवे के इस नए अध्याय का स्वागत किया।
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इस ट्रेन को नियमित सेवा में शामिल करने से पहले रेलवे ने इसका कड़ा परीक्षण किया। करीब 2,000 किलोमीटर लंबे ट्रायल रन को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद ही इसे यात्रियों के लिए हरी झंडी दी गई।
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अहमदाबाद रेल मंडल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो शेयर कर इस हरित यात्रा की झलकियां साझा कीं।
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देश की यह पहली LNG ट्रेन पूरी तरह से केवल गैस पर निर्भर नहीं है, बल्कि इसे डीजल + LNG डुअल-फ्यूल तकनीक पर तैयार किया गया है।
समान इंजन क्षमता: इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ट्रेन का एक ही इंजन LNG और डीजल—दोनों ईंधनों पर बिना किसी रुकावट के काम कर सकता है।
ईंधन की बचत: आवश्यकता और उपलब्धता के आधार पर ईंधन शिफ्ट किया जा सकेगा, जिससे महंगे पारंपरिक डीजल पर निर्भरता कम होगी।
पर्यावरण को फायदा: LNG के इस्तेमाल से कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी, जिससे प्रदूषण पर लगाम लगेगी और रेलवे के करोड़ों रुपये के ईंधन बिल की बचत होगी।
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यह ट्रेन पूरी तरह से केवल गैस पर निर्भर न होकर एलएनजी (LNG) और डीजल दोनों ईंधनों के बेहतरीन कॉम्बिनेशन पर काम करती है। इसमें लगी स्मार्ट तकनीक की बदौलत आवश्यकता और उपलब्धता के अनुसार इंजन स्वतः (ऑटोमैटिक) ही ईंधन को स्विच कर लेता है।
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इस आधुनिक प्रणाली के प्रयोग से सामान्य डीजल की खपत में 40 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक की भारी कमी दर्ज की जाती है।
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एलएनजी के इस इस्तेमाल से भारतीय रेलवे के ईंधन खर्च में भी बचत होगी; अनुमान के अनुसार, मात्र एक DPC से ही सालाना करीब 11.9 लाख की बचत हो सकती है, जबकि 8 कोच वाली पूरी रेक पर यह सालाना बचत 23.9 लाख तक पहुंच सकती है।
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इससे पहले रेलवे ने हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच (लगभग 89-90 किलोमीटर लंबे रूट पर) 10 डिब्बों वाली देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत की थी।
रेलवे अब लगातार ऐसे विकल्पों की पहचान कर रहा है, जिससे पारंपरिक जीवाश्म ईंधन को कम करके पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा-कुशल तकनीकों को बढ़ावा दिया जा सके।
LNG और हाइड्रोजन ट्रेनों का यह नया दौर भारतीय रेल को नेट जीरो कार्बन उत्सर्जक बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

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