समाज के लिए बुजुर्ग क्या कुछ नहीं करते हैं. बचपन से जवानी निकल जाती है, लेकिन बुढ़ापे में उन्हीं बुजुर्गों को अकेला छोड़ दिया जाता है. लोग अपनी जिंदगी में इतने बिजी हो जाते हैं कि घर में अपने बड़े-बुजुर्गों की तरफ ध्यान ही नहीं देते हैं. जिस इंसान ने अपनी पूरी जिंदगी बच्चों को पालने में निकाल दी, वही बच्चे उन्हें बुढ़ापे में अकेला छोड़ देते हैं. समाज भी धीरे-धीरे उनसे कटना शुरू हो जाता है. ऐसे में अकेलेपन की वजह से मेंटल हेल्थ पर काफी नकारात्मक असर पड़ता है. इसलिए उन्हें अकेलेपन से निकालने के लिए सबको उनका साथ देना चाहिए.
पूरी दुनिया में बुजुर्ग अकेलेपन का शिकार हैं. भारत की बात करें तो यहां पर भी स्थिति सामान्य नहीं है. नई दिल्ली की एजवेल संस्था की ओर से 15 हजार लोगों पर एक सर्वे किया गया था. सर्वे में करीब 47.49 % बुजुर्गों ने अकेलेपन की बात कही. सर्वे के मुताबिक शहरी इलाकों में करीब 64.1 % बुजुर्ग अकेलेपन से जूझ रहे हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 39.19 % है. अकेलापन सिर्फ भावनात्मक परेशानी नहीं है. लंबे समय तक समाज और अपने बच्चों के लिए काम करने के बाद एकसाथ अलग होना मुश्किल है. लोग बुजुर्गों को धीरे-धीरे कम समय देने लगते हैं और उन्हें अकेला छोड़ देते हैं. रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि भारत में बड़ी संख्या में बुजुर्ग मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं और उन्हें मनोवैज्ञानिक (Psychological) सहायता की जरूरत पड़ती है.
लगातार अकेले रहने से बुजुर्गों में कई तरह की मानसिक और शारीरिक समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. घर और बाहार के कामों की वजह से परिवार में लोग अपने बुजुर्गों के टाइम नहीं निकाल पाते. जिसकी वजह से उनके मानसिक स्वास्थय पर असर पड़ता है. परिवार और समाज से दूरी बढ़ने पर बुजुर्गों में उदासी, चिंता, तनाव और निराशा की भावना पैदा होने लगती है. जिससे वो डिप्रेशन, एंग्जाइटी, टेंशन जैसी मानसिक बीमारियों का शिकार हो जाते हैं. इससे सिर्फ मेंटल हेल्थ पर असर नहीं पड़ता, बल्कि फिजिकल हेल्थ पर भी उतना ही पड़ता है. ब्लड प्रेशर और हार्ट से संबंधित बहुत सी बीमार भी हो सकती हैं.
बुजुर्गों को खुश और मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए परिवार का साथ बेहद जरूरी है. इसके लिए आपको उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में थोड़ा समय निकालना चाहिए और उन्हें यह महसूस कराना चाहिए कि परिवार में उनकी अहमियत आज भी उतनी ही है.
रोज बातचीत करें: हर दिन कुछ समय उनके साथ बैठकर बात करें. उनकी बातों को बीच में काटने के बजाय ध्यान से सुनें.
फैसलों में शामिल करें: घर से जुड़े छोटे-बड़े डिसीजन में उनकी राय लें. इससे उन्हें परिवार का महत्वपूर्ण हिस्सा होने का एहसास होगा.
संद के काम करने दें: बागवानी, किताब पढ़ना, हल्की सैर, पूजा, संगीत या किसी अन्य पसंदीदा गतिविधि के लिए उन्हें प्रोत्साहित करें.
सामाजिक मेल-जोल बढ़ाएं: उन्हें रिश्तेदारों, पड़ोसियों और उम्रदराज लोगों के समूहों के साथ समय बिताने के अवसर दें.
सेहत पर नजर रखें: उनके खान-पान, नींद, दवाइयों और रोजमर्रा के व्यवहार में होने वाले बदलावों पर ध्यान दें. अगर वे लगातार उदास, चिड़चिड़े, चिंतित या लोगों से दूर रहने लगे हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या Mental Health Professional की सलाह लें.
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें Lifestyle की और अन्य ताजा-तरीन खबरें
सपना तंवर हिंदी डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और कंटेंट राइटर हैं। इन्होंने अपनी स्नातक शिक्षा माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से पूरी की है। … और पढ़ें
Subscribe to Our Newsletter Today!
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.
© 1998-2026 INDIADOTCOM DIGITAL PRIVATE LIMITED, ALL RIGHTS RESERVED