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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भारत को नक्सलवाद से मुक्त घोषित किया, जिसका लक्ष्य 31 मार्च 2026 था। उन्होंने कांग्रेस पर नक्सलवाद को बढ़ावा देने और उन …और पढ़ें
लोकसभा में देश से नक्सलवाद पर चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि इसके पीछे कांग्रेस की वामपंथी विचारधारा जिम्मेदार है
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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 को नक्सलवाद के समूह खात्मे का लक्ष्य दिया था और एक दिन पहले संसद से उन्होंने कहा- ”पूरी प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी होने के बाद देश को सूचित किया जाएगा लेकिन मैं ऐसा बोल सकता हूं कि हम नक्सलमुक्त हो गए हैं।”
उन्होंने आगे कहा- मोदी सरकार की सबसे बडी उपलबद्धि नक्सलमुक्त भारत है। साथ ही आरोप लगाया कि यह काम दो साल पहले ही हो गया होता अगर कांग्रेस साथ देती। छत्तीसगढ़ की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने साथ दिया होता तो 2024 में नक्सलवाद का सफाया हो सकता था।
सोमवार को लोकसभा में देश से नक्सलवाद पर चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि इसके पीछे कांग्रेस की वामपंथी विचारधारा जिम्मेदार है। उन्होंने इस दौरान इंदिरा गांधी से लेकर सोनिया गांधी, राहुल गांधी, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह व पूर्व गृह मंत्री पी चिंदबरम के नक्सलवादियों को किसी न किसी रूप में प्रश्रय देने के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र किया।
साथ ही कहा कि राहुल गांधी ने 172 जवानों को मारे वाले खुंखार नक्सली हिडमा के मारे जाने पर इंडिया गेट पर हुए प्रदर्शन का वीडियो अपने इंटरनेट एकाउंट से साझा किया था जिसमें नारे लग रहे थे कि जितना हिडमा मारोगे, उतनी हिडमा पैदा लेगा। इसके पहले भी राहुल ने ओडिशा में लाडो सिकोका के साथ मंच साझा किया था। यह कांग्रेस की सोच को दर्शाता है।
सोमवार को लोकसभा में नियम 193 के तहत वामपंथी उग्रवाद से देश को मुक्त कराने के विषय पर रखी गई चर्चा में कई सदस्यों ने भाग लिया था। करीब छह घंटे तक चली इस चर्चा के बाद केंद्रीय गृह मंत्री ने नक्सलवाद को लेकर जहां 1970 से 2026 तक उठाए गए एक-एक कदमों का जिक्र किया। वहीं बताया कि इनमें से अधिकांश समय कांग्रेस पार्टी ही सत्ता में रही, लेकिन इसके बाद भी यह समस्या खत्म होने के बजाय और बढ़ी है।
उन्होंने यह भी साफ किया कि गरीबी के कारण नक्सलवाद इन क्षेत्रों में नहीं पहुंची थी, बल्कि नक्सलवाद के कारण इन क्षेत्रों में गरीबी रही। क्योंकि इन्होंने बैंक, अस्पताल, स्कूल जला दिए थे। हथियारबंद वामपंथियों ने इस क्षेत्रों को अपने सबसे सुरक्षित ठिकाने के लिए रूप में चुना गया था, क्योंकि इन क्षेत्रों में वह छुप सकते थे। जो लोग पिछडेपन का नरेटिव खड़ा कर रहे है, वह पूरी तरह से गलत है। कुछ लोग मारे जा रेह नक्सलियों के लिए लेख लिखते हैं लेकिन उनके बारे में एक शब्द नहीं कहते जो इनकी गोलियों से मारे जाते हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि यदि ये आदिवासी विचारधारा को मानने वाले होते तो इनके आदर्श तिलका मांझी व भगवान बिरसा मुंडा होते, लेकिन इन्होंने अपना आदर्श माओ माना है। ये अपने आदर्श तय करने में भी विदेश से इंपोर्ट करते है। गृह मंत्री शाह ने दावा कि देश से अब नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म हो गया है, वैसे तो यह 2024 में ही खत्म हो गया होता, जो बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सिमट भी गया था लेकिन छत्तीसगढ़ की उस समय कांग्रेस और भूपेश बघेल सरकार नक्सलियों का समर्थन कर रही थी।
कांग्रेस सांसदों की इस दौरान आपत्ति पर शाह ने कहा कि बघेल से पूछ लीजिएगा, हम इसके प्रमाण भी दे देंगे। शाह ने मौजूदा समय में नक्सलवादियों का सारा कैडर समाप्त हो चुका है। इनमें से अधिकांश ने सरेंडर कर दिया है, या पकड़े गए या मार दिए गए है।
शाह ने कहा कि जो लोग एक सशस्त्र आंदोलन के पैरोकार बनकर यह कहते हैं कि उन्होंने अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी। मैं उनसे पूछता हूं। क्या आप संविधान का सम्मान करेंगे या नहीं? यदि किसी के साथ अन्याय होता है, तो उसके लिए अदालतें स्थापित की गई हैं; विधानसभाएं, जिला परिषदें और तहसीलें गठित की गई हैं। मैं यह कहना चाहता हूं कि वह दौर अब खत्म हो चुका है। यह नरेंद्र मोदी की सरकार है। जो कोई भी हथियार उठाएगा, उसे जवाबदेह ठहराया जाएगा। इस तरह का बर्ताव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार इन मुद्दों के प्रति संवेदनशील है। वह सभी शिकायतों को सुनने के लिए तैयार है और उन्हें हल करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि देश में माओवादी हिंसा करने के वालों के दिन अब खत्म हो गए है। हथियार उठाने वालों का हिसाब होगा।
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