सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फिल्म अभिनेता राजपाल यादव से कहा कि वह एक अच्छी फिल्म बनाकर लोगों का फिर से मनोरंजन करें और अपनी छवि सुधारें। शीर्ष अदालत ने चेक बाउंस मामले की सुनवाई के दौरान यह सुझाव तब दिया, जब फिल्म अभिनेता ने कहा कि फिल्म ‘अता, पता लापता’ से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ क्योंकि मेरी फिल्म को रिलीज होने से रोक दिया गया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष यादव की ओर से कहा गया कि पिछले आदेश के पालन में 1.15 करोड़ रुपये के भुगतान कर दिया गया है। साथ ही, यह भी बताया कि उन्हें उनकी प्रॉपर्टी के लिए एक संभावित खरीदार मिल गया है, जो 12 अक्तूबर तक रजिस्ट्री में डिमांड ड्राफ्ट के जरिए 85 लाख रुपये जमा करने को तैयार है। पीठ ने कहा कि वह यादव के व्यवहार से संतुष्ट नहीं है, लेकिन वह उन्हें थोड़ी राहत दे रही है。
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में खुद मौजूद फिल्म अभिनेता राजपाल यादव ने पीठ को बताया कि उन्हें अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ में भारी आर्थिक नुकसान हुआ था। यादव ने पीठ से यह भी कहा कि मेरे खिलाफ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई। मेरी फिल्म रोक दी गई। इसे 1,200 सिनेमा घरों में रिलीज होना था, लेकिन यह एक भी थिएटर में रिलीज नहीं हो सकी। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने उनसे कहा ‘आपकी कोई नई फिल्म आ रही है? कोई अच्छी सी फिल्म बनाकर लोगों का फिर से मनोरंजन कीजिए, आपकी छवि फिर से बन जाएगी। हमारे यहां कुछ वकील भी अच्छे एक्टर हैं, आप उन्हें लेकर कोई फिल्म बनाओ।’
सीजेआई सूर्यकांत द्वारा अपनी छवि सुधारने के लिए फिल्म बनाने के सुझाव दिए जाने पर अभिनेता राजपाल यादव ने कहा कि वह अपने चेक बाउंस और आर्थिक परेशानियों पर एक फिल्म बनाने की सोच रहे हैं। सीजेआई से हल्की-फुल्की बातचीत के दौरान यादव ने एक फिल्म का टाइटल भी बताया। उन्होंने फिल्म का नाम ‘सोलह सावन झेल के’ रखने के बारे में सोचा है। यह नाम 2010 से 2026 के उस समय को दिखाता है, जिसके दौरान वह इस विवाद से जूझ रहे हैं। अब मामले की सुनवाई अगले सप्ताह है।
यह कानूनी विवाद 2010 के एक वित्तीय समझौते से जुड़ा है, जिसके तहत राजपाल यादव को अपनी पहली निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये मिले थे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि 2013 में, यादव ने 2010 में फिल्म के लिए मिली 5 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता के निपटारे के लिए 1.05 करोड़ रुपये के सात चेक दिए थे। फर्म का आरोप है कि ये चेक बाउंस हो गए। शिकायतकर्ता के अनुसार, 2012 में दोनों पक्षों के बीच हुए एक समझौते में कहा गया था कि यादव, उनकी पत्नी और उनकी कंपनी ब्याज सहित लगभग 11 करोड़ रुपये चुकाने के लिए सहमत हुए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर को सरेंडर करने से उनकी छूट को 5 अक्टूबर तक बढ़ा दिया था। 8 सितंबर को, सुप्रीम कोर्ट ने यादव की याचिका पर नोटिस जारी किया और कहा कि इस कोर्ट की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त पर उन्हें सरेंडर करने से छूट दी जाएगी।
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