राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग अब मरीजों की सुविधा और पारदर्शिता को केंद्र में रखकर अस्पतालों में मिलने वाली रजिस्ट्रेशन पर्चियों में बड़े बदलाव करने जा रहे हैं। इस बदलाव का उद्देश्य न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल रूप से मजबूत बनाना है, बल्कि मरीज
बीडीके अस्पताल PMO और वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ एवं पीएमओ डॉ. जितेन्द्र भाबू का कहना है कि अस्पताल पर्ची में महत्वपूर्ण जानकारी को ही रखने और बाकी जानकारी को चिकित्सकीय परामर्श के लिए सुरक्षित रखने से परामर्श की गुणवत्ता में सुधार होगा। पर्ची में आभा आईडी और क्यूआर कोड का समावेश डिजिटाइजेशन और लंबी कतारों को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।”
हिंदी में मिलेगी जानकारी, अनावश्यक जानकारी होगी हटाई
स्वास्थ्य विभाग ने यह निर्णय लिया है कि अब पर्चियों पर जानकारी हिंदी भाषा में दी जाएगी। अभी तक अधिकतर जानकारी अंग्रेजी में दी जाती थी, जिससे आमजन को समझने में परेशानी होती थी। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को पर्ची पढ़ने और समझने में दिक्कत होती थी। अब हिंदी भाषा के प्रयोग से यह परेशानी दूर हो जाएगी।
साथ ही, पर्ची में अनावश्यक जानकारी को हटाने की योजना भी है, जिससे न केवल पर्ची सरल और स्पष्ट बनेगी, बल्कि चिकित्सकों को दवा लिखने और फार्मासिस्ट को दवा देने में भी सुविधा होगी। यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगा।
क्यूआर कोड और आभा आईडी का समावेश
नवीन रजिस्ट्रेशन पर्ची में क्यूआर कोड शामिल किया जाएगा, जिसकी मदद से मरीज की जानकारी को डिजिटल रूप से स्कैन किया जा सकेगा। इससे डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ को मरीज की संपूर्ण जानकारी तक तुरंत पहुंच मिल सकेगी। यह सुविधा विशेष रूप से आपातकालीन स्थिति में बेहद कारगर सिद्ध होगी।
इसके साथ ही पर्ची पर अब मरीज की आभा आईडी (ABHA ID) भी अंकित की जाएगी। यह आभा आईडी मरीज की डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल से जुड़ी होगी, जिससे मरीज का संपूर्ण स्वास्थ्य रिकॉर्ड एक क्लिक में उपलब्ध हो सकेगा। इससे न केवल मरीज की बार-बार जांच और दस्तावेज लाने की झंझट खत्म होगी, बल्कि डॉक्टर भी पहले से उपलब्ध मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर सटीक परामर्श दे सकेंगे।
स्वास्थ्य पहचान संख्या (Health ID) होगी सरल
अभी तक मरीजों को 15 अंकों की हेल्थ आइडेंटिफिकेशन संख्या (Health ID) दी जाती थी, जिसे याद रखना और उपयोग में लेना कठिन होता था। अब इस संख्या को छोटा और अधिक उपयोगकर्ता अनुकूल बनाया जाएगा। इससे न केवल मरीजों को सुविधा होगी, बल्कि अस्पताल स्टाफ के लिए भी इसका प्रबंधन सरल हो जाएगा।
श्रेणी की जानकारी भी होगी दर्ज
नवीन पर्ची में मरीज की श्रेणी भी अंकित की जाएगी। उदाहरण के लिए, यदि कोई मरीज आरजीएचएस, मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना (मां योजना), प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY), या निरोगी राजस्थान योजना का लाभार्थी है, तो उसकी जानकारी पर्ची में स्पष्ट रूप से दर्ज की जाएगी। इससे संबंधित सुविधाओं का लाभ देने में अस्पतालों को भी आसानी होगी।
अनावश्यक जानकारियां हटाई जाएंगी
नवीन पर्ची से जनआधार नंबर और टोल फ्री नंबर जैसी जानकारियां हटाई जाएंगी जो अब प्रासंगिक नहीं रह गई हैं या जिनका प्रयोग कम हो गया है। इस बदलाव से पर्ची और अधिक साफ और उपयोगी बन सकेगी।
हर स्तर के अस्पतालों में होगा लाभ
यह बदलाव जिला अस्पतालों से लेकर पीएचसी-सीएचसी तक लागू किए जाएंगे। झुंझुनूं जिले में राजकीय बीडीके अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 3000 मरीज आते हैं। वहीं, नवलगढ़ के जिला अस्पताल में 1500 से 2000, सीएचसी में 500 से 1000 और पीएचसी में 250 से अधिक मरीज प्रतिदिन पहुंचते हैं। इनमें से अधिकांश मरीज हिंदी भाषी होते हैं और अंग्रेजी पर्चियों को समझने में उन्हें कठिनाई होती है। अब पर्ची हिंदी में होने से वे बेहतर तरीके से जानकारी समझ पाएंगे और चिकित्सकीय सेवाओं का अधिक प्रभावी रूप से लाभ उठा सकेंगे।
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