अमेरिका-ईरान में खूनी जंग: एक तरफ ताबड़तोड़ हमले, दूसरी तरफ महाडील की तैयारी; क्या है पर्दे के पीछे की असली कहानी? – usiran conflict airstrikes secret peace talks unfold news in hindi – Jagran

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच खूनी संघर्ष जारी है, जहां दोनों देशों ने एक-दूसरे पर भारी हवाई हमले किए हैं। हालांकि, हमलों के बीच ही पर्दे के …और पढ़ें
अमेरिका-ईरान संघर्ष।
अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे पर किए भीषण हवाई हमले।
हमलों के बीच पर्दे के पीछे शांति समझौते की बातचीत जारी।
ईरान के जमे हुए फंड और अमेरिकी शर्तों पर फंसा पेंच।
डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-प्रतिदिन और भयावह रूप लेता हुआ नजर आ रहा है। जहां अमेरिका और ईरान के बीच जारी खूनी तनातनी अब विनाशकारी महायुद्ध में तब्दील हो चुकी है। गुरुवार को दोनों देशों ने एक-दूसरे पर भारी हवाई हमले किए, जिसने पूरे पश्चिम एशिया की नींद उड़ा दी। 
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुली हुंकार भरते हुए चेतावनी भी दी है कि अगर ईरान ने तुरंत आत्मसमर्पण जैसी शांति डील पर दस्तखत नहीं किए, तो उसे ऐसे भीषण और श्मशान बना देने वाले हवाई हमलों का सामना करना पड़ेगा, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।
हलांकि एक तरफ दोनों देशों के बीच ताबड़तोड़ हमले और बमबारी जारी है। वहीं दूसरी तरफ इन हमलों के बीच ही दोनों देशों के बीच एक शुरुआती समझौते को लेकर बातचीत पर्दे के पीछे काफी तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्ष एक सहमति पत्र (एमओयू) के ड्राफ्ट पर संदेशों का आदान-प्रदान कर रहे हैं, हालांकि कई मुद्दों पर अभी पेंच फंसा हुआ है।
बातचीत को लेकर कहां फंसा है पेंच?
ईरान के सरकारी सूत्रों और एक यूरोपीय अधिकारी के मुताबिक, बातचीत में सबसे बड़ा मुद्दा विदेशों में फ्रीज पड़े ईरान के अरबों डॉलर के फंड को जारी करना है। ईरान चाहता है कि विदेशों में फंसे उसके तेल की कमाई के 6 से 12 अरब डॉलर तुरंत जारी किए जाएं। साथ ही, वह लेबनान में हिज्बुल्लाह पर इजरायली हमले रोकने, प्रतिबंध हटाने और समुद्री रास्ते पर अपना नियंत्रण चाहता है।
वहीं बात अब अगर अमेरिका की शर्तों की करें तो अमेरिका का कहना है कि वह पूरा पैसा एक साथ नहीं देगा, बल्कि मानवीय सामान (दवा, अनाज) खरीदने के लिए किस्तों में फंड जारी करेगा। ट्रंप की शर्त है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की जिद छोड़े और समुद्री रास्तों पर जहाजों को न रोके।
जैसे को तैसा- दोनों तरफ से दागी गईं मिसाइलें
बता दें कि इस हफ्ते सोमवार को होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान द्वारा अमेरिका के एक अपाचे हेलीकॉप्टर को गिराए जाने के बाद से दोनों देशों में जंग जैसी स्थिति है। अमेरिकी सेना ने रात के अंधेरे में ईरान के सैन्य निगरानी केंद्रों, संचार प्रणालियों और हवाई रक्षा ठिकानों पर जोरदार हमले किए। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने तुरंत डील साइन नहीं की, तो भारी बमबारी दोबारा शुरू होगी।
जवाब में ईरान के ‘इलामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने कुवैत और बहरीन में मौजूद 18 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े और जॉर्डन में अमेरिकी एयरबेस पर ईरान ने 12 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इन हमलों के कारण कुवैत को कुछ समय के लिए अपना एयरस्पेस (हवाई क्षेत्र) बंद करना पड़ा।
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